राजनीति ने जीना दुशवार किया

ठीक एक वर्षपहले डा. बाबुराम भट्टर्राई नेतृत्ववाली सरकार ने ‘६ महीने बाद चुनाव होगा’ कहते हुए संविधानसभा विघटन किया था। लेकिन अभी तक निर्वाचन नहीं हो पाया

ashok Baidhya

अशोक कुमार वैद्य

है। निर्वाचन की बात तो दूर, निर्वाचन के लिए अनुकूल वातावरण भी निर्माण नहीं हुआ है। राजनीतिक दल के नेतागण की बात मानें तो आगामी अगहन तक निर्वाचन हो जाएगा। लेकिन उनके भाषण पर किसीका विश्वास नहीं है। इसलिए निर्वाचन कब होगा और कैसे होगा – कुछ भी तय नहीं हुआ है। इस तरह राजनीतिक अस्थिरता और बढÞते जा रही है। जिसके कारण देश की आर्थिक स्थिति और कमजोर हो रही है, इस तथ्य को कोई भी अस्वीकार नहीं करेगा।
रोजगारी के लिए लाखों युवा भटक रहे हैं। ऐसे युवा दैनिक हजारों की संख्या में विदेश पलायन कर रहे हैं। इधर देश के अन्दर विकास की सम्भानाएं घटती जा रही हैं। जलस्रोत का अमीर देश कहा जाता है- नेपाल। लेकिन यहीं की जनता विजली के अभाव में अन्धकार में रहने के लिए बाध्य हैं। देश का मूल आर्थिक स्रोत कृषि में आधारित है। फिर बिडÞंवना यह है- गांव में खेती के लिए जनशक्ति का अभाव है। प्राकृतिक सम्पाद से पर्ूण्ा नेपाल पर्यटकीय दृष्टिकोण से भी महत्त्वपर्ूण्ा है। इसीलिए कृषि और जलस्रोत के बाद अर्थतन्त्र के मेरुदण्ड के रुप में यहाँ के पर्यटकीय स्थल और सम्भावित जडिबुटी उद्योग हो सकते हैं। लेकिन इस क्षेत्र में भी कोई खास प्रगति नहीं हर्ुइ है। दुःख की बात तो यह है, देश में विद्यमान कुछ उद्योग बन्द भी होते जा रहे हैं।
जिसके चलते कुछ करने के लिए उत्साही युवा पीढÞी अपने को नेपाली कहने में हीनताबोध करती हैं। इसीलिए पैसेवाले मध्यम वर्गीय कुछ युवा नेपाल में रहने से ज्यादा विकसित पश्चिमी मुल्कों में जाकर मजदूरी करना बेहतर समझते हैं। दूसरी तरफ जो शुबह-शाम रोजीरोटी के लिए भी भटक रहे है, वे लोग खाडी देशों में जाने के लिए बाध्य हैं। आखिर ऐसा क्यो – प्रायः सभी का एक ही उत्तर होता है- देश की राजनीतिक अवस्था ठीक नहीं है। अर्थात् हमारे यहाँ देश और जनता के लिए काम करनेवाले नेता ही नहीं हैं। राजनीतिक वृत्त में व्याप्त भ्रष्टाचार, रोज के बन्द-हडÞताल, दण्डहीनता, असुरक्षा, कानूनी राज्य का उपहास आदि के कारण सभी निराश होकर कहते है- देश की राजनीति ने जीना दूभर कर दिया।
लेकिन यहीं कुछ ऐसे उद्योग-व्यवसायी भी हैं, जो कुछ न कुछ करते हैं और थोडी ही संख्या में सही, नेपाली युवाओं को रोजगारी देने में सफल हो रहे हैं। जिस तरह हो, अपने व्यवसाय को आगे बढा रहे हैं और बिगडÞते अर्थतन्त्र सम्हलने में सहयोग कर रहे हैं। हांलाकि यह लोग भी देश के राजनीतिक वातावरण से आम लोगों की तरह ही प्रभावित हैं। सभी व्यवसायी चाहते हैं कि देश में उद्योग-व्यवसाय के लिए सुरक्षित वातावरण निर्मण हो। इसी सर्न्दर्भ में हिमालिनी के कार्यकारी सम्पादक मुकुन्द आचार्य ने वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष अशोक कुमार वैद्य से विशेष अन्तर्रवार्ता तथा अन्य व्यवसायियों से छोटी- प्रतिक्रियाएं ली हैं । आईए, देखते हैं उन व्यवसायियों की बातें ः-

० देश के अर्थतन्त्र का अभी क्या हाल है –
– व्यवसायी के लिए अभी के सर्न्दर्भ में सबसे बडी समस्या लोडसेडिङ की है। हफ्ते में ८८ घंटे तक की लोडसेडिङ से उद्योग धन्धा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। दूसरी बडÞी समस्या है बजेट का अभाव। व्यवसायी कुछ करना चाहते हैं, मगर आर्थिक कारणों से वह मजबूर हो जाते है। फिर आए दिन सरकारी नीति में फेरबदल होते रहते हैं। इसके चलते नियम-कानून, व्यापार-बाजार, उद्योग सभी कुछ प्रभावित होता ही है। वैसे तो राजनीति ने सुरसा की तरह सब को ग्रस लिया है। फिर भी मेरा मानना है कि सरकार बदलती रहती है, मगर आर्थिक मूलभूत नीतियों में सरकार के बदलते ही बदलाव नहीं आना चाहिए। इसलिए आजकल मैं नेता जी लोगों को प्रष्ट रुप से कहता हूँ- आप लोग कर्ुर्सर्ीीी राजनीति करना छोडÞ दें। अब आप लोग देश विकास की राजनीति करें। इसी में हमारा, आप का और देश का भला है। पूँजी की कमी, कच्चे पदार्थ की कमी, दक्ष जनशक्ति की अपर्याप्तता, विजली का अभाव, अस्पष्ट श्रमनीति, बन्द-हडताल, खुला सीमाना और अल्पकालीन नीति आदि समस्याएँ, उद्योग व्यवसाय के सामने मुँह बाए खड हैं।
 ० इस क्षेत्र में उद्योग व्यापार की उन्नति के लिए आप के पास कौन सी योजनाएं है –
– वैसे तो ग्रेटर वीरगंज की सोच वर्षों से चली आ रही थी, लेकिन हमने इस में तीव्रता दी है। ग्रेटर वीरगंज की परिकल्पना को पर्ूण्ाता प्रदान करने में कुछ प्राविधिक कठिनाइयाँ भी हैं, क्योंकि इस में बारा और पर्सर्ााोनों के भूभाग समन्वय करने की बात आती है।
नयाँ चक्रपथ निर्माण करने की बात भी है। सच कहा जाय तो चक्रपथ बनते ही वीरगंज का विस्तार और विकास पर््रवर्द्धन होगा। चक्रपथ निर्माण में जो खर्च होगा, उसकी बहुत बडÞी राशि हम चक्रपथ क्षेत्र की जमीन की प्लटिङ से वसूल कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त चक्रपथ निर्माण से ग्रामीण क्षेत्र की जमीन का भाव स्वतः बढÞ जाएगा, जिससे ग्रामीणों के पास असानी से पूँजी जमा हो सकेगी। वीरगंज के विकास में वह पूँजी बहुत सहायक सिद्ध हो सकती है। इसलिए चक्रपथ का निर्माण आवश्यक है।
उसी तरह यहाँ के शिक्षाप्रेमी, नागरिक समाज, राजनीतिक दल, व्यवसायी और अन्य संघ-संस्थाओं की अग्रसरता में एक सामुदायिक विश्वविद्यालय का निर्माण भी प्रस्तावित है। इस के लिए २० बिघा जमीन निःशुल्क रुप में प्रयोग के लिए हस्तान्तरण करने की बात पारित हो चुकी है। संघ का यह योगदान उल्लेखनीय तो होगा ही।
नेपाल से प्रत्येक वर्षतकरीवन ४ लाख से ज्यादा युवा जनशक्ति विदेश को जाते हैं। इस समस्या को ध्यान में रख कर हम लोगों ने पर्सर्ााे अदक्ष, अर्द्धदक्ष और दक्ष जनशक्ति को विदेश जाने से रोकने के लिए रोजगारी के अवसर सिर्जना कर स्वरोजगार पर््रवर्द्धन के लिए वीउवासंघ, जिविस, वीउमनपा और इलम/हेल्भेटास के संयुक्त पहल में लघु व्यवसाय विकास कोष का गठन करके उसके माध्यम से अनेकों प्रकार की टेक्निकल टे्रनिङ देते हुए अपने ही देश में बैठकर भी जीविको पार्जन किया जा सकता है, इस तथ्य को प्रतिपादित करने का प्रयास हुआ है। इसके चलते विदेश जानेवालों की संख्या में कुछ कटौती जरूर हर्ुइ है।
इसी क्रम में कृषि, उद्योग को आवश्यक जनशक्ति और छोटे मोटे प्राविधिक कामों के लिए विविध विषयगत तालीम की आयोजना भी है। ‘एक घर, एक रोजगार’, का नारा इसी विषयवस्तु पर आधारित है।
० वीरगंज-पथलैया कोरिडोर को बन्द हडÞताल मुक्त क्षेत्र के रुप में घोषित किए जाने की खबर है। आप को क्या लगता है, यह घोषणा कर देने से मात्र सफलता मिल जाएगी- बन्द-हडताल रोकने में –
– देखिए मैं सकारात्मक सोच रखनेवाला आदमी हूँ। पर्सर्ााारा कोरिडोर में अवस्थित उद्योग और व्यापरिक प्रतिष्ठानों का अभिभावक जैसा ही है- वीरगंज उद्योग-वाणिज्य संघ। बडÞा-मझौला और छोटीको मिलाकर लगभग १२ सय उद्योग इस क्षेत्र में संचालित हैं, उस में से ७ सौ से ज्यादा का अभिभावकत्व वीउवासंघने अपने कन्धे पर लिया है। हम उद्योगपतियों की चाहना तो रहेगी कि उद्योग को निर्वाध रुप में सञ्चालन करने हेतुु सुनिश्चित वातावरण का निर्माण और उद्योग की सुरक्षा हो और वह भी सरकारी स्तर पर। सुरक्षा के मामले में सरकार अकेले कुछ नहीं कर सकती, आज के बदलते परिवेश में इसी लिए सम्बन्धित सभी पक्षों ने मिलकर बन्द हडÞताल मुक्त क्षेत्र घोषित किया है। हम तो आशावादी हैं, यह सफल होगा। सम्भवतः नेपाल के इतिहास में ऐसी घोषणा पहली बार हर्ुइ है।
उद्योग, व्यवसाय तथा औद्योगीकरण देश के अर्थतन्त्र का एक सबल आधार होने से उपयुक्त औद्योगिक वातावरण तयार करते हुए स्थापित उद्योगों का सफल सञ्चालन और नए उद्योगों की स्थापना के लिए सुरक्षा तो चाहिए। बन्द-हडÞताल को जब तक बन्द नहीं किया जाता, तब तक उद्योग जीवन्त और सबल नहीं हो सकता।
० इसी सर्न्दर्भ में औद्योगिक सुरक्षा बल सम्बन्धी अवधारणा आई थी, उसका क्या हुआ –
– देश की राजनीतिकअवस्था अभी तरल अवस्था में है। जो पहले से स्थापित नियम कानून है, उनका क्रियान्वयन तो तदारुकता के साथ न हो पा रहा है। तो ऐसी अवस्था में नए-नए कानून, ऐन बनाकर कुछ कर पाना व्यावहारिक रुप से कुछ कठिन तो होगा हीं। फिर भी वर्षों से औद्योगिक सुरक्षा बल के बारे में हम प्रयत्नशील थे। अब आकर सैद्धान्तिक रुप से सरकार हम से सहमत हर्ुइ है। कानूनी स्वरुप देनेे में कुछ वक्त तो लगेगा हीं।
० सीमा पार भारतीय सीमावर्ती क्षेत्र से अपराधी समूह बब्लू दुवे की ओर से आतंकी फोन की धमकी आ रही है, ऐसा सुनने में आया था। इस बारे में आप कुछ कहना चाहेंगे –
– इस बारे में मैं ज्यादा नहीं बोल सकता। आप जो कह रहे हैं, वैसा मैंने भी सुना है। लेकिन मुझे ऐसी कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। वैसे देखा जाए तो यह मामला भी सुरक्षा के भीतर समाहित होता है। मुझे यकीन है, पुलिस प्रशासन समय में ही इस मामले को सुलझा लेंगे।
० आप का कार्यकाल किस मामले में अलग या बेहतर मानते हैं –
– देखिए दस वरस पहले जो परिस्थितियाँ थीं, आज वैसी स्थिति नहीं है। समय के साथ-साथ परिस्थिति और समस्याएं भी बदलती रहती हैं। आज के बदलते वैश्विक परिवेश में उद्योग वाणिज्य संघ की भूमिका भी बदली है। और चुनौतियों का स्वरुप भी। आज संघ की गतिविधि और कार्य क्षेत्र के अन्दर ही एक अन्तर्रर्ाा्रीय सर्म्पर्क सम्बन्ध इकाई गठन की गई है। और उसके माध्यम से वैदेशिक चैम्बरों से द्विपक्षीय सम्बन्ध बिस्तार को निरन्तरता देने का काम हो रहा है। इससे वीरगंज का आर्थिक महत्त्व और इस क्षेत्र में निहित अन्य अनेक सम्भावनाओं को भी हम अन्तर्रर्ाा्रीय स्तर के चेम्बरों को जानकारी दे पाने में सफल हुए हैं।
इसलिए काम करने का तरिका भी बदलता है। सबों की आँखें उवासंघ की ओर लगी हर्ुइ हैं। श्रमजीवी ऐन-कानून में ही अनेक परिवर्तन हुए हैं। जनसंख्या भी दिन-प्रतिदिन बढÞ रही है। लोगों के जीवन स्तर में, सोच में, संस्कृति में तेजी से परिवर्तन परिलक्षित हो रहा है। क्या उसी अनुपात में उवासंघ में परिवर्तन की आवश्यकता नहीं होगी –
फिर दूसरी ओर सरकार की तरफ से जैसा सकारात्मक कदम चलना चाहिए था, वैसा कुछ भी हो नहीं पा रहा है, न जाने क्यों। टे्रड यूनियन और श्रमिकों द्वारा अनेक कारणों को दिखाते हुए उद्योग धन्धा को बन्द कराया जाता है, उद्योग के संचालन प्रक्रिया को अवरुद्ध करते हुए अपनी माँगों को पूरी करवाने के लिए उचित-अनुचित ढंग से दवाव की सिर्जना की जाती है। ऐसी विषम परिस्थिति में यदि हमने वीरगंज-पथलैया कोेरिडोर को ‘बन्द हडÞताल मुक्त क्षेत्र घोषित करने में सफलता पाई है तो उस सफलता को ‘अण्डर एष्टिमेट’ न किया जाए।
० आप समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय रहते हैं। अभी क्या-क्या कर रहे हैं –
– मेरे पिताजी भी समाज सेवा में लगे रहते थे। घर का जैसा संस्कार होता है, उसका प्रभाव तो परिवार के सदस्योंं पर पडÞता ही है। मुझे भी समाज सेवा में विशेष अभिरुचि है। पिताजी की अग्रसरता में जैन समाज भवन बना था, जिस का समुद्घाटन महामहिम राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव के हाथों सम्पन्न हुआ था।
अभी हाल में पर्सर्ााजल्ला अर्न्तर्गत धोरे गांव में भीषण अग्निकाण्ड हुआ था। धनमाल का नुकसान बहुत हुआ। सौभाग्य से लोग हताहत नहीं हुए। फिर भी बहुत सारा परिवार उजडÞ गया। लोग सडÞक पर आ गए। नैतिक जिम्मेवारी से उद्योग वाणिज्य संघ ने यथाशक्ति पीडित घरबार विहीन लोगों की मदद की। भारतीय सेना ने, सीमा पार के भारतीय लोगों ने पीडितों की भरपुर मदद की। आदर्श पडÞोसी का उदाहरण पेश किया। नेपाल की ओर से भी हमारे उवासंघ के अतिरिक्त नागरिक समाज पर्सर्ााजिला प्रशासन, कर्मचारी संघ संस्था, अन्य समाजसेवी संस्थाओं ने भी उस वक्त दिल खोलकर सहयोग किया।
० जहाँ तक मुझे जानकारी है, आपने एक छोटेस्तर से अपना व्यावसायिक कैरियर शुरु किया था। आज आप अपने क्षेत्र में एक नामचीन हस्ती के रुप में माने जाते हैं। अपने विगत के वारे में थोडÞी जानकारी देंगे –
­- हम लोग राजविराज से इधर आए हैं। मेरा जन्म वि.सं. २०१४ साल में हुआ था। मैंने १६ साल की उमर से विजनेस के क्षेत्र में प्रवेश किया। आपने सही सुना है, शुरुवात की अवस्था में कपडÞा और खुद्रा सामान की दूकान से हमने अपना कारोबार प्रारम्भ किया था। सम्भवतः आप यह भी जानना चाहेंगे कि आज हम कैसे इस अवस्था में पहुँचे। माता-पिता का आशर्ीवाद, परिश्रम, इमानदारी और दूसरों को सहयोग करना अर्थात् मानवसेवा की भावना इन्हीं सब करणों से आज मैं वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष की हैसियत से सेवा कर रहा हूँ। आदमी के लिए सब से बडÞी बात माता-पिता का आशर्ीवाद ही है।
० चलते चलते एक प्रश्न, ट्रैक से थोडा हटकर। क्या अध्यात्म में आपकी रुचि है – क्या आप को लगता है कि ऐसी कोई अदृश्य शक्ति है, जो आप को प्रभावित करती है –
– परम्परा से, पारिवारक रुप से मैं जैन धर्मावलंवी हूँ। आप का परिवारिक संस्कार आप को धर्म की ओर उत्प्रेरित करता है। समाज को ठीक राह पर चलाने के लिए भी धर्म की आवश्यकता रहती है। अन्यथा समाज इतना कटु और अव्यवस्थित हो जाएगा कि आप शान्ति से बैठ नहीं पाएंगे। मेरे विचार में जीवन में सफलता पाने के लिए कुछ गुणों को धारण करना ही होगा। जैसे- इमानदारी, आत्मविश्वासर्,र् इच्छाशक्ति, सकारात्मक सोच, राष्ट्रियता की भावना यह सब एकत्रित होने पर सफलता जरूर आपके कदम चुमेगी।
और जहाँ तक धर्म के बारे में मेरी व्यक्तिगत राय है, मैं पहले ही बता चुका हूँ कि जन्म, परिवार और संस्कार के रुप में मैं जैन धर्म से ताल्लुक रखता हूँ। मगर मेरी सोच में धार्मिक सहिष्णुता बहुत बडÞी चीज है। इस सम्बन्ध में अर्ल्वर्ट आइन्स्टाइन की एक उक्ति को याद रखना अच्छा रहेगा- ‘सभी धर्म, कला और विज्ञान एक ही वृक्ष की शाखाएं है।’
० अन्त में एक कोई ऐसी बात, जो हमने न पूछी हो और आप कहना चाहते हों –
– जीवन का सार ही इसे समझिए, मेरे अनुभव में माता-पिता ही इस धरती में आदमी के लिए भगवान हैं। उनकी सेवा ही भगवान की पूजा है। इस बात को प्रायः सभी धर्म मानते हैं।

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