राज्य द्वारा मधेस के धरोहर माता कंकालिनि की पहिचान मिटाने का षड़यन्त्र : रोशन झा

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रोशन झा, राजबिराज, माघ ३ गते, सप्तरी । सप्तरी भारदह में अवस्थित प्रसिद्ध सक्तिपिठ श्री श्री 108 श्री माता कंकालिनि भगवति लाखौं-लाख भक्तजनों के आस्था कि केन्द्रबिन्दु हैं । नेपाल में सायद ही कोई ऐसा स्थान होगा जहाँ के लोग कंकालिनी भगवति कि महिमा को नही जानते होगें । हालही मे जो नगरपालिका और गाउँपालिका बनाने का योजना कार्यान्वयन मे लाया गया है उसके तहत ‘भारदह’ गा. वि. स. को ‘हनुमान योगिनी’ नगरपालिका में मिलाने का प्रस्ताव पारीत किया गया है । सप्तकोशी नदी के किनार अवस्थित यह कंकालिनि भगवति मंदिर स्थानियवासीयों के लिये गौरव की बात है और भारदहवासीयों का पहचान का प्रथम जरिया भी है ।

कोशी नदि एवं कोशी टापु वन्यजन्तु आरक्ष के नजदीक रहे यह कंकालिनि भगवति मंदिर प्रयट्कीय दृष्टिकोण से भी एक उदगम धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के रुपमे विकसित किया जा सकता है । मधेस के प्रमुख धरोहर में से एक ईस कंकालिनी भगवति की महिमा को उजागर करने के वजाय ईसे किसी दुसरे बिना प्रचलित नाम वाले नगरपालिका मे मिलाना ईस धरोहर की आस्था,महिमा एवं स्थानियवासीयों के गौरव पर प्रहार करके उसकी पहिचान मिटाने का दुष्प्रयास है ऐसा भारदहवासीयों का मानना हैं। अभी भी समय है भारदह लगायत आसपास के गाउँ को जोडकर कंकालिनि नजरपालिका या गाउँपालिका के रुपमे विकसित किया जाय, राज्य को ईस पर एक विचार करने की आवश्यकता है ।

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