राजेन्द्र महतो ने मधेश आन्दोलन का बिगूल फूंका

काठमांडू, २२ मई |राजपा नेपाल के अध्यक्ष मण्डल के सदस्य एवं वरिष्ठ नेता राजेन्द्र महतो ने कहा कि जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं हो जाती , तब तक स्थानीय निकाय चुनावों में शामिल होने का सवाल ही नहीं उठता है | उन्होंने कहा कि सरकार हमें झूठा आश्वासन देकर मधेश की पहचान को मिटाना चाहती हैं , लेकिन हम ऎसा होने नहीं देंगें | अपनी पहचान को बरकरार रखने के लिए आन्दोलन ही एक सशक्त माध्यम है | इस प्रकार उन्होंने जनता को आन्दोलन हेतु तैयार रहने के लिए बिगूल फूंका है | हिमालिनी के सम्वाददाता विजय यादव से हुई बातचीत का संपादित अंश –

कोई भी सरकार संविधान संशोधन करनें की हैसियत नहीं रखती हैं । किसी के पास दो तिहाई बहुमत नहीं है । सरकार को संयोजन करनें के जिम्मेदारी होती है और उसको संयोजन की भुमिका निर्वाह करने का दायित्व भी होता है । तो जो कठिनाई इस सरकार को हुइ है वैसी कठिनाई आने बाली सरकार को भी होगी । दो तिहाई जवतक नहीं पहुचेगा तबतक संसोधन में कठिनाई ही रहेगी । हमारा सवाल सिर्फ सरकार से कहाँ हैं । हमारा सवाल तो तिनों पार्टी से हैं जिसने (काँग्रेस, एमाले और माओवादी मिलकर) गलत संविधान बनाया हैं । इस लिए तीनों पार्टीया मिलकर संविधान का संशोधन करके गल्ती को सुधार करें । सरकार वा प्रचण्ड और शेरवहादुर से हमको मतलव नहीं हैं । हमको मतलव हैं यें तीनों बेईमान मिलकर के संविधान बनाया है तो यें तीनों बेइमान इमान्दार बनें । जवतक ये इमान्दार नहीं बनेगा तबतक एक दुसरें को दिखाते रहेंगा । और संख्या नहीं पहुँचा हैं कहते रहेगा । उस के बाद मधेशी जनजाती को अधिकार नहीं देने के लिए साजिशें रचता रहेगा । इसलिए ये सरकार वो सरकार हमारे लिए कोई अर्थ नहीं रखता । यें सभी मिलकर के संविधान बनाया । बारी–बारी करके सरकार मे जा रहा हैं । अव हमारा विषय हैं तुम तीनों मिलकर सरकार जिसको भी बनाना हैं बनाओं , कौन प्रधानमंत्री बनेगा तुम लोग जानों किसकी सरकार बनेगी किस पार्टी की सरकार बनेगीं ये बात तुम लोग जानों मेरा सवाल हैं तुम तीनों मिलकर मधेशी के साथ अत्याचार किया है तो तीनों मिलकर सुधार करों । मेरी व्यक्तिगत धारणा हैं कि मौजुदा समस्या समाधान के लिए आन्दोलन का कोई विकलप नहीं है |

राजपा नेपाल चुनाव में जाएगी या नहीं ?

हम चाहते हैं कि यह चुनाव नेपाल की सभी जनता के लिए हो और बने । इस चुनाव में पुरे नेपाल की जनता भाग ले सके ऐसा चुनाव होना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य है कि एैसी अवस्था नहीं बन पायी है । सम्पूर्ण देश की जनता इस चुनाव को सहज रुप से नहीं ले पा रही है । क्योंकि अनुकुल परिस्थिती नहीं बन पा रही है । मधेशी जनजाती के सन्दर्भ मे जो काफी लम्बें अरसें से मुक्ति और अधिकार प्राप्ति की लडाई चल रही है वह अभी बरकरार है | संविधान संशोधन के लिए जो कुर्वानी हुई है उसके लिये निरन्तर रुपसे संघर्ष चलते आ रहा हैं |  संविधान संशोधन की मांग आन्दोलन के द्वारा उठाया गया था, आन्दोलन के समय मे जो झुठा मुदा लगाया गया, कई सारे साथी अभी भी देश से बाहर हैं | इन सारी समस्याको नजरअंदाज करके चुनाव किस प्रकार हो सकता हैं । अभी तक जो भी सबाल उठी हैं उन सवालों को निराकरण किए बिना चुनाव का माहोल कैसे बन सकता है ?  और माहौल नही बना तो एैसी अवस्था में चुनाव में कैसे जाया जा सकता है ? राजेन्द्र महतो ने प्रतिप्रश्न किया |

प्रधानमंत्री जी कहतें हैं चुनाव में राजपा भी भाग ले, लेकिन राजपा को चुनाव मे जाने के लिए बतावरण नहीं बना पा रहें हैं । विगत में जिस मुदा के लिए इतना आन्दोलन हुआ, सहादत दिये गये उन सारी मांगों को  संविधान संशोधन के जरिये पुरा करना था लेकिन नहीं हुआ हैं। चुनाव में तो हम जाना चाहतें हैं लेकिन चुनाव में जानें के लिए अनुकूल परिस्थिती नहीं बनाई गई है ।  सरकार और मूख्य बडी पार्टीया काँग्रेस एमाले और माओवादी चुनाव में जानें से हमें बञ्चित करनें के प्रयास कर रहें हैं, हमारें रास्ते रोक रहें हैं ।

चुनाव में जाने के लिए संविधान का संशोधन, गावँपालिका, नगरपालिका को जनसंख्या के अधार पर संख्या बृद्धि, मुदा मामिला फिर्ता, शहिद घोषणा ये सारी बातें पुरा करना पडेगा । तभी तो हमारे लिए चुनाव में जाने के लिए रास्ता खुलेगा । सरकार यें सब पुरा करनें के लिए पुरी तरह तैयार नहीं दिख रही हैं । इस लिए हमारें लिए चुनाव में जाना अभी की स्थिती मे कठिन हैं । हम अभी भी चाहते हैं कि राज्य हमारें मांगों को सम्बोधन करें । और हमारे लिए चुनाव का रास्ता खोलें । लोकतन्त्र में चुनाव एक अधार अस्त्र होता हैं । चुनाव लोकतन्त्र की मजबुती के लिए हम भी चाहतें है । लेकिन राज्य पक्ष के निषेध व्यवहार और उन के काम से हमें चुनाव में जानें से रोक रहें हैं । यें बात ठिक नहीं है और इस प्रकार से मधेश सहभागी न हो, मधेश के सबालों को लेकर संघर्ष करनें बालें शक्ति हैं वो सहभागी नही हो वैसा चुनाव का कोई अर्थ नहीं होगा । उस प्रकार के चुनाव को सर्वस्वीकार्य नहीं मना जाएगा । और उस चुनाव के उपर जब कोई सवाल खडा रहेगा कि यें चुनाव क्या हैं । यें सभी के लिए नहीं मान्य होगा । सिर्फ नाम के लिए चुनाव हुवा ।
चुनाव के सन्दर्भ मे अभी भी हमारी पार्टी के अन्दर सारी विषय वस्तु पर छलफल हो रहा है । सारें परिस्थिती के मूल्याङकन करके आगे कैसे चला जाए इस विषय पर पार्टी के अन्दर विचार विर्मश जारी हैं । अन्तोगत्वा पार्टी का निर्णय जल्द ही आने बाले है।

उपेन्द्र यादव के कथनी और करनी मे फर्क हैं, मधेशी एकता को कमजोर कररहें हैं : राजेन्द्र महतो

उपेन्द्र यादव नें जनकपुर में जो कहा तो उनकी कथनी और करनी मे अकाश पताल का फर्क हैं । वे मधेशी एकता की बात तो नहीं किए हैं बल्कि मधेशी एकता के विभाजन के बात किए हैं । उन्होने अपनें काम से प्रमाणित कर दिया हैं । मधेशी मोर्चा एक था हम सभी इक्कठे थें । मधेश के पार्टी एक नहीं थी । अलग अलग रहतें हुए भी हम एक होकर मोर्चा के काम कर रहें थें । कम से कम एक लक्ष्य के साथ आगे तो बढ रहे थें । उस लक्ष्य को भी उन्होने तोड दिया । मधेशी मोर्चा के निर्णय विपरीत, नीति और कार्यक्रम के विपरीत बिना कोई विचार विर्मश और निर्णय के उन्होने चुनाव में सहभागिता जनादी । संविधान संशोधन बिना चुनाव में नहीं जानें का फैसला को नकारतें हुए, मोर्चा के निर्णय के खिलाप वो अकेले चुनाव में चलें गए । वो मोर्चा को समाप्त करके तो खुद चलें गए ही । और फिर वो मधेश केन्द्रित पार्टी से एकता न कर के और मोर्चा न बनाकर अन्य के साथ जाकर मोर्चाबन्दी किया । तो इस बात से यह कह सकतें हैं कि उपेन्द्र जी कहतें क्या हैं और करतें क्या हैं इस में कोई तारतम्य नहीं हैं । आज मधेश का सवाल कमजोर हुवा उपेन्द्र जी के कारण । मोर्चा और गठबन्धन को छोडकर अकेले निर्वाचन मे भाग लेने के फैसला जो किया उस से गठबन्धन और मोर्चा दोने धराप में पड गया । मधेश के सवाल जो था वो भी धराप मे पड गया । और जो मिशन था उसको भी कमजोर करनें का प्रयास हुआ । यही कर्ण है की सरकार मागों को सम्बोधन किए बगैर चुनाव की बातें कर रहीं हैं । प्रथम चरण का चुनाव करा ही ली और अब दुसरें चरण का चुनाव भी कराने में लगी है। संविधान संशोधन को नकारतें हुए चुनाव करानें की ओर लगे हैं । एैसी परिस्थिती हमारी एकता में कमजोरी होने के कारण आयी है । और इस एकता में दरार डालने का काम उपेन्द्र जी ने किया । इस का लाभ राज्य पक्ष उठा रहें हैं । इस लिए उपेन्द्र एकता विरोधी काम किए हैं । मधेश को कमजोर करनें का काम किया हैं । लेकिन किसी व्यक्ति को कमजोर करनें से हमारी एकता कमजोर नहीं होगी । कोई व्यक्ति को बात छोड देने से बात छुटती नहीं हैं । संघर्ष थोरा लम्बा जरुर होता हैं लेकिन समाप्त नहीं होता ।
उपेन्द्र यादव मधेश के प्रति जिम्मेदार और सम्बेदनशिल हैं । वास्तव में वे अगर मधेश की मुक्ति चाहतें हैं तो मधेशी मोर्चा के ६ घटक दल राष्ट्रिय जनता पार्टी मे आकर उपेन्द्र यादव भी शामिल हो जाए । राष्ट्रिय जनता पार्टी के एक अंग वो भी हो जाएगें तो फिर राष्ट्रिय जनता पार्टी के निर्णय के अधार पर हम सभी लोग एक्कठे होकर संघर्ष मे चलेंगे या आन्दोलन में जाना हैं तो साथ चलेंगें । हम आज भी कहतें है उपेन्द्र जी को कि आप भी आ जाए । आप अन्दर आ जाएगें तो आप जितनी भी गल्ती कियें हैं मधेश की जनता आप को एकता के नाम पर माफ करदेगें, ये बात मैं बार बार उपेन्द्र जी कहतें आ रहा हूँ । मोर्चा जो सात पार्टी थी वो एक पार्टी के रुप मे हो जाए । मधेश के एकता में बाधक और व्यवधान कहाँ–कहाँ और कौन–कौन कर रहा हैं इस का सही उत्तर और जवाफ, दण्ड या पुरस्कार जनता देती हैं और देगी । इस लिए उपेन्द्र जी मेरा आग्रह है कि अभी भी कुछ बिगडा नहीं हैं मधेशी मोर्चाको एक पार्टी बनाने का मिशन था मधेशी जनता का उस मे आप ही कमी रह गए हैं बाँकी सब एक हो गए हैं । आप के लिए राजपा के अन्दर हर बक्त दरवाजा खुला हैं । और उस के बाद जो भी करना है एक बैनर एक छाते के निचे करेंगें । तो उपेन्द्र जी के लिए अभी भी अवसर हैं । अपनें भुल को सुधार करें तो उन के लिए दरवाजा बन्द नहीं हैं । प्रस्तुति : विजय यादव

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1 Comment on "राजेन्द्र महतो ने मधेश आन्दोलन का बिगूल फूंका"

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