राप्ती के पार विद्युत विस्तार

विनय दीक्षित:तार लगा ही नहीं, और खर्च हो गया १६ लाख
पहले जब संसदीय निर्वाचन होता था, तो चुनाव में भाग लेनेवाला नेता यह कह कर चुनाव जीत जाते थे कि मंै इस पिछडे क्षेत्र में सडÞक और बिजली मुहैया कराउँगा । सडक और विजली जैसे शब्दों पर, फत्तेसिंह थारु, प्रेम बहादुर भण्डारी, ज्ञानु के.सी.और इस्तियाक र्राई जैसे नेताओं ने राप्तीपार क्षेत्र पर जमकर राजनीति किया, लेकिन अब जनता इस सवाल में उलझी हर्ुइ है कि अगामी चुनाव में किन शब्दों को लेकर नेता मैदान में उतरेगे –
बाँके जिलाका एक चौथाई हिस्सा, जहाँ ९ गा.बि.स. मौजूद हैं, बैजापुर, विनौना, फत्तेपुर, गंगापुर, मटेहिया, नरैनापुर, कालाफाँटा, लक्ष्मणपुर और कटकर्ुइंया । इन सभी गा.बि.स.क्षेत्र में न तो सडÞक है और न ही बिजली । सरकार के अत्यावश्यक निकाय जैसेः पुलिस, विद्यालय, स्वास्थ्य चौकी, डाक आदि के अलावा सरकार की उपस्थिति यहाँ न्यून है । बाँके जिला में अवस्थित राप्ती नदी को पार करने के बाद सभी पर्ूर्वी क्षेत्र को राप्तीपार क्षेत्र कहा जाता है । यह भौगोलिक रुप में जिले के चार भागका एक हिस्सा है । जहाँ पिछले १३ वर्षों से विजली की आश में लोग विना तार वाले खम्बे को देखकर अपनी प्यास बुझा रहे हैं ।
जनता की पहल पर २०६३ साल में इस क्षेत्र में बिजली विस्तार के नींव स्वरुप अवधराम थारु की अध्यक्षता में सोनारी बघौडÞा ग्रामीण सामुदायिक विद्युतीकरण विकास मूल समिति का गठन हुवा, जिस समितिको बार-बार समिति के सदस्यों द्वारा ही अवैधानिक और भ्रष्ट बताया गया । सूत्रों के मुताबिक विद्युत विस्तार क्षेत्र में पडÞने वाले ९ गा.बि.स., जिला विकास समिति तथा संसद कोष से सिटिजन बैंक नेपालगंज शाखा के खाता नं.००५००००३५२,श्द्य में कूल मिलाकर ३ करोडÞ ३८ लाख ४७ हजार ८ सौ ७७ रुपये समिति को हस्तान्तरण हुआ था ।
बाद में समिति पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा और जिला विकास अधिकारी के संयुक्त हस्ताक्षर का दूसरा खाता संचालन कर उसी बैंक के खाता नं.००५००००००८,ऋऋ में सभी रुपये ट्रान्सफर किए गये, और पुराने खाते मंे बैंक द्वारा मिलने वाले ब्याज की राशि को जमा किया जाने लगा ।
जिससे समिति अध्यक्ष अवधराम थारु, सचिव वीरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव और कोषाध्यक्ष मुनव्वर अली मुकेरी के संयुक्त हस्ताक्षर द्वारा ब्याज खाते से विभिन्न शर्ीष्ाक में करीब १६ लाख रुपैया खर्च दिखाई दिया ।
विद्युत समिति में हुये घोटाले की छानबीन करने के लिए गठित ४ सदस्यीय समिति के सदस्य राजेन्द्र कुमार विश्वकर्मा ने कहा, यह वेवजह खर्च है, किसी खम्बे पर तार लगा ही नहीं तो खर्च कैसा –
विश्वकर्मा ने आगे बताया- समिति का काम सबस्टेसन सुचारु होने के बाद शुरु होगा । लेकिन अभी सबस्टेसन सुचारु होने में ही वर्षों लगेंगे तो आखिर समिति के खर्च करने का औचित्य क्या है – वह खर्च नहीं, सिर्फघोटाला है ।
गठन प्रक्रिया के २ साल बाद ही समिति का पर्ूण्ा रुप से छानबीन शुरु हुआ और छनबीन समिति ने विद्युत समिति के पदाधिकारियों द्वारा अनियमितता की जानेवाली राशि १ लाख ४८ हजार रुपये असूल करने का भी निर्ण्र्ााकिया था, लेकिन समिति के एक सदस्य ने बताया कि वह निर्ण्र्ााभी विद्युत समिति के पास नहीं है ।
स्थानीय लोगों ने तो विद्युत विस्तार के नाम से मुंह मोडÞ लिया है, लोगों का रुख अब शिकायत नहीं गुस्से की ओर है । विद्युत विस्तार के नाम पर लाखों का घपला करने वाले आखिर किसी न किसी पार्टर्ीीे स्थानीय स्तर के जनप्रतिनिधी ही हैं, अगर उन्ही की नीयत ठीक नहीं है, तो जनता आखिर किस के पास जाए – जनता विना तार वाले खम्बोंको देखकर विजली की आश भी बुझा चुकी है ।
हिमालिनी से शिकायत करते हुये मटेहिया के पर्ूव गा.बि.स. अध्यक्ष तथा विद्युत विस्तार समिति के सल्लाहकार रामचन्द्र मौर्यका कहना है कि उन्हे कभी किसी बैठक में नहीं बुलाया गया । उन्होने कहा- मैं तो सल्लाहकार के रुप में था, लेकिन समिति को आज तक मेरी जरुरत ही नहीं पडÞी ।
समिति के सदस्य अजयकुमार श्रीवास्त ने बताया कि मैं अकेले समिति से बार-बार भीडÞता आ रहा हूँ क्योंकि समिति पर्ूण्ा रुप से गैर कानूनी है, समिति का मात्र एक बार अधिवेशन हुआ है, तबसे किसी चीज का कोई लेखाजोखा नहीं है, कहीं कोई माइन्युट नहीं है, सिर्फजनता के सपनों के साथ खेलवाड हो रहा है । कोई भी अपनी इच्छा अनुसार रकम निकालता और खर्च करता है, यहाँ तक कि विल और लेखापरीक्षण रिपोर्ट भी दयनीय अवस्था में है ।
श्रीवास्तव ने आगे बताया, समिति में हो रहे भ्रष्टाचार के सम्बन्ध में हमने कई बार प्रधानमन्त्री और उर्जा मन्त्रीको ज्ञापन पत्र भी भेजा लेकिन वहाँ से सन्तोषजनक कारवाही नहीं हो सकी ।
विद्युत समिति सदस्य रामकुमार राढ का मानें तो करीब डेढ वर्षसे समिति की बैठक ही नहीं हर्ुइ है, समिति का कारोबार क्या है, और कैसा है इस विषय पर अधिकाँश सदस्यों को जानकारी नहीं है ।
राढ ने बताया- समिति पर अख्तियार दुरुपयोग अनुसन्धान आयोग में भी कारवाही चल रही है, समिति के प्रतिनिधि भ्रष्ट हैं और एक बार अख्तियार में हाजिर भी हो चुके हैं, बाँकी के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है । मंै नाम मात्रका सदस्य हूँ ।
नेपाल सरकार की ३३ हजार के.भी. विद्युत लाईन जडान और विस्तार कार्यक्रम अर्न्तर्गत बैजापुर स्थित -सबस्टेसन) पावर हाउस निर्माण का जिम्मा सरकार का है, जो अभी तक संचालन में नहीं आया है । पावर हाउस के नाम पर सिर्फभवन निर्माण हो पाया है बाँकी प्राविधिक चीजों का कहीं अता-पता नहीं है ।
विद्युत समिति के कोषाध्यक्ष मुनव्वर अली मुकेरी ने तो खर्च कितना हुआ, इस बात को बताना भी जायज नहीं समझा । उन्होने कहा- समिति के लोग जहाँ कहते हैं मै हस्ताक्षर कर देता हूँ, कितना खर्च हुआ कितना बाँकी है इसके बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है ।
वहीं बैजापुर से नरैनापुर तक ११ हजार के.भी. विद्युत लाईन विस्तार का जिम्मा समिति का है, लेकिन विद्युत विस्तार किए बिना ही समिति ने आखिर इतनी मोटी रकम कहाँ खर्च की – क्या इस का कोई लेखा-जोखा भी है – इस सवाल पर विद्युत समिति के अध्यक्ष अवधराम थारु का कहना है- देखिए इस संसार में सभीको पैसा चहिए, जहाँ भी हम काम लेकर जाते हैं, वहाँ इस तरह ब्यवहार किया जाता है मानो मैं पैसे की मसीन हूँ ।
थारु ने आगे कहा- मेरी जानकारी में करीब १३/१४ लाख खर्च हुआ है, लेकिन इस रकम को समिति के लोगों ने नहीं, केन्द्रिय राजनैतिक दलों ने खाया है ।
उन्होने बताया कि इस समिति में लगने के बाद मेरी जो बदनामी हर्ुइ है, वह कभी नहीं हर्ुइ । लेकिन फिर भी मंै प्रतिवद्ध हूँ कि बिजली पहुँचाकर ही दम लूँगा, लोग कुछ भी कहें । बात रही बैठक की, तो बैठक की जगह पर सभी से जहाँ सम्भव होता है हस्ताक्षर कराया जाता है क्योंकि बैठक में आने के बाद हर पदाधिकारीको भत्ता की ख्वाहिश होती है जो मैं पूरा नहीं कर सकता ।
खाते में आप भी संलग्न हैं, तो आपको भी अच्छा कमिशन मिलता होगा – यही सवाल जब हिमालिनी ने स्थानीय विकास अधिकारी विश्वराज डोटेल से किया तो उनका जबाब आर्श्चर्य चकित होते हुये कुछ इस तरह था- विद्युत समिति में मेरा हस्ताक्षर है – पता नहीं,  खाता के विषय में तो मुझे कोई जानकारी नहीं है ।
हिमालिनी ने जब बैंक से आर्थिक कारोबार का विवरण मांगा तो बैंक ने विभिन्न नियम और कानून बताते हुये जानकारी देने से मना कर दिया । तो सवाल कई उठते हैं । जो हो रहा है, उसे होने दिया जाय या ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर कानून द्वारा अंकुश लगाया जाय – इस विषय पर स्थानीय जनता को आगे आकर अपने क्षेत्र के पैसे का हिसाब माँगने की जरुरत है ।

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