राप्रपा विभाजन के लिए प्रधानमन्त्री देउवा ने दिया, ३ करोड़ रुपये !

काठमांडू, २४ श्रावण । राष्ट्रीय प्रजातान्त्र पार्टी विभाजन के पीछे किस का हाथ है ? राप्रपा से करीब नेता तथा कार्यकर्ता के बीच यह प्रश्न बहस का विषय बन रहा है । राप्रपा के अध्यक्ष कमल थापा को माने तो विभाजन के पिछे देशी–विदेशी तत्वों का हाथ है । खैर ! ऐसी आरोप तो राजनीति में चलता ही रहता है ।
लेकिन उसी पार्टी के दूसरे नेता दिलनाथ गिरी को माने तो प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा भी राप्रपा विभाजन के लिए हाथ धोकर लगे थे । आज प्रकाशित दृष्टि साप्ताहिक के अनुसार प्रधानमन्त्री शेरबहादुर देउवा ने सत्ता में बने रहने के लिए व्यवस्थापिका संसद् की चौथी शक्ति राप्रपा को विभाजन किया है । इससे पहले वि.सं. २०५२ साल में जब देउवा प्रधानमन्त्री बने थे, उस समय में भी देउवा सांसद खरीद–विक्री प्रकरण में चर्चा में आए थे ।
आज भी उसी फर्मूला को प्रयोग कर देउवा ने राप्रपा को विभाजन किया है । दृष्टि साप्ताहिक में आगे लिखा गया है– ‘राप्रपा विभाजन के लिए आवश्यक ४० प्रतिशत सांसद् और केन्द्रीय सदस्य के लिए देउवा ने निमेश किया है । राप्रपा नेता गिरि का दावा है कि इसका प्रमाण उनके साथ सुरक्षित है । बताया गया है कि पशुपति शमशेर के पक्ष में कुछ सांसद् खरीद करने के लिए प्रधानमन्त्री देउवा ने ३ करोड रुपये दिए हैं ।

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