राखी की सात वचनवद्धता

कविता दास:नेपाल में विशेषतः तर्राई क्षेत्र में राखी बधने-बधवाने का प्रचलन तेजी से आगे बढÞ रहा है। प्रत्येक वर्षउत्साह के साथ इसे मनाया जाता है। अभी अभी बिती राखी के बारे में कुछ जानकारी रखना बेहतर होगा।
बहन ने भाई की कलाई पर राखी बांध दी और भाई ने बहन को कुछ तोहफा दे दिया। यह तो हर्ुइ आम परंपरा लेकिन क्यों न इस बार बहन भाई की कलाई पर वो धागा बांधे जो सच्चाई की मजबूती से बंधा हो और भाई उसे अपनी कलाई से कभी अलग न होने दे।brother-and-sister
प्यार की राखी
यह राखी सलमा-सितारे और मोतियों से नहीं सजी है। यह राखी, अपने मन के आंगन में खिलने वाले प्यार के मासूम फूल से बनी है। इसे बांधने और बंधाने की यही शर्त है कि बहन और भाई दोनों यह कसम खाएं कि उनका प्यार कभी नहीं बदलेगा। हर मौसम, हर समय, हर परिस्थिति में उनके प्यार का फूल तरोताजा रहेगा। हालात कैसे भी हों, कितनी भी मुसीबतें आएं, यह प्यार कभी कम नहीं होगा। इस रिश्ते का सौर्न्दर्य और उसकी सादगी बनी रहे, बची रहे, दिल की गहर्राई में बसा प्यार निरंतर बढÞता रहे, फलता-फूलता रहे, यह दुआ हमेशा दोनों के दिल में ताउम्र बनी रहेगी।
भरोसे की राखी
यह राखी बडÞी महीन लेकिन मजबूत डोरी से बनी है। इस राखी की यही शर्त है कि भरोसे की रेशमी डोर दुनिया के ताने-बाने में कभी न उलझ पाए। यानी हर हाल में भाई का बहन के प्रति और बहन का भाई के प्रति विश्वास बरकरार रहे। इसे यूं भी कहा जा सकता है कि दोनों एक-दूसरे के प्रति विश्वास को टूटने नहीं देंगे। इससे जुडÞी एक बडÞी जिम्मेदारी यह भी है कि भाई-बहन इस राखी को बांधते हुए कसम लें कि एक-दूजे का विश्वास बनेंगे और उसे संजोए रखेंगे।
साथ की राखी
चाहे सारी दुनिया तुम्हारे विरूद्ध हो, तुम्हारा भाई हमेशा तुम्हारे साथ है। यह अटूट सहारा देते शब्द सच्चे मन से हर बहन के अर्न्तर्मन में बैठे होने चाहिए। उसका यह भाव कि मेरा भाई है न, और भाई का यह अहसास कि मेरी बहन सब संभाल लेगी, हर हाल में कायम रहे, यही इस राखी को बांधने की मजबूत शर्त है। इस दुनिया में मां और पिता के बाद भाई ही तो सच्चा और निःस्वार्थ साथ दे सकता है।
स्वतंत्रता की राखी
यह कसम आज के आधुनिक भाई-बहन को विशेष रूप से लेनी है। युवा होते भाई-बहन के बीच इस राखी ने अपनी अनिवार्यता सिद्ध की है। आज के दौर में हर कोई अपने लिए ‘स्पेस’ चाहता है लेकिन इसका गलत फायदा न उठाया जाए, इसकी जिम्मेदारी दोनों की बनती है। बहन की सहेलियां और भाई के दोस्त आपस में कितने किस हद तक स्वतंत्र रहें, इस राखी को बांध कर तय करें।
मुस्कान की राखी
यह राखी वचन चाहती है कि हर बहन के होंठों पर भाई का नाम सुनकर मुस्कान थिरक उठे। हर भाई की स्मृतियों के झरोखे से जब बहन झांके तो उसके चेहरे पर भी गुलाबी मुस्कुराहट खिल उठे। यह तभी संभव है जब दोनों एक-दूसरे का मन न दुखाने का संकल्प लें। कभी भूले से भी ऐसे कडÞवे बोल जुबान पर न आएं कि हमेशा के लिए बहन या भाई का कलेजा बींध जाए। दोनों विवाहित हैं तब भी अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच कुछ पल साथ ऐसे निकालें, जो एक-दूसरे के चेहरे पर मुस्कान लाने का सबब बन सकें।
समान भाव की राखी
इस राखी के साथ बंधी शर्त हर छोटे-बडÞे भाई-बहन के लिए है। लडÞना-झगडÞना, मार-पीट, रूठना-मनाना, सब चलें मगर कभी अपमान और तिरस्कार के बोल जुबान पर न आएं। रिश्तों की पवित्रता, परिवार की गरिमा और परस्पर समानता का भाव लिए यह राखी वचन चाहती है कि कभी अकेले में भी बहन या भाई मान घटाने वाली बात न कहें।
क्षमा की प्रतीक
यह राखी आज के तेजी से बदलते युग में हर भाई की कलाई पर सजना आवश्यक है। साथ ही हर बहन की थाली में भी इसे चमकना होगा। यह राखी हर भाई-बहन को उसके मनुष्य होने का हक दिलाती है। जाने-अनजाने बहुत सी गलतियां दोनों से हो जाती हैं। यह राखी चाहती है कि भाई बहन को और बहन भाई को उसकी हर गलती माफ करे। हां, माफ करने के साथ समझाए भी, ताकि वह गलती दोबारा न हो। िि
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