राजपा नेपाल के नेताओं की सर्वमान्य धारणा : संशोधन नहीं तो चुनाव भी नहीं

क्या हो सकती है राजपा नेपाल की भावी नीति विषय पर हिमालिनी द्वारा परिचर्चा  कार्यक्रम आयोजित

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काठमान्डौ बैसाख १६ गते | शनिवार १६ गते हिमालिनी द्वारा समय समय पर समसामयिक विषयों पर आयोजित होती रही समय सन्दर्भ श्रंखला के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया । कार्यक्रम का विषय था क्या हो सकती है राजपा नेपाल की भावी नीति ? कार्यक्रम में पूर्व मन्त्री तथा माननीय सांसद बृजेश कुमार गुप्ता, माननीया डा. डिम्पल झा, श्री सि.पि. सिंह, श्री मनीष सुमन, डा. कौशलेन्द्र मिश्र, श्री केशव झा, लीला यादव और संघीय समाजवादी फोरम नेपाल की श्री रेखा यादव ने अपने अपने विचारों को रखा ।
हिमालिनी समय समय पर सामयिक विषयों पर आधारित समय सन्दर्भ श्रृंखला कार्यक्रम आयोजित करती आई जिसमें क्षेत्र विशेष से आबद्ध व्यक्तियों को आमंत्रित किया जाता है और उनके विचारों को जानकर उसे जनता तक पहुँचाने की कोशिश की जाती है ।
हाल में हुए मधेशी दलों के एकीकरण ने राजनीतिक गलियारे में एक हलचल पैदा कर दी है । कई सवाल नेता और जनता सभी के मन को उद्वेलित किए हुए है । कार्यक्रम में इन हालात से सम्बन्धित सवालो के जवाब में प्रतिनिधियों की अपनी अपनी धारणाएँ थीं । परन्तु सबने एक साथ एकीकरण को आज की आवश्यकता बताया और कहा कि राजपा का गठन मधेश की भावनाओं का सम्मान है । माननीय साँसद बृजेश जी का स्पष्ट मानना था कि देश की तीन बड़ी पार्टियाँ कभी भी मधेश के लिए ईमानदार नहीं रही है । आज तक मधेश की जनता उन्हें चुनती आई किन्तु परिणाम सबके सामने है कि आज भी मधेश अपने अधिकार के लिए संघर्षरत है । इसलिए हमें सत्ता के बहलावे में नहीं आना है और आज तक आन्दोलन से ही अधिकार मिला है और आगे भी उसके माध्यम से ही मिलेगा ।चुनाव के सन्दर्भ में उनकी शंका थी कि हालात अनुकूल नजर नहीं आ रहे हैं ।
और सरकार सिर्फ हमें भटकाने की कोशिश कर रही है ।
माननीया डा. डिम्पल झा जी ने कहा कि हमने किसी दवाब में एकीकरण नहीं किया है । बल्कि स्व. गजेन्द्र जी के सपनों को साकार करने के लिए एक साथ हम आए हैं । उनका सपना समृद्ध मधेश का था जिसे हमें मिलकर पूरा करना है ।
श्री सीपी सिंह, डा. कौशलेन्द्र जी, श्री केशव झा जी ने स्पष्ट रुप से कहा कि एकीकरण समय की आवश्यकता और मधेश की जनता की चाहत थी । जिसे पूरा किया गया है । स्वरुपात्मक मुश्किलें सामने हैं परन्तु यह बहुत जल्द दूर होगा और आगे की नीति तय की जाएगी । वही मनीष सुमन जी ने कहा कि चुनाव के लिए यह समय उपयुक्त नहीं है बेहतर हो कि इसे कार्तिक में कराया जाय क्योंकि अभी कई तकनीकी समस्याएँ सामने है. जिसका निदान आवश्यक है । सबने एक स्वर में माना कि संविधान संशोधन के बिना चुनाव की कोई संभावना दूर दूर तक नहीं है । श्री केशव झा ने पार्टी नामकरण के सवाल पर कहा कि यह नाम मधेश की ही नहीं नेपाल की समस्त जनता को समेटने में सक्षम है और इसका यह अर्थ बिल्कुल नहीं है कि मधेश नाम नहीं रहने यह मुद्दा पीछे पड़ गया । हम मधेश के अधिकार के लिए लड़े हैं और तब तक लड़ेंगे जब तक हमें हमारा अधिकार नहीं मिल जाता । हमने मध्यममार्ग को अपनाया है और इस पर चलकर ही हमें मंजिल भी मिलेगी । संघीय समाजवादी फोरम नेपाल की नेत्री रेखा यादव का मानना था कि एकीकरण एक अच्छी पहल है और उम्मीद है कि यह मधेश की भावनाओं के साथ चलेगी और जनता के मन में जो शंका है कि यह एकीकरण सिर्फ बाह्य है उसका खण्डन करेगी । राजपा से आबद्ध लीला यादव का मानना था कि इस एकीकरण के साथ ही एक और सार्थक पहल होनी चाहिए कि राजनीति में महिलाओं की स्थिति और स्थान दोनों मजबूत की जानी चाहिए । महिलाएँ सक्षम हैं उन्हें अवसर प्रदान किया जाना चाहिए । साथ ही सबकी इच्छा थी कि संघीइ समाजवादी फोरम को भी एक साथ हो लेना चाहिए ।
समग्र में एकीकरण की आवश्यकता सभी को मान्य था और सबकी सर्वमान्य धारणा थी कि संशोधन नहीं तो चुनाव भी नहीं ।
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