राजनीति में महिला

पुष्पा ठाकुर:नेपाल की कुल जनसंख्या २०६३ के जनगणना अनुसार २,६६,२०,८०१९ -२६.६ मिलियन) है। और इस में महिलाओं की जनसंख्या १,३६,९३,३७८ है अर्थात् कुल जनसंख्या का ५१.४४ प्रतिशत। men leader nepal_hindimagazine
किसी भी देश के समग्र विकास के लिए आवश्यक है, उस देश की सम्पर्ूण्ा आवादी विकास पथ पर अग्रगामी हो। परन्तु नेपाल की आधी जनसंख्या महिलाएं राज्य के विभेदकारी नीति, पितृसत्तात्मक सामन्तवादी सोच एवं अशिक्षा के काले अंधकार से ग्रसित अपेक्षित, अधिकार विहीन एवं राज्य संचालन के अवसर से बंचित रहती आयी है, परिणाम स्वरूप सुन्दर-समृद्ध नेपाल निर्माण की बातें वादों और नारा में ही सीमित है।
राष्ट्र, राष्ट्रीयता, लोकतन्त्र एवं संघीय गणतन्त्र स्थापना करने हेतु विभिन्न कालखण्ड में हुए राजनीतिक आन्दोलन एवं परिवर्तन में महिलाओं ने न सिर्फअपनी मांग एवं कोख सूनी कर देश पर बन्दूक उठाकर सशस्त्र संर्घष्ा में भी अग्रणी भूमिका का निर्वाह किया है। संर्घष्ा में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर योगदान करने वाली महिलाओं को सत्ता सञ्चालन के अवसर एवं पहुँच से बंचित रखा जाता रहा है।
नेपाल के राजनीतिक इतिहास को देखें तो पहली बार जननिर्वाचित सरकार २०१६ में प्रथम महिला सहायक मन्त्री ‘द्वारिका देवी ठकुरानी’ बनी। ३० वर्षों के पञ्चायती शासनकाल में महिला मन्त्री नगण्य ही रही। २०४६ साल के जनआन्दोलन के पश्चात् अन्तरिम सरकार में ‘साहना प्रधान’ महिला मन्त्री बनी।
२०४८ के निर्वाचन में सिर्फ५ प्रतिशत टिकट महिलाओं को दिया गया वह भी जहाँ पार्टर्ीींगठन कमजोर था। परिणामस्वरूप २०५ सिट संख्या वाले संसद में सिर्फ११ महिलाएं निर्वाचित हो सकीं। २०६३ के अन्तरिम संविधान में संविधानसभा निर्वाचन में ३३ प्रतिशत महिला उम्मीदवार की सहभागिता सुनिश्चितता के कारण साथ ही प्रत्यक्ष से ३० महिलाएं विजयी होने के फलस्वरूप विगत के संविधान सभा में महिला प्रतिनिधित्व ३३ प्रतिशत हो सका। विश्व के महिला प्रतिनिधित्व अधिक होनेवाले देशों की सूची में नेपाल १७वें स्थान पर आने में सफल हुआ।
जेठ १६ गते २०६३ साल में पुनः स्थापित प्रतिनिधि सभा ने संकल्प प्रस्ताव द्वारा पारित किया था नीति निर्माण तथा निर्ण्ाायक तह में महिलाओं की ३३% प्रतिनिधित्व सुनिश्चितता का। परन्तु विडम्बना है कि विगत के संविधानसभा बाहेक राज्य के अन्य किसी भी निकाय में यह प्रावधान लागू नहीं हुआ।
नीति निर्माण एवं निर्ण्ाायक तह में महिलाओं का प्रतिनिधित्व सम्बोधन के लिए नीति, विधि तथा राजनीतिक इच्छाशक्ति लैंगिक समतामूलक होना नितान्त आवश्यक है। अतः लैंगिक समानता के लिए सभी नीतियों की जननी राजनीति में महिलाओं की सशक्त एवं अर्थपर्ूण्ा भूमिका आवश्यक है। इसके लिए राजनीतिक दलों में आवश्यक है महिलाओं की ऐसी सहभागिता ः
१. सहभागिता में समानता
२. अधिकार एवं दायित्व में समानता
३. अवसर एवं पहुँच में समानता
४. प्राप्त लाभ के उपभोग में समानता
समानता प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों की सांगठिनक संरचना, गाविस से लेकर केन्द्रीय स्तर तक में महिलाओं की उपस्थिति समानुपातिक समावेशी होना नितान्त आवश्यक है। परन्तु प्राप्त विभिन्न राजनीतिक दलों के केन्द्रीय समिति के आँकडों से पता चलता है कि राजनीति में निर्ण्ाायक तह में महिलाओं की उपस्थिति किस प्रकार है।
आँकडों से यह स्पष्ट होता है कि अपने प्राप्त बोट में से लगभग आधा बोट महिलाओं का प्राप्त कर सत्ता तक पहुँचनेवाली पार्टर्ीीनका यथोचित स्थान एवं सम्मान देने में कितना संकोच करती हैं। अर्थात् महिलाओं के प्रति उनकी सोच कितनी नकारात्मक है। जब भी महिलाओं को महत्त्वपर्ूण्ा पद या जिम्मेदारी देने की बात उठती है तो अक्सर शर्ीष्ा नेता का यही कथन होता है कि महिलाओं में योग्यता नहीं है, क्षमता नहीं है। ऐसा कहनेवाले नेतृत्व यह भूल जाते हैं कि महिलाओं में नेतृत्व क्षमता अभिवृद्धि की जिम्मेदारी भी तो उनकी ही है।
राजनीतिक दलों का कर्तव्य होता है कि महिलाओं को विशेष राजनीतिक प्रशिक्षण दें, उनकी क्षमता विकास के अवसर उन्हें प्रदान करें। महिलाओं के हक हित के लिए संर्घष्ा करना सिर्फमहिलाओं का ही नहीं वरन राज्य तथा राजनीतिक दलों की भी जिम्मेदारी में आता है। होनेवाले दूसरे संविधान सभा निर्वाचन में महिलाओं को भी पुरुष के समान अवसर देकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना श्रेयस्कर होगा, जिससे महिलाओं का न्यूनतम ३३ प्रतिशत प्रतिनिधित्व संविधानसभा में हो सके। राज्य, राजनीतिक दल, महिलाओं को उनके अधिकार प्राप्ति की ओर अग्रसर कदमों को रोके नहीं, वरन अपने सहयोग से गति प्रदान करे। जिससे वे अपने जनसंख्या के अुनपात में राज्य के हरेक निकाय एवं निर्ण्ाायक तह में अपना सहयोग देते हुए नेपाल को संुदर-समृद्ध प्रगतिशील देश के रूप में विश्व मानचित्र में प्रतिष्ठित कर सकें।

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