राजपा को एक लम्बा कार्य सुचि बनाकर मधेस मे काम करना चाहिए : बी पी यादव

बी.पी.यादव, काठमांडू ,२२ जून | हम ने क्या देखा कि मधेश के गाँव में प्रत्येक घर में सुवह पहुँचने के वाद घर में बच्चा वच्ची , बुढा बुढी , महिला सबके सब मिलते है लेकिन युवा बहुत कम मिलेगें। क्याेंकि अधिक युवा बिदेश पलायन हाे गये है । नेपाल मे रोजगारी नही  मिलने पर बिदेस गये हए हैं |
लेकिन सवाल यह है कि ब्लडमणी जाे भेजते हैं वह सहि से सदउपयाेग हाेता है या नहि यह महत्वपुर्ण वात है । मधेस मे पैसा ताे सब घर मे अाया है लेकिन बिकृति भी साथ साथ ले कर अाया है । नागरिक का कर्तव्य क्या है वाे हम सब भूल गए है । परिवार मे कलह ज्यादा हाे गया । महिला प्रति घरेलु हिंसा मे वृद्धि हुई हैं पति पत्नी बिच का सम्बन्ध बिच्छेद की घटना मे बृद्दि हुई है । मधेस की गाँवमे पँचायत नही हाेकर पुलिस चाेकि में हुवा करती है । इसलिए हम राजपा नेपाल के कार्यकर्ता काे मधेस के प्रत्येक व्यक्ति के साथ पाँच बिषय के बारे अन्तरक्रिया करना हाेगा महिला महिला से, पुरुष पुरुष से, विद्यार्थी बिद्यार्थि से हमारे कर्त्तव्य क्या है । पहला अपने प्रति कर्त्तव्य, दुसरा अपने परिवा के प्रति कर्त्तव्य , तिसरा नागरिकाें के प्रति कर्त्तव्य , चाैथा समाज के प्रति कर्त्तव्य , पाँचवा राज्य के प्रति कर्त्तव्य ।
प्रत्येक नागरिक का यह पहला कर्त्तव्य है कि वह अादर्श नागरिक बने । इसके लिए अावश्यक है कि  अपने, मन, अात्मा कि पवित्रता कायम रखे । शारीरिक बिकास के लिए व्यायाम , स्वस्थ भाेजन इत्यादि की अावश्यकता है । व्यक्ति का यह कर्त्तव्य है कि वह शरीर के विकास द्वारा समाज का कल्याण करे ।अपना मानसिक अाैर अात्मिक बिकास करना भी व्यक्ति का कर्त्तव्य हाेता है । विविध ज्ञान – विज्ञान की शिक्षा तथा अाध्यात्मिक साधनाे की प्राप्ति करना व्यक्ति का कर्त्तव्य है । हमारे पुराने धर्म- शास्त्राें में अपने प्रति के कर्त्तव्य काे बहुत ही ऊँचा स्थान दिया गया है ।
दुसरा है अपने परिवार के प्रति कर्त्तव्य व्यक्ति के व्यक्तित्व बनाने में परिवार का बहुत हाथ हाेता है । प्रत्येक व्यक्ति का अपने माता पिता के प्रति का कर्त्तव्य माता- पिता का अाज्ञा मानना;वयस्यक तथा समर्थ हाेने पर उनका भरण- पाेषण करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य है । उसी प्रकार प्रत्येक परिवार के मुखिया का कर्त्तव्य  है कि वह परिवार के बच्चाे की शिक्षा का प्रबन्ध करे, उनके भरण- पाेषण का इन्तजाम करे । प्रत्येक परिवार काे सुखी बनाये रखने के लिए यह अावश्यक है कि पति अपनि पत्नी के प्रति अच्छा व्यवहार करे । पत्नी का भी कर्त्तव्य हाे जाता है कि अपनि सेवा, सहनुभूति, कार्य,- परायणता से पति के कर्त्तव्याें का बडा ही महत्व है ।
तिसरा नागरिकाें के प्रती का कर्त्तव्य एक नागरिक का पहला कर्त्तव्य यह है कि दुसरे नागरिकाें के साथ भाई चारे का सम्बन्ध रखे । दुसरे नागरिकाें के साथ बड्प्पन का भव नहि दिखाना चहिए । भाई चारेकि भवना से नागरिकाें के ह्रदय में सहानुभूति अाैर सहायता कि भवना अाती है । प्रत्येक नागरिक का यह भी कर्त्तव्य है कि वह दुसरे नागरिकाें के प्रती सहायता अाैर कृपा की भवना बनाए रखे ।  अक्सर देखा जाता है कि कभी कभी मामुलि वाताें से बढकर एक बड़ी समाजिक समस्या खडी हाे जाती है । इसका कारण यह है कि नागरिक उन बिषयाें ठंढे दिल से नहीं साेचता अाैर उत्तेजनावश बड़ी बड़ी गलती कर बैठता हैं । किसि भी साम्प्रदायिक झग्डे के मूल में कुछ छाेटि ही बात रहती है । किसी भी साम्प्रदायिक झगडे् के मूल में कुछ छाेटी ही बात रहती है ।        वही धार्मिक उतेजना का सहारा पाकर विकट रूप धारण कर लेती है । इससे समाज कि क्षति है । अत: प्रत्येक नागरिक का यह कर्त्तव्य हाे जाता है कि ऐसी परिस्थितियाें में शान्त दिमाग से काम ले अाेर जल्दिबाजी या जाे में काेई उल्टा- सिधा काम नहिं कर बैौठे ।
चाैथा समाज के प्रति कर्त्तव्य : नागरिकाें का यह कर्त्तव्य हाे जाता है कि समाज के बहुमुखी बिकास में वे अपना हिस्सा जिम्मेवारी बँटायें । समाजमें कला, संस्कृति , बिज्ञान अादि की तरक्की के लिए जाे साधन उपल्बध है उनका उपयाेग कर समाज काे धनी बनाना प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य हाे जाता है । समाज के सामाजिक और अार्थिक विकास के लिए प्रत्येक व्यक्ति का कर्त्तव्य हाे जाता है कि वह समाज के साथ दु: ख सहे उसके साथ मिहनत करे ।
पाँच राज्य के प्रती कर्त्तव्य : राज्य जीवन बिकास के लिए बहुत सारे अबसर देता है । इसके प्रतिदान में व्यक्ति का यह कर्त्तव्य हाे जाता है कि वह राज्य के प्रति वफादारी दिखलाए । यह हमारा कर्तव्य हाे जाता है कि अपने ह्रदय में राज्य भक्ति रखे । देश- द्राेह की भावना राज्य के प्रती कभी भी नहीं लाना चाहिए । उचित कार्य के लिए यदि राज्य के लिए प्राण तक देने की जरुरत हाे ताे व्यक्ति काे खुशी से प्राण दे देना चाहिए । राज्य के प्रती व्यक्ति का दुसरा कर्त्तव्य यह है कि राज्य के नियमाें का पालन करें । प्रजातन्त्र में संविधान जनता के प्रतिनिधि बनाते है । इसलिए कानुन के पिछे समाज का बहुमत रहता है । हाँ विधान, संविधान कि अनैतिकता या सामाजिक दृष्टिकाेण से उसकी निन्दा करना व्यक्ति का अधिकार बनता है ।लेकिन कानुन बन जान के बाद उसकी अवज्ञा करना अनुचित है । उसी तरह राज्य के कर, माल गुजारी इत्यादि काे चुकाना व्यक्ति का कर्त्तव्य हाे जाता है । हाँ यदि कर या सरकारी टैक्स द्वारा प्रजा पर निरर्थक बाेझ डाला जाता है ताे प्रजा काे उसका शन्तिपुर्ण तरिका से बिराेध करनी चहिए । ऐसा बिराेध उसका कर्त्तव्य बनता हेै। जैसे गाँधी जी ने नमक कर कीघा नीन्दा की जिसके फलस्वरुप वह कर हटा दिया गया ।नागरिक शासन- प्रबन्धमें बहुत तरह से सहयाेग दे सकता है । प्रतिनिधि के रुप में विधान – सभा अाें में भाग लेकर तथा मन्त्रिमन्डल का सदस्य हाेकर ; समयाेचित नियम बनाकर नागरिक राज्य के प्रती अपनी वफादारी दिखा सकता है । इतना ही नही , राज्य के विभिन्न विभागाें में नाैकरी स्वीकार कर भी वह राज्य के प्रती अपने उत्तरदायित्व का निर्वाह कर सकता है। एक अच्छे नागरिक कि हैसियत से शसन – प्रबन्ध में समाज- विराेधि व्यवहाराें काे राेकने में सहायता देकर भी वह राज्य के प्रती अपना कर्त्तव्य पूरा कर सकता हेै । एक लम्बा कार्य सुचि बना कर मधेस मे काम करना चाहिए ।

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