राजु बन गया जेन्टल मैन

सामान्य घराना में पैदा हुए राजु एमेच्युर एस्ट्रनमर हैं । इन्होंने स्पेसलिस्ट एकाउन्ट और फाइनान्स में मास्टर किया है उनकी रुचि विज्ञान विषय में है । करीब दस वर्ष के अध्ययन (इन्टरनेट से) के बाद उन्होंने रासायनिक तथा अन्तरिक्ष विज्ञान में दक्षता हासिल की है । हेटौडा में पैदा हुए राजु अहमद अभी विज्ञान प्रदर्शनी कर के देश विदेश घूम रहे हैं । हेटौडा में भी उन्होंने कुछ समय पहले पचीस सौ छात्रों के आगे रसायनविज्ञान सम्बन्धित प्रदर्शनी की है । हेटौडा, काठमाडौं, पोखरा, चितवन और भारत के छत्तिसगढ तक उन्होंने हजारों विद्यार्थियों के सामने विज्ञान प्रदर्शनी कर चुके हैं । विज्ञान कठिन विषय नहीं है प्रयोग का विषय है । इसे जितना प्रयोग किया जाय नई नई बात सामने आती है । बहुत स्कूल ऐसे हैं जो विद्यार्थिायों को प्रदर्शनी कर के दिखा नहीं सकते हैं इसलिए विज्ञान में भविष्य नहीं देख पाते हैं । राजु अहमद का उद्देश्य विज्ञान में रुचि जगाकर छात्रों को भविष्य निर्माण करने में है । एस्ट्रनमर राजु अहमद के साथ हिमालिनी के विशेष संवाददाता गोविन्द न्यौपान द्वारा की गई बातचीत का सम्पादित अंश —

० आप कैमिस्ट हैं ?
– मेरी डिग्री मैनेजमेंट से है । पर मेरी रुचि विज्ञान में है । नौ दस वर्ष के स्वअध्ययन –इन्टरनेट) से मैंने विज्ञान में दक्षता हासिल की है ।
० आपके एकाउन्ट विषय में इस तरह राह परिवर्तन से कोई समस्या नहीं आती है ?

एस्ट्रनमर राजु अहमद

एस्ट्रनमर राजु अहमद

– वास्तव में इसने मुझे और भी सहयोग ही किया है । व्यवस्थापन विषय ने मुझे यह सिखाया है कि मैं किसी भी व्यक्ति या संस्था से कैसे पेश आऊँ । व्यक्तिगत जीवन में भी मैंने इससे लाभ ही लिया है ।
० विज्ञान में आप किस किस विषय के ज्ञाता हैं ?
– अन्तरीक्षीय और रासायनिक विज्ञान में बड़ी उपलब्धि मैंने पाई है ऐसा मुझे लगता है । इसके बावजूद मुझे अभी और भी आगे जानना है सीखना है ।
० अन्तरीक्ष विज्ञान में कौन कौन सी बातें आती हैं ?
– वास्तव में शैक्षिक क्षेत्र में काम करने के कारण विद्यार्थी स्कूल में सैन्द्धान्तिक बातें सिर्फ पढ़ पाते हैं । प्रत्यक्ष रूप में देख नहीं पाते हैं । मैं डोम ८÷८ मिटर का प्रयोग करता हूँ । डोम भीतर ले जाकर दिन में ही रात के जैसा बनाकर तारा मण्डल की बातें ग्यालेक्सी (आकाश गंगा), ग्रह, तारा पुञ्ज आदि पढाता हूँ । शाम में टेलिस्कोप का प्रयोग कर के प्रत्यक्ष ग्रहों ग्यालेक्सी का अवलोकन कराता हूँ ।
० खुली आँखों से तारा मडण्ल को देखना और टेलिस्कोप प्रयोग कर के तारा मण्डल देखने में क्या अन्तर है ?
– खुली आँखों से देखने पर तारा मण्डल एकदम छोटा और बत्ती की तरह मात्र दिखाई देता है । टेलिस्कोप से देखने पर तारा मण्डल एकदम नजदीक से देखा जा सकता है । तारा तथा ग्रह उपग्रह में जो रिंग हैं उसे भी आराम से देखा जा सकता है । जिससे छात्र बहुत कुछ जान और समझ सकते हैं । इससे उन्हें खुशी भी होती है ।
० रसायन विज्ञान की आपने बात की । इसमें कौन कौन सी बातें आती हैं प्रदर्शनी के अन्तर्गत ।
– रसायन विज्ञान में बहुत बातें हैं । जिसे कम समय में बताया नहीं जा सकता फिर भी हमें प्रदर्शनी २ या ३ घन्टे में समाप्त करना पड़ता है । जिसमें लिक्विड अक्सिजन, लिक्विडन नाइट्रोजन, ड्राइ आइस, सिल्भर नाइट्रीक, पोटासियम नाइट्रेट जैसी चीजें अधिक प्रयोग में आती हैं । इसलिए प्रयोग करने के लिए छोटा बड़ा बीकर और विशेष पानी आदि का प्रयोग होता है । जिससे हम आइस बनाते हैं, नाइलन बनाते हैं, विभिन्न रसायनों का प्रयोग कर के कलर परिवर्तन करते हैं । यह सब रसायन विज्ञान के अन्तर्गत ही पड़ता है । कम समय में ही छात्र बहुत बातें सीख पाते हैं ।
० कतिपय रसायन जीवन उपयोगी होता है । कितना जानलेवा भी होता है । इसमें हम कैसे सावधानी अपना सकते हैं ? रसायन के गलत प्रयोग से दुर्घटना भी हो सकती है इससे विद्यार्थियों को कैसे बचाया जा सकता है ?
– अन्य विकसित देशों में ऐसी बातों के लिए कानून ही बना है । रासायन का प्रयोग करते समय या सीखते समय विभिन्न बातें महत्वपुर्ण होती हैं जैसे ः नहाने का बाथरुम, हाथ धोने का बेसिन, साबुन, पानी, एप्रोन, ग्लोब, चश्मा, पैरों में जूता, मुख में लगाने के लिए मास्क ये सारी चीजें सामान्य हैं पर इनका बहुत महत्व है । रसायन प्रयोग करते समय प्रदर्शनी करते समय विद्यार्थी को कितनी दूरी पर रखा जाय यह हम तय करते हैं । जिससे सावधानी अपनायी जा सके । बहुत बातें विद्यार्थी नहीं जानते हैं उनका हम संरक्षण करते हैं और बड़ों के सामने ही प्रयोग करवाते हैं । सावधानी हम अपनाते हैं जिसके कारण आज तक कोई दुर्घटना नहीं हुई है
० युनिभर्सल एम्युजमेन्ट प्रा.लि. जो आपकी संस्था है, इसके सभी सदस्य एस्ट्रोनोमर ही हैं ?
– हम संस्था में ४÷५ व्यक्ति हैं । सभी एस्ट्रोनोमर नहीं हैं पर हम सभी विषय के विशेषज्ञ जरुर हैं । मेरे साथ मेरे भाई हैं जो इन्डिया के ब्यङलोर से औषधी विज्ञान में दक्षता हासिल किए हुए हैं और रिर्सचर साइन्टिस भी हैं । ऐसे ही और भी विशेष लोग मेरे साथ हैं जो मेरा सहयोग करते हैं ।
० आपकी संस्था को शुरु हुए कितने वर्ष हुए और कितनी जगह पर आपने प्रदर्शनी लगाया है ?
– संस्था शुरु किए हुए चार वर्ष हो चुके हैं । हमने प्रदर्शनी काठमाण्डौं, पोखरा, चितवन, हेटौडा और भारत के रायपुर में प्रदर्शनी किया है । विश्व के और जगहों पर भी जाने की इच्छा है ।
० फिडब्याक कितना मिला है आपको ? नेपाल सरकार की ओर से कितना सपोर्ट मिला है ?
– अब तक दस हजार लोगो ने प्रदर्शनी को देखा है । फिडबैक अच्छा आ रहा है । हमें भारत से भी आफर मिल रहा है । जहाँ तक नेपाल सरकार की बात है तो हम प्रयासरत हैं । अभी तक हम अपनी बात वहाँ तक पहुँचा नहीं पाए हैं । सरकारी स्कूल में भी हमने प्रदर्शनी किया है वहाँ से भी अच्छी फिडबैक आ रही है । सरकार भी जरुर हमारा साथ देगी ऐसा विश्वास है ।
० आपका उद्देश्य क्या है ?
– हमारा उद्देश्य विद्यार्थिायों को विज्ञान में रुचि जगाकर उसके प्रति उन्हें आकर्षित करना है । ताकि वो भविष्य में इसका लाभ उठा सके ।

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