राखी का त्यौहार है भद्रा और ग्रहण से ग्रस्त जानें कब बांधे राखी : राधाकान्त शास्त्री

आचार्य राधाकान्त शास्त्री, रक्षाबंधन विशेष :
 अपने भाई की कलाई पर राखी बांधने के लिये हर बहन रक्षा बंधन के दिन का इंतजार करती है। श्रावण मास की पूर्णिमा को यह पर्व मनाया जाता है। इस पर्व को मनाने के पिछे कहानियां हैं। यदि इसकी शुरुआत के बारे में देखें तो यह भाई-बहन का त्यौहार नहीं बल्कि विजय प्राप्ति के किया गया रक्षा बंधन है। भविष्य पुराण के अनुसार जो कथा मिलती है वह इस प्रकार है।
बहुत समय पहले की बाद है देवताओं और असुरों में युद्ध छिड़ा हुआ था लगातार 12 साल तक युद्ध चलता रहा और अंतत: असुरों ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर देवराज इंद्र के सिंहासन सहित तीनों लोकों को जीत लिया। इसके बाद इंद्र देवताओं के गुरु, ग्रह बृहस्पति के पास के गये और सलाह मांगी। बृहस्पति ने इन्हें मंत्रोच्चारण के साथ रक्षा विधान करने को कहा। श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन गुरू बृहस्पति ने रक्षा विधान संस्कार आरंभ किया। इस रक्षा विधान के दौरान मंत्रोच्चारण से रक्षा पोटली को मजबूत किया गया। पूजा के बाद इस पोटली को देवराज इंद्र की पत्नी शचि जिन्हें इंद्राणी भी कहा जाता है ने इस रक्षा पोटली के देवराज इंद्र के दाहिने हाथ पर बांधा। इसकी ताकत से ही देवराज इंद्र असुरों को हराने और अपना खोया राज्य वापस पाने में कामयाब हुए।
वर्तमान में यह त्यौहार बहन-भाई के प्यार का पर्याय बन चुका है, कहा जा सकता है कि यह भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को और गहरा करने वाला पर्व है। एक ओर जहां भाई-बहन के प्रति अपने दायित्व निभाने का वचन बहन को देता है, तो दूसरी ओर बहन भी भाई की लंबी उम्र के लिये उपवास रखती है। इस दिन भाई की कलाई पर जो राखी बहन बांधती है वह सिर्फ रेशम की डोर या धागा मात्र नहीं होती बल्कि वह बहन-भाई के अटूट और पवित्र प्रेम का बंधन और रक्षा पोटली जैसी शक्ति भी उस साधारण से नजर आने वाले धागे में निहित होती है।
राखी का त्यौहार है भद्रा और ग्रहण से ग्रस्त जानें कब बांधे राखी :-
वर्ष 2017 में रक्षा बंधन 7 अगस्त, सोमवार को मनाया जाएगा। भारत में यह त्यौहार भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है और इस त्यौहार का प्रचलन सदियों पुराना बताया गया है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बाँधती हैं और भाई अपनी बहनों की रक्षा का संकल्प लेते हुए अपना स्नेहाभाव दर्शाते हैं।
कब तक रहेगी भद्रा :-
पिछले साल रक्षाबंधन के पर्व को भद्रा की नजर नहीं लगी थी क्योंकि भद्रा सूर्योदय से पहले समाप्त हो गई थी लेकिन इस बार रक्षा बंधन के इस पावन पर्व को भद्गा की नजर लगी हुई है।  जिस कारण 11 बजकर 4 मिनट के बाद ही कलाई बांधने की रस्म शुरु होगी। भद्रा को चूंकि शुभ कार्य के लिये अशुभ माना जाता है इसलिये भद्रा के समाप्त होने के पश्चात ही राखी बांधने की परंपरा को शुरु करना शुभ फलदायी रहेगा।
क्या है भद्रा
शास्त्रों की मान्यता के अनुसार भद्रा का संबंध सूर्य और शनि से होता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में, भद्रा भगवान सूर्य देव की पुत्री और शनिदेव की बहन है। शनि की तरह ही इसका स्वभाव भी क्रूर बताया गया है। इस उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ही भगवान ब्रह्मा ने उसे कालगणना या पंचाग के एक प्रमुख अंग करण में स्थान दिया। जहां उसका नाम विष्टी करण रखा गया। भद्रा की स्थिति में कुछ शुभ कार्यों, यात्रा और उत्पादन आदि कार्यों को निषेध माना गया। इसलिये इस बार भद्रा का साया समाप्त होने पर ही रक्षाबंधन अनुष्ठान किया जा सकेगा।
 
इसलिये भी खास है इस बार राखी :-
रक्षाबंधन का यह पवित्र त्यौहार इस बार सोमवार को होगा जोकि इसके खास होने कि एक वजह है। आप सोचते होगे कि सोमवार में ऐसा क्या खास है। दरअसल यह साधारण सोमवार नहीं बल्कि सावन माह का पावन और अंतिम सोमवार है। सावन सोमवार होने के कारण यह दिन बहुत सौभाग्यशाली है और भोलेनाथ की कृपा भी इस दिन बनी रहती है। हालांकि रक्षाबंधन के संबंध में यह मान्यता जुड़ी हुई है कि देवताओं के गुरु बृहस्पति ने ही देवराज इंद्र को असुरों पर विजय पाने के लिये रक्षा बंधन का सुझाव दिया था जिसके बाद इस त्यौहार को मनाने का चलन शुरु हुआ।
राखी पर लगेगा ग्रहण
7 अगस्त 2017 को मनाये जा रहे रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि ग्रहण रात्रि 10 बजकर 52 मिनट पर शुरु होगा लेकिन ग्रहण का सूतक दोपहर बाद 1 बजकर 52 मिनट से ही आरंभ हो जायेगा जो रात्रि के 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। इसलिये  ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि इस वर्ष रक्षाबंधन का अनुष्ठान भद्रा समाप्ति के पश्चात यानि 11 बजकर 4 मिनट से चंद्रग्रहण के सूतक लगने से पहले यानि 1 बजकर 52 मिनट तक कर लेना चाहिये।
शुभ महूर्त
रक्षा बंधन तिथि – 07 अगस्त 2017,सोमवार
अनुष्टान समय – 11:04 से 21:12 (07 अगस्त 2017)
अपराह्न मुहूर्त – 13:46 से 16:24 (07 अगस्त 2017)
प्रदोष समय रक्षा बंधन मुहूर्त – 19:03 बजे से 21:12 (07 अगस्त 2017)
पूर्णिमा तिथि प्रारंभ – 22:28 बजे (06 अगस्त 2017)
पूर्णिमा तिथि समाप्त – 23:40 बजे (07 अगस्त 2017)
भद्रा समाप्ति समय – 11:04 बजे  (07 अगस्त 2017)
चंद्र ग्रहण सूतक – 13:52 बजे (07 अगस्त 2017)
 को रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनाएं और हम आशा करते है कि आप के बीच यूँही प्रेम, स्नेह बना रहें।
रक्षाबंधन पर भाई बहन का विशेष प्यार बने ,
आचार्य राधाकान्त शास्त्री,
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