राजपा नेपाल ही मधेश का भविष्य स्थापित कर सकता है : सी.पी. सिंह

सी.पी. सिंह राजपा नेपाल के नेता हैं

सी.पी. सिंह राजपा नेपाल के नेता हैं

सी.पी. सिंह, काठमांडू, २ मई | लंबे अरसे से एकीकरण की बात उठ रही थी । खासकर दूसरी संविधान सभा के चुनाव से एकीकरण की बात उठने लगी । एकीकरण के लिए हम लोग सलाह–मशविरा व मिटिंग करते थे । कभी दो दलों के बीच, कभी तीन दलों के बीच मिटिंग होती थी । एकीकरण के दौरान विमर्श होता रहता था कि हम जनता की भावना को कद्र करे । जब भी मिटिंग होती थी तो एकीकरण करने की बात अवश्य उठ जाती थी । सभी नेताओं की चाहत भी थी कि जितना जल्द हो सके, एकीकरण की घोषणा हो जाए । एकीकरण की बात मूलतः राजविराज से उठी, जिस समय शहीदों की श्रद्धांजली सभा का आयोजन किया गया था । शहीद परिवारों तथा जनता की भावनाओं को कद्र करते सभी नेताओं ने अपने उद्वोधन में एकीकरण की आवश्यकताओं पर बल भी दिया था । इसके पश्चात् सभी नेतागण एकीकरण की प्रक्रिया में जुट गये । और समय अनुकूल होते ही छह दलों के बीच एकीकरण भी हुआ । वैसे एकीकरण प्रक्रिया के दौरान या एकीकरण के अन्तिम चरण में भारत को भी विश्वास नहीं था कि मधेशवादी दलों के बीच एकीकरण हो सकता है । एकीकरण होेने के पश्चात् भारत के सभासदों ने फोन पर कहा कि कौन सा मंत्र पढ़ा, जो तुम लोग एकीकृत हो गये । समग्रतः कहा जा सकता है कि यह एकीकरण मधेशी जनता तथा शहीद परिवारों की भावनाओं का एकीकरण है ।
जहां तक सवाल है कि मौजूदा पार्टी के नामकरण में ‘मधेश’ शब्द क्यों नहीं जोड़ा गया । इस सन्दर्भ में मैं संस्मरण कराना चाहूंगा कि संविधान सभा के दौरान अधिकार स्थापनार्थ जब मधेश में आन्दोलन हुआ, तो उस समय मधेश की भावना संबोधन करने के लिए ‘मधेश’ शब्द जोड़ा गया था । एकीकरण के दौरान कोई ‘सद्भावना’ नहीं छोड़ना चाहते थे, कोई ‘समाजवाद’ नहीं छोड़ना चाहते थे, तो कोई ‘फोरम’ नहीं छोड़ना चाहते थे । हालांकि, नेताओं की धारणा थी कि सभी का मन जितने के लिए हमें एकीकृत तो होनी चाहिए । यदि हम एकीकृत नहीं हो पाते हैं, तो मधेशी, जनजाति, महिला, अल्पसंख्यक, पिछड़ावर्ग आदि समुदायों का अधिकार सुनिश्चित हो पाना असम्भव है । आशय यह है कि किसी शब्द विशेष को लेकर एकीकरण प्रक्रिया रुक जाती है या एकीकरण नहीं हो पाता है, तो विडम्बना की बात हो जाती है । खासकर ‘मधेश’ शब्द हटने से नस्लवादी लोग ही ज्यादा परेशान दिखाई दे रहा है । क्योंकि उन्हें टिका–टिप्पणी करने के लिए कोई जगह नहीं मिलती । इसी प्रकार मीड़िया कर्मी भी नस्ल वादियों का ही अनुकरण करने में जुट गये । विगत के चुनावों में मधेश की जनता ने कांग्रेस, एमाले व माओवादी को भी वोट दिया । हम लोगों को सिर्फ ११ प्रतिशत वोट मिला । लेकिन अभी ऐसी परिस्थिति नहीं है । हमें वोट नहीं देने वाले लोग भी आज राजपा नेपाल का समर्थन कर रहे हैं । और उनका कहना है कि सिर्फ राजपा नेपाल ही हमारा भविष्य स्थापित कर सकता है ।
अभी हमें ढेर सारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है । हम उन चुनौतियों को हल करने के लिए दिन–रात जुटे हैं । यहां तक कि हमारे नेतागण भी दिन–रात जुटे हुए हैं । हमें उम्मींद है कि जल्द ही उन चुनौतियों को हल करने में सफल होंगे । अब रही बात चुनाव में भाग लेने की तो मैं कहना चाहूंगा कि जब तक संविधान में संशोधन नहीं हो जाता, तब तक हम लोग चुनाव में भाग नहीं लेंगे । ( हिमालिनी समय सन्दर्भ विचार श्रृंखला से)
(सी.पी. सिंह राजपा नेपाल के नेता हैं ।)
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