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राजनितिक अपरिपक्वता मे नेताओं की राजनितिक पदिय तृष्णा : सर्वदेव ओझा

यहाँ अब कौन गलत है और कौन सही ? यह मूल्यांकन कौन करे ? स्थानिय निर्वाचन के लिए आतुर पदिय स्वार्थी लोग वह कौन है ? आज इसे भी नया शिरा से मूल्यांकन करना ही होगा ।

सर्वदेव ओझा , नेपालगंज ,१० अप्रिल | राजनितिक अपरिपक्वता मे अजब नेताओं के गजब का राजनितिक पदिय तृष्णा !!! आज देश मे एक तरफ मधेसी , आदिवासी , जनजातियों आदि के अधिकार की प्राप्ति , सामाजिक न्याय आदि का वर्तमान मधेस बादी पार्टीयां राज्य के प्रमुख चार पार्टीयों के सामने दैनिक छलफल और वार्ता करके संबिधान शंसोधन की दुहाई के प्रयास मे है । और ईसी मे तो कुछ पुर्नलेखन की माग भी करते आ रहे है । ईसी मांग को अप्रत्क्ष रुप मे बाकी नेपाल की प्रमुख पार्टीयों मे रहे मधेसी नेता तथा सांसद भी डरे सहमे समर्थन के पक्ष मे भी खडे होने के प्रयास मे भी है ।

इधर जिले जिले के धरातल पर जो कल तक उसी मधेसी पार्टी और नेताओ को पद लोलुप और स्वार्थी कहने और बोलने वाले अपने आप को कल तक मधेसी वा मधेसी पार्टीयों मे समाहित स्थानिय नेता आज उन मधेसी , आदिबासी , जनजाति , महिला , अल्पसंख्यक के सभी मांग हो रहे अधिकारों , तथा सामाजिक , समानुपातिक अधिकार को ताक पर रख कर आज खुद उन्हे सरकार के घोषित स्थानिय निर्वाचन मे भाग लेने और जल्द से जल्द पद भार ग्रहण कर पदिय स्वार्थ मे अपने आप खुद अधिकांस तल्लीन दिखाई पड रहे है । इसे क्या कहा जाए ? आज मधेसी नेता और पार्टी ही गलत है या ईन्हे निर्वाचित करके भेजने वाले अधिकांस मधेसी धरातलिय कार्यकर्ता वा हिमायति मधेसी जनता ? यहाँ अब कौन गलत है और कौन सही ? यह मूल्यांकन कौन करे ? स्थानिय निर्वाचन के लिए आतुर पदिय स्वार्थी लोग वह कौन है ? आज इसे भी नया शिरा से मूल्यांकन करना ही होगा । यदि यही सच है तो अवश्य ही अन्त मे कौन कौन होगा ? जो वर्षो से हो रही शहीदी को मटिया मेट करने मे आज अपना चेहरा सामने ला रहा है और पद स्वार्थी के इस मुहीम मे आगे है । इसे क्या कहे ? राजनितिक अपरिपक्वता वा पदिय स्वार्थीपन ? आज मै अपने संजय की एक छोटी आंखों से देखने का प्रयास कर रहा हू । फिर भी देखे कौन कौन इस महाभारत की लडाई मे कौरव के पक्षधर होते है । देखे आगे आगे होता है क्या ? धन्यबाद ।

sarvdev ojha

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