राप्रपा प्रजातान्त्रिक फिर विभाजन की ओर

काठमांडू, १८ भाद्र ।
सत्ता और शक्ति के लिए पार्टी विभाजन करना नेपाल में कोई नयां बात नहीं है । ऐसी ही क्रम में पिछली बार कमल थापा नेतृत्व में रहे राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी से अलग होकर पशुपति राणा ने ‘राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (प्रजातान्त्रिक) गठन किया था । राणा नेतृत्व में निर्मित ‘राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (प्रजातान्त्रिक) पूर्ण रुप में गठन भी नहीं हो रहा है । लेकिन पूर्ण निर्माण से पहले ही पार्टी विभाजन की ओर अग्रसर हो गया है । समाचार स्रोत के अनुसार पार्टी विभाजन में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह करने वाले नेता दीपक बोहोरा ‘राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी (प्रजातान्त्रिक) को विभाजन करने जा रहे हैं ।


सरकार में जाने के लिए ही पशुपति शमशेर राणा ने राप्रपा को विभाजन किया था । चार मन्त्री और राज्य मन्त्री मांग रहे थे राणा । इधर देउवा तीन मन्त्री देने के लिए तैयार हुए थे । राणा ने मन्त्रियों की लिष्ट में दीपक बोहोरा को भी समावेश किया था, जिसके चलते देउवा मन्त्रिपरिषद् बिस्तार नहीं कर पा रहे थे । बताया जाता हैं कि देउवा बोहोरा को मन्त्री बनाना नहीं चाहते हैं । पिछली बार नेपाल आयल निगम के जग्गा खरीद प्रकरण तथा भ्रष्टाचार में पूर्वमन्त्री दीपक बोहोरा भी शामील हैं, ऐसा समाचार आ रहा है । इसीलिए देउवा ने बोहोरा को हटाने के लिए राणा को आग्रह किया था ।
बताया जाता है कि आग्रह अनुसार ही बोहोरा का नाम हटाकर देउवा ने सुनीलबहादुर थापा, विक्रम पाण्डे और रामकुमार सुब्बा को मन्त्री बनाने की तैयारी किया है । जब बोहोरा को इस बात को पता चला, तब उन्हों ने पार्टी अध्यक्ष पशुपति शमशेर राणा को धमकी दिया है– ‘अगर मैं मन्त्री नहीं बन पाता हूं तो पार्टी विभाजन हो सकता है, इसके लिए तैयार रहिए ।’ बताया गया है कि बोहोरा के धमकी के कारण पशुपति शमशेर भी तानाव में पड़ रहे हैं ।
इधर प्रमुख प्रतिपक्षी दल नेकपा एमाले ने सरकार की विस्तार तैयारी पर आपत्ति किया है । एमाले को कहना है कि निर्वाचन आचार संहिता लागू हो गया, अब मन्त्री नियुक्त करना गैर कानूनी होगा । एमाले ने इसके संबंध में निर्वाचन आयोग का ध्यानाकर्षण भी किया है ।

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