राजनीतिक लड़ाई लड़ो पर आर्थिक विकास के साथ रहो

सिद्धार्थ डेवलपमेंट बैंक का दुगुना कैपिटल वृद्धि, व्यापार पोर्टफोलियो में बढ़ोतरी होगी । अब हमारे बैंक की ३२ शाखाएँ हो जाएँगी जो कि बहुत ही बड़ी उपलब्धि है हम सब के लिए ।

सिद्धार्थ डेवलपमेंट बैंक के सीईओ अजय मिश्र बैंक जगत के प्रख्यात व्यक्ति हैं । आज की अवस्था में बैंक जगत कैसे अपना कार्य संचालन कर रहा है , क्या कठिनाई है, इसका क्या समाधान हो सकता है ? इन सब विषयों पर महाप्रबंधक कविता दास की एक परिचर्चा अजय मिश्र के साथ
० आप के आने के बाद सिद्धार्थ डेवलपमेंट बैंक में क्या–क्या कार्य हुए हैं ?
– सिद्धार्थ बैंक में मेरे आने के बाद से बहुत ज्यादा उत्साहजनक प्रगति हुई है । मैं पिछले ६ महीनों से कार्यरत हूँ । जब मैंने कार्यभार

ajay mishra

अजय मिश्र

सम्भाला तो बैंक नुकसान में था, मासांत के दस दिन बाद इसकी कार्यक्षमता बढ़ी और १६ करोड़ का फायदा हुआ और ६ साल में पहली बार यहाँ के शेयरहोल्डर को ११ प्रतिशत बोनस शेयर मिला ।
० सिद्धार्थ डेवलपमेंट बैंक के व्यापार में क्या उपलब्धि हुई है ?
– व्यापार की उपलब्धि देखें तो इस ६ महीने में २७ प्रतिशत का विकास हुआ है डिपोजिट में और २५ प्रतिशत का विकास है लैंडिंग में । आज नेपाल का परिवेश या समय देखें तो लैंडिंग की कोई मांग नहीं है । अभी जो आन्दोलन और नाकाबंदी है इसके कारण कोई व्यापार या औद्योगीकरण नहीं हो रहा है । इस अवस्था में भी हमलोगों ने २५ प्रतिशत से ज्यादा का विकास हासिल किया है । नेपाल राष्ट्रीय बैंक एक नीति लेकर आई कि कैपिटल को चार गुना से ज्यादा वृद्धि किया जाये और मर्ज की नीति लाये । हम लोग पहला बैंक है जिस ने इस नीति और मर्ज प्रक्रिया का भरपूर स्वागत किया और जब यह नीति आई तब हमलोग ने मर्ज प्रक्रिया का सबसे पहले पहल किया । हमलोग ने २ बैंकिंग संस्थानों एकता विकास बैंक और नेपाल आवास फाइनेंस के साथ मिलकर मर्ज में जाने का कार्य शुरु किया है । अभी कुछ कÞानूनी प्रक्रिया बाकी है जो दो महीनों के अन्दर पूरा हो जायेगा । तब हम संयुक्त से आपने अभियान में लगेंगे । अब सिद्धार्थ डेवलपमेंट बैंक का दुगुना कैपिटल वृद्धि, व्यापार पोर्टफोलियो में बढ़ोतरी होगी । अब हमारे बैंक की ३२ शाखाएँ हो जाएँगी जो कि बहुत ही बड़ी उपलब्धि है हम सब के लिए ।
० मधेस में सिद्धार्थ डेवलपमेंट बैंक की कितनी शाखाएँ हैं और उनकी स्थिति कैसी है ?
– हमारी ५ शाखाएँ हैं मधेस में जो बीरगंज, बिराटनगर , लुम्बिनी, भैरहवा, धनगढ़ी में है । समस्या अभी यह है कि नाकाबंदी के बाद मधेस में हमारे बैंक की पांचो शाखा पूरी तरह से खुल नहीं पायी है । चार महीनों में बस १० दिन ही हमारा बैंक खुल पाया है । बंद के बाबजूद भी पर्फोमेंस अच्छा है कोई कमी कमजोरी नहीं है । मर्जर के बाद हमारी कुछ शाखाये बढ़ेंगी जिस से १५ से २० प्रतिशत कवरेज होगा मधेस में ।
० पहले बहुत बैंक खोलने की अनुमति मिली जिस से बहुत बैंक खुला और अभी आकर मर्ज की स्थिति आयी है । आप इसको किस तरह से ले रहे हैं ?
– नेपाल की जो नीति निर्माण सिस्टम है वो दीर्घकालीन नहीं है । यहाँ पर कम अवधि के लिए नीति बनाई जाती है । साल भर के कैपिटल की नीति लाने से पहले भी छोटे छोटे बैंक को इजाजत दी गयी बैंक को सञ्चालन करने के लिए पाँच करोड़ में बैंक खोलने की इजाजत मिली और साल भर बाद ही उन्हीं बैंक को कहा गया कि आप ५० करोड़ तक कारोबार पहुँचाने के लिए वरना बंद करो, तो यह कोई नीति नहीं है । जब लाइसेंस खुला तब बहुत से बैंक और फाइनेंस को लाइसेंस दिया गया उसके बाद ध्इच्ीम् द्यबलप और आईएमएफ की भूमिका ज्यादा है । उन्होंने कहा कि नेपाल राष्ट्रीय बैंक का कगउभच
खष्कष्यल अयmउभतभलअभक कम है और इतनी ज्यादा संख्या की निगरानी नहीं हो पायेगी तो इसे घटाओ, घटाना तो जरूरी भी है इस से बड़े बड़े देश में कम बैंक सब है उदाहरण के लिए थाईलैंड को लिया जा सकता है जहाँ जनसँख्या ज्यादा है पर बैंक कम है । यहाँ पर भी बैंक की संख्या में कमी होगी तो अच्छी तरह से निगरानी करना आसानी होगा । अब संख्या घटने का के उपाय हो सकता है । एक ही उपाय है कि मर्जर । जबदस्ती कहना तो मुश्किल होगी तो उन्होंने कहा कैपिटल बढ़ाओ । कैपिटल बढ़ाने का दो तरीका है या तो पैसा डाल के बढाओ या मर्ज करके बढाओ । पैसा डाल कर बढ़ाते भी हैं तो व्यापार कहाँ से आएगा और रिटर्न तो देना है और नेपाल में तो शतप्रतिशत व्यापार बढने वाला तो नहीं है, पर कैपिटल तो बढ़ाना है । हम अगर मर्ज करते हैं तो कैपिटल और व्यापार ज्यादा फायदा देगा, शेयर होल्डर को भी रिटर्न दे सकते हैं इस से नेपाल राष्ट्रीय बैंक द्वारा दिया गया मर्ज का कार्य भी होगा । नेपाल में अभी की स्थिति से मर्ज एक बाध्यता है, इच्छा नहीं । बैंक मर्ज में परेशानी भी है । जब बैंक मर्ज होता है तब दोनों बैंक के कार्यरत कर्मचारी जुड़ जाते हैं, जिस से दुगूना खर्च बढ़ जाता है नेपाल में बैंक के मर्ज से उतना पÞmायदा नहीं दिख रहा है ।
० जारी मधेस अन्दोलन से बैंक संचालन में कितनी कठिनाई आयी है ?
– बहुत ज्यादा कठिनाई आ रही है । बैंक राष्ट्रीय अर्थ का एक बड़ा हिस्सा है । यह जो जारी आन्दोलन है इस से अर्थ जगत में बहुत बड़ा धक्का लगा है । अभी की स्थिति में कोई उधोग संचालन में नहीं आ रहा है । गाड़ी की कमी है इंधन की वजह से नया उधोग खुल नहीं रहा है । पर्यटक की भी बहुत कमी है । बस थोड़ा ट्रेडिंग कंपनी चल रहा है और बैंक का निवेश सभी क्षेत्र में है । जिससे सभी बैंक कठिनाई झेल रहे हैं । अभी के आन्दोलन से सामाजिक दूरियाँ आ गयी हैं । पहले एकरूपता थी अभी इसमें भी दुरी आ गई है । यह अर्थ जगत से २० साल तक इम्पैक्ट रहेगा ।
० मधेस आन्दोलन से आप के बैंक की क्या स्थिति है ?
– चार महीनों से जो आन्दोलन चल रहा है उससे हमारे मधेस के बैंक बहुत ही प्रभाबित हुए हैं । १० दिन से ज्यादा खुला नहीं है । और वहाँ के कर्मचारियों को धमकी आ रही है यदि वो बैंक सञ्चालन करते हैं और सहयोग की बात है तो हम पूरी तरह से लचकता अपना सकते हैं । हम यह बताते हैं कि स्थिति देख कर ही बैंक संचालन करें । यदि बैंक बंद है तो खाली न बैठें अपने ग्राहक से बात करें उनकी समस्या का समाधान निकालें और ग्राहक को कोई भी परेशानी नहीं होनी चाहिए । इस पर हम सब ज्यादा ध्यान दे रहे हैं ।
० सारे बैंक अभी के समय मेें आईटी से ज्यादा जुड़े हैं, जिस से पूरी तरह से बिजली की जरुरत होती है और अभी तो इंधन और बिजली दोनों में बहुत परेशानी है आप कैसे मैनेज कर रहे हैं ?
– बैंक पूरी तरह से आईटी पर निर्भर है जिस से बिजली की जरुरत होती है । अभी के समय में १३ घन्टा बिजली नहीं रहती है, जिससे हम सब को डीजल, पेट्रोल की जरुरत होती है, पर आन्दोलन की वजह से वो भी नहीं है । अभी हम लोगों को नेपाल आयल निगम से बैंकिंग संचालन के लिए मिलता है जो कि पर्याप्त नहीं होता है और इसलिए बाजÞार में जो मँहगी कीमत में मिलता है उसे ही खरीद रहे हैं क्योंकि दूसरा उपाय नहीं है । अभी के समय में किसी तरह भी मैनेज हो रहा है या कहें जुगाड़ कर रहे हैं ।
० वर्तमान स्थिति में सरकार को क्या सलाह देना चाहते हंै ?
– नीति जो भी हो वह दीर्घकालीन होना चाहिए और लांन्ग टर्म भिजन होना चाहिए । विकास की तरफ बढ़ना चाहिए । नेपाल में जो इनर्जी सोर्स है उसे कार्यान्वयन नहीं लोगे तब तक आर्थिक विकास नहीं संभव है । हमारे नेपाल में राजनीति पार्टी के कोई भी मुद्दा नहीं है । बस प्रतिपक्ष पार्टी का विरोध करना है । जब तक हमलोग अर्थ व्यस्था में साथ नहीं देंगे तब तक बिकाश नहीं होगा । उधाहरण के लिए मैं श्रीलंका की बात कहना चाहता हूँ वहाँ पर १५ साल तमिल और सिंहली की लड़ाई चली पर वहाँ पर उस १५ साल में अर्थव्यवस्था नीचे नहीं आई । वहाँ पर भी राजनीति तौर पर ही लड़ाई हुई पर अर्थ पर कोई असर नहीं पड़ा । बस यह कहना है कि राजनीति की वजह से अर्थ पर असर नहीं होना चाहिए ।

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