ये ऐसा ही देश है ….

nepal rastrabad
गंगेश मिश्र
बँट गया है, देश;
उत्तर और दक्षिण में;
पहाड़ और समतल में;
अंध-कूप में गिरी-पड़ी;
असहाय सी राजनीति;
नीतिकारों की अनीति;
देश की नियति;
सब कुछ;
अनिश्चितता के गर्त में;
समाता जा रहा;
यहाँ कुछ भी;
समझ में न आ रहा।
नैतिक मूल्यों का पतन;
राजनैतिक चरित्र, का अवसान;
पल-पल बढ़ती कुण्ठा;
घटती निष्ठा;
उत्सृङ्खलता की पराकाष्ठा;
नित-नये वादे,
समझौते; कुटिल इरादे;
खुली आँखों से दिखता;
बंद आँखों से;
महसूस होता है।
पद-लोलुप मुस्कुराता, हँसता है;
बेवकूफ़ ! ईमान वाला रोता है।
ये ऐसा देश है !
जहाँ अपनों से;
विदेशियों सा;
व्यवहार होता है।
राष्ट्रीयता का राग !
वर्जित स्वरों में;
आलाप बे-सुरा;
अपना घर फूँकने वाले;
राष्ट्रवादी;
सबके आगे,आगे चलते हैं;
लहू पीते हैं;
फ़िर हड्डियों में;
छेद करते हैं;
ये ऐसा ही, देश है।

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