राजपा नेपाल की प्रभाव पश्चिम नेपाल में कमजोर

काठमांडू, 21 कार्तिक । एक समय तराई–मधेश के समग्र क्षेत्र में अपना प्रभाव मजबुत रखनेवाले राष्ट्रीय जनता पार्टी (राजपा) नेपाल की प्रभाव अब सिर्फ दो नम्बर प्रदेश में सिमटती जा रही है । विशेषतः १ और ५ नम्बर प्रदेश में राजपा की प्रभाव कमजोर बनती जा रही है । मधेशवादी दल में आवद्ध शीर्ष नेताआें में से अधिकांश नेताओं ने राजपा छोड़ने के कारण ऐसा हो रहा है । यह समाचार आज प्रकाशित कान्तिपुर दैनिक में है ।


मधेश आन्दोलन के क्रम में अग्रमोर्चा में रहकर नारा–जुलुश करनेवाले अजयकुमार गुप्ता (तत्कालीन तमलोपा के नेता) २० दिन पहले राप्रपा (प्रजातान्त्रिक) में प्रवेश किए हैं । गुप्ता १० वर्ष से मधेश आन्दोलन में सक्रिय थे । गुप्ता का कहना है कि राजपा के शीर्ष नेता व्यक्तिवादी हुए हैं, इसीलिए राजपा छोड़ना पड़ा । इसीतरह राजपा केन्द्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्वमन्त्री ओमप्रकाश यादव (गुल्जारी) ने भी ८ दिन पहले एमाले प्रवेश किए है । वह वाम गठबंधन से रुपन्देही–४ से उम्मीदवार बने हैं । राजपा बनने से पहले वह सद्भावना पार्टी के उपाध्यक्ष थे ।
राजपा पार्टी की वरिष्ठ नेता तथा उपाध्यक्ष सर्वेन्द्रनाथ शुक्ला को कहना है कि स्थानीय निकाय चुनाव बहिष्कार करने के कारण भी पश्चिम नेपाल में राजपा कमजोर पड़ता जा रहा है । शुक्ला ने यह भी कहा है कि विभिन्न ६ पार्टी के बीच एकता होने से पार्टी के अन्दर आन्तरिक गुटबन्दी भी ज्यादा होने लगा और अन्तरघात के कारण पार्टी छोड़नेवाले बहुत हो गए हैं । लेकिन उनका मानना है कि इस क्षेत्र में नेताओं ने तो पार्टी परिवर्तन किया, लेकिन कार्यकर्ता ने नहीं । उन्होंने कहा है– ‘पश्चिम के अधिकांश बड़े नेताओं ने राजपा को त्याग किया, जिसक चलते यहां शून्यता छाई है, लेकिन कार्यकर्ता अभी भी राजपा के पास है । यहां पार्टी निर्माण के चरण में ही है ।’ नेता शुक्ला स्वीकार करते हैं कि नवलपरासी में हृदयेश त्रिपाठी और कपिलवस्तु में बृजेशकुमार गुप्ता को पार्टी में संरक्षण किया होता तो आज यह नौबत न आती ।

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