यौनजन्य दुर्व्यबहार रोकने के लिए सेफ्टी पिन अभियान, ७८ युवा युवती नियन्त्रण मे

इन्सपेक्टर शर्मिला गुरुङ्ग

काठमाण्डौ, असोज २८ |  सार्वजनिक यातायातो को व्यवस्थित, सुरक्षित और मर्र्यादित बनाने के उद्धेश्य से महानगरीय प्रहरी कार्यालय रानीपोखरी ने सुरू किया सेफ्टी पिन अभियान अन्तरगत उपत्यका के विभिन्न स्थानो से ७८ युवा युवतीयोको पुलिस ने नियन्त्रण मे लिया है ।
सेफ्टी पिन अभियान अन्तरगत करिब अढाई महिना की अवधी मे ५ जोडी सहित ७८ युवा युवतीयो को पुलिस ने नियन्त्रण मे लिया गया है सेफ्टी पिन अभियान की इन्सपेक्टर शर्मिला गुरुङ्ग ने यह जानकारी दी है  ।
सार्वजनिक यातायात मे महिला तथा बालबालिकाओ के उपर होनेवाला यौनजन्य दुब्र्यबहार को न्यूनिकरण करके उपत्यका मे महिला तथा बालबालिकाओ को सुरक्षित यात्रा कराने के लिए पुलिस ने ३३ टोली बनाकर उपत्यका मे चलनेवाला बिभिन्न सार्वजनिक सवारी साधनो मे सादे लिवास मे करिब अढाई महिने से निरन्तर रुप में पुलिस परिचालन किया जा रहा है महानगरीय पुलिस आयुक्त एआईजी जयबहादुर चन्द ने बताया । उपत्यका मे चलने वाली सवारी साधनो मे दुब्र्यबहार करने वाले को नियन्त्रण मे लेने के क्रम मे काठमाण्डौ से ६७ , ललितपुर ५ और भक्तपुर से ६ को नियन्त्रण मे पुलिस ने लिया है ।
महानगरीय पुलिस कार्यालय के तथ्यांक अनुसार यौनजन्य दुब्र्यवहार और अपशब्द गालीगलौज करने के मामले मे ५५, अश्लिल हर्कत करने के मामले मे १०, पाकेटमार ८ और अन्य ५ लोगो को नियन्त्रण मे लिया है ।
नियन्त्रण मे लिए गये मध्ये हिंसा की गाम्भीर्यता के अनुसार २५ लोगो के उपर सार्वजनिक अपराध का मुद्दा चलाया गया है और ५३ लोगो को इस तरह का कार्य दोबारा नही करने के शर्त पे आभिभावक के हवाले किया पुलिस ने बतया । नियन्त्रण मे लिएगये मध्ये ५ जोेडी प्रेमी प्रमिका थे मगर सार्वजानिक स्थान मे समाज के लिए शोभा न देनेवाली गतिविधी करने पर उनलोगो को भी नियन्त्रण मे लिया गया प्रहरीने बतया ।

सेफ्टी पिन अभियानका अवधारणा कैसे आया ?
महिला तथा बालबालिकाओ के उपर सार्वजनिक सवारीसाधनो मे यौनजन्य हिंसा होने का बहुत कम्पलेन आया । कम्पलेन आने के बाद हमने एक छोटा सर्भे भी करकर देखा की कितना इस बिषय के सम्बन्ध मे पुलिस किस तरहा का कार्य कररही है । हामारे मातहत मे रहे भक्तपुर, काठमाडौं और ललितपुर के पुलिस कार्यालयो मे इस तरह के कितने केश आ चुके है और इस केश को कैसे मिलाते है इस बिषय मे जाँच करने के बाद इस तरह के कम्पलेन पुलिस के पास बहुत कम मात्रा मे आये पता चला और आये केशो को भी केबल मिलापत्र मे ही सिमित रखा हुआ पया । इस मिलापत्र के तरिके से पीडको का मनोबल बढ्ता दिखाई देनेके कारण हमने सोचा की अब चुप रहने से कुछ काम नही चलेगा तब ‘सेफ्टीपिन’ नाम देकर इस अभियान का संचालन किया सेफ्टी पिन अभियान की इन्सपेक्टर गुरुङ्ग ने बतया ।
क्या है सेफ्टी पिन अभियान ?
सार्वजनिक यातायातो मे महिला तथा बालबालिका ओ के उपर होनेवाला यौनजन्य दुब्र्यवहार और यौनजन्य आशयो से महिला तथा बालबालिकाओ के अङ्ग मे स्पर्श करना वा स्पर्श करने का प्रयास करना , अश्लील तथा यौनजन्य आशय प्रदर्शन करना, यौनजन्य आशयो से इसारे देना लगायत के कार्य कानून द्वारा बर्जित अपराध मना गया है | फिर भी कितनो को इस बिषय के सम्बन्ध मे कानूनी ज्ञान न होना और बहुत से पिडित डर के मारे, सामाजिक प्रतिष्ठा, लाज तथा असहज के मनने के कारण कानुनी प्रक्रिया मे न आनेके वजहे से पुलिस अपने सक्रियता मे इस गतिविधि करने वालो को कानूनी कारवाही करकर सार्वजनिक सवारी साधनो मे होनेवाला यौनजन्य दुब्र्यवहार को न्यूनिकरण कर व्यवस्थित, सुरक्षित और मर्या्दित के साथ महिला तथा बालबालिका मैत्री सार्वजनिक यातायातो के वातावरण निर्माण करने के लिए पुलिसने ये अभियान संचालन किया है ।

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