राउत प्रकरण ने पुरे मधेश को झकझोड दिया है

ck raut in coartकाठमाणडू, ८ अक्टूवर । अन्तत: डा सीके राउत पर सरकार ने रष्ट्रद्रोह का मुद्दा दायर कर ही दिया । आज मधेश मे राउत की रिहाई की आशा की जारही थी । लेकिन सरकार ने उनकी आशा को निराशा मे बदल दिया । हाँ रिहाई की आशा के पिछे कइ कारण जरुर थे । राउत व्दारा किये गये आमरण अनशन को तोडाने पहुँचे सरकार के प्रवक्ता तथा सन्चार मन्त्री मिनेन्द्र रिजाल तथा कृषि मन्त्री हरिप्रसाद पराजुली ने अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता और नागरिक हक के सम्मान करने की प्रतिवध्दता व्यक्त की थी । उनके साथ जुस पिलाने पहुँचे थे  नेपाली कांग्रेस के उपसभापति रामचन्द्र पौडेल । सबों ने राउत की रिहाई के लिये पहल करने की बात कही थी । रिहाई की प्रवल सम्भावना तब और बढ गइ जब स्वयं प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला ने यह अभिव्यक्ति दे डाली कि केवल बोलने के आधार पर गिरफ्तारी तो राजतन्त्र मे होती थी , मैं गृहमन्त्री से रिहाइ के लिये खुद बात करुगां । उन्होने यह बात नागरिक समाज के गणेश मन्डल तथा अधिवक्ता व्दय दीपेन्द्र झा और सुरेन्द्र महतो से कही थी । लोकतन्त्र पर विश्वास करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिये यह प्रयाप्त था कि सिके राउत आज जरुर रिहा किये जायेगें । लेकिन आज सरकार ने जो कुछ भी किया उससे से यह जाहिर होता है कि देश मे अभी भी राजतन्त्र कायम ही है तथा देश पर पन्चायती काले बादल अभी भी मडरा ही रहे हैं । आज यह भी प्रमाणित हो गया कि मधेश पुर्णत: गुलाम है और मधेशी घुट-घुट कर जी रहें हैं ।

कल्ह सुवह मैं  भी पहलीवार एक भरतीय पत्रकार के साथ सिके रउत से मिलने गया था । मुझे बहुत अजुबा लगा कि वह भरतीय पत्रकार राउत से कहतें हैं कि ‘राउतजी मै आपके रिहाई की खबर से दु:खी हूँ , मुझे तब खुशी होगी जब आप पर मुद्दा चलाई जाय तथा आजिवन कारावास माँग की जाय और आपको अभी जेल मे ही रखा जाय’ । मुझे बहुत बुरा लगा और मैने प्रश्न कर दिया कि पत्रकारजी यह आप क्या कहरहें है ? तब पत्रकार महोदय ने सफाइ देते हुये कहा कि यह पहला अबसर है कि मधेश मुद्दा ( CAUSE) के लिये कोई व्यक्ति जेल गया है । जो मुद्दा मुरझा गया था वह अब पुनर्जिवित हो गया है । आखिर नेलशन मडेंला भी तो जेल से ही आन्दोलन किये थे ।

खैर, जो हुआ अच्छा ही हुआ इससे ज्यादा क्या हो सकता था ? आज मधेशी दलों की जो कमजोर स्थिति है उसमे वर्तमान सरकार से इससे ज्यादा क्या अपेक्षा की जा सकती है । लेकिन हाँ , इस राउत प्रकरण ने पुरे मधेश को झकझोड कर रख दिया है । अब हर मधेशी यह सोचने को बाध्य है कि उनके साथ होरहे दुसरे दर्जे के व्यवहार का कैसे सामना किया जाय । तराई से जो खबर आरही है उससे लगता है कि गावँ गाँव मे सिके राउत पहुँच चुका है । हर व्यक्ति के जुवान पर अभी सिके रउत ही है । सभी गावँ के चौराहे पर लोग एकत्रित होतें है और सिके रउत के प्रति अपनी सहानुभुति प्रगट पगट करते है । युवाओं मे प्रतिसोध की लहर दौर रही है  केवल इन्तजार है ऊस शुभ घडी की कि कब यह चिन्गारी आग का रुप लेगी और उसमे कितने रावण जलकर भस्म होगें । SNM

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