रामदेव की नेपाल यात्रा

बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की उपलब्धियों को देखने से मीडिया में आए आरोप बेबुनियाद नजÞर आते है । साथ ही नेपाल के हित में विचार किया जाएं तो नेपाल को लगानी मैत्री बनाने की आवश्यक्ता है, ना की बेकार का बखेड़ा करने कीbaba-ramdev
मुरली मनोहर तिवारी
ढाका टोपी पहने योग गुरु रामदेव नेपाल आएं, उन्होंने नेपाल को, मां सीता और गौतम बुद्ध की पवित्र भूमि कहकर नमन किया । पूरा नेपाल योगमय हो गया, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सभामुख, मंत्री, सांसद, पूर्व प्रधानमंत्री सब योग के रंग से रंगे दिखे । एक कुशल बिजनेसमैन को जो–जो करना चाहिए और जिन बातों से परहेज करना चाहिए था, वो सब हुआ ।
बाबा रामदेव को जानने का दावा करने वाले, जानते है कि, वे कभी सुब्रत रा‘य तो कभी लालू प्रसाद यादव, कभी कोई महंत तो कभी मोदी, इन सब से बाबा रामदेव ने हमेशा ही सही समय पर सही योग बैठाया । शायद यही वजह है कि दो दशक पहले तक दिल्ली की सड़कों पर खÞाक छान रहे बाबा आज अरबों रूपए के औद्योगिक साम्राज्य के स्वामी है । इस साम्राज्य का विस्तार कर आने वाले २० महीनो में बाबा रामदेव के उत्पादों से लगभग १००० करोड़ के कारोबार की उम्मीद है । इसी उम्मीद को पूरा करने के तहत बारा जिले में डेढ़ अरब की लगानी से निर्मित फैक्ट्री का उद्घाटन किया गया और भविष्य में ५०० करोड़ का निवेश करने की घोषणा की गई ।
बाबा रामदेव का नेपाल का कार्यक्रम पूर्णतः योजना अनुसार चल रहा था, तभी ‘कान्तिपुर’ ने उनके लगानी को नियम बिपरीत बताकर सनसनी फैला दी । जबाब में बाबा रामदेव ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि, उन्होंने अभी तक नेपाल में निवेश ही नही किया है और अनिवासी नेपाली एसोसिएशन प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक अध्यक्ष उपेंद्र महतो और उनकी पत्नी ही नेपाल में निवेशक है । साथ ही कहा कि ‘मैं अपने पूरे जीवन को कालेधन और अनियमित वित्तीय लेन–देन के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए समर्पित कर दिया है । वास्तव में, हमारी पहचान ही वित्तीय पारदर्शिता की रही है ।’ उनका ये भी कहना था, कि जब वे निवेश करेंगे तो उसका मुनाफा नेपाल में ही परोपकारी कार्य में लगेगा । उनका उद्देश्य कमाई नही भलाई है ।

बाबा रामदेव ने कहा, “नेपाल, अभी मुख्यतः तीन समस्या से ग्रसित है, संविधान कार्यान्वयन, राजनीतिक अवस्था और आर्थिक समृद्धि, संस्कृति के साथ संघर्ष कर रहा है । हिमाल, पहाड, तराई के जनता के बीच उत्पन्न विभेद हटाने के लिए योग ही उत्तम माध्यम है’ । यही सत्य और राष्ट्रहित में है
कान्तिपुर’ का आरोप है कि नेपाल के कानून अनुसार मुनाफा वितरण नही करने वाली कम्पनी विदेशी नागरिक दर्ता नही करा सकते । जबकि बाबा रामदेव कानून की अनदेखी कर चार भारतीय और एक नेपाली नागरिक के नाम पर कंपनी पंजीकृत कराया, जो की गैरकानूनी है । ‘कान्तिपुर’ का दावा है कि उक्त कम्पनी गैरकानूनी तरीके से दर्ता होने की जानकारी ‘कान्तिपुर’ को २०६९ साल में ही पत्ता लग गया था, फिर अब तक ‘कान्तिपुर’ ने उजागर क्यों नही किया था ?
बाबा रामदेव को जड़ीबुटी खेती तथा आयुर्वेद शिक्षण अस्पताल निमार्ण के लिए नेपाल संस्कृत विश्व विद्यालय ने २ सौ बिघा जमीन ४० वर्ष के लिए किराए में देने की घोषणा की है । विश्वबिद्यालय के उपकुलपति कुलप्रसाद कोइराला तथा उच्च कर्मचारी के अगुवाई में जÞमीन भाड़ा में देने के घोषणा पर विश्वविद्यालय के पदाधिकारी विरोध में आए । ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ ने खबर दिया की, स्थानीय स्तर पर विवाद होने के बाद इसका फाइल प्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल को भेजा गया । ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ स्रोत के अनुसार बाबा रामदेव प्रधानमन्त्री को प्रभाव में लेकर निर्णय करा रहे है । क्या ऐसा निर्णय होने से कुछ गलत हुआ ऐसा कहा जा सकता है ?
‘कान्तिपुर’ और ‘अन्नपूर्णा पोस्ट’ के द्वारा लगाए आरोप गंभीर है, इसकी पड़ताल करने के लिए ‘हिमालिनी’ ने बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि के बारे में जानकारी जुटाने और उसे खंगालने का बीड़ा उठाया । बाबा रामदेव, वास्तविक नाम रामकृष्ण यादव जन्म २६ दिसम्बर १९६५, हरियाणा, भारत हैं । सरकारी स्कूल से आठवीं कक्षा तक पढाई पूरी करने के बाद रामकृष्ण ने खानपुर गाँव में योग और संस्कृत की शिक्षा ली । योग गुरु बाबा रामदेव ने युवावस्था में ही सन्यास लेने का संकल्प किया और रामकृष्ण, बाबा रामदेव के नये रूप में लोकप्रिय हो गए । बालकृष्ण का जन्म ४ अगस्त १९७२ को हुआ और इन्होंने संस्कृत में आयुर्वेदिक औषधियों और जड़ी–बूटियों के ज्ञान में निपुणता प्राप्त की और इसका प्रचार–प्रसार का कार्य करते हैं । इनके सफर पर एक नजर डालें तो उनके वर्तमान सहयोगी आचार्य बालकृष्ण और आचार्य कर्मवीर के साथ शुरुआत १९९०–९१ में की । उन्हें हरिद्वार के पास कनखल में त्रिपुर योग आश्रम में दवाई बनाने के लिए रखा गया । वही उनकी मुलाकÞात कृपालु बाग आश्रम के महंत स्वामी शंकर देव से हुई । शंकर देव का उस इलाके में काफी सम्मान था और इलाके में उनकी काफी जमीन भी थी । बाद में इन्ही संत के जायदाद का इस्तेमाल कर बाबा रामदेव ने ५ जनवरी १८८५ को दिव्य योग मंदिर नामक ट्रस्ट की स्थापना की ।
ट्रस्ट में महंत के रूप में स्वामी शंकर देव थे जबकि बाबा रामदेव इसके अध्यक्ष बनाए गए । आचार्य बाल कृष्ण को इसमें सचिव और कर्मवीर को उपाधयक्ष बनाया । ट्रस्ट का मूल उद्देश्य योग को आम लोगो तक पहुँचाना था । बाबा रामदेव पर ये आरोप लगते रहे है कि ट्रस्ट के शुरुआती नौ महीनो में ही रामदेव और बालकृष्ण ने अपने खिलाफ जा रहे लोगो को बाहर का रास्ता दिखाने का काम शुरू कर दिया और अंत में बाबा रामदेव ने अपने ही सहयोगी रहे उपाधयक्ष कर्मवीर को निकाल दिया । बाबा ने साथ ही ट्रस्ट के महंत से एक पेपर भी हस्ताक्षर किया था, जिसमे यह कहा गया था की ट्रस्ट में होने वाले किसी भी तरह के विवाद में ट्रस्ट की सारी जायदाद इसी तरह के किसी ट्रस्ट को दे दिया जाये और इसी हस्ताक्षर के बाद रामदेव और उनके सहयोगी बालकृष्ण उस ट्रस्ट के मालिक बन बैठे । हालाँकि ट्रस्ट के महंत रहे स्वामी शंकर देव साल २००७ के बाद रहस्यमय ढंग से लापता हो गए और उनका कुछ भी अता पता नहीं है । इसके खिलाफ बाबा रामदेव पर एक मुकÞदमा भी दर्ज है, लेकिन बाबा रामदेव के बिरोधी रहे, तत्कालीन कांग्रेस सरकार के सघन छानबीन के बावजूद कोई आरोप सिद्ध नही हो सका ।
वर्तमान में बाबा रामदेव देश विदेश में योग सिखाने के अलावा पतंजलि के हर्बल उत्पाद भी बनाते है । चरक के बिरासत के वाहक बालकृष्ण ने आयुर्वेद से संबंधित कुछ पुस्तकों की भी रचना की है, उनके द्वारा लिखी गई पुस्तकेंः– आयुर्वेद सिद्धान्त रहस्य, आयुर्वेद जड़ी–बूटी रहस्य, भोजन कौतुहलम्, आयुर्वेद महोदधि, अजीर्णामृत मंजरी, विचार क्रांति –नेपाली ग्रंथ) । आचार्य बालकृष्ण ने शोध के क्षेत्र में भी अपना अहम योगदान दिया है अपने सह लेखकों के साथ अब तक ४१ शोध पत्र लिख चुके हैं । सभी शोधपत्र योग, आयुर्वेद और दवाइयों से संबन्धित हैं ।
बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण के कई संगठन चल रहे है, जिनमे, पतंजलि विश्वविद्यालय, पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट, पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन, पतंजलि ग्रामोध्योग ट्रस्ट, पतंजलि आयुर्वेद, हरिद्वार, योग संदेश, पतंजलि बायो अनुसंधान संस्थान, वैदिक ब्रॉड कास्टिंग लिमिटेड, पतंजलि फूड एंड हर्बल पार्क इसके अलावा पतंजलि योगपीठ के स्कूल,अस्पताल भी हैं और हरिद्वार में हजारों एकड़ में फैला पतंजलि का आश्रम है, जो निरन्तर समाज सेवा में कार्यरत रहता है ।
पतंजलि आयुर्वेद ने सबसे पहले औषधियों के निर्माण से शुरुआत की थी । धीरे–धीरे पतंजलि आयुर्वेद खाने–पीने की चीजों से लेकर कांतिवर्धक उत्पादों का निर्माण भी करने लगी है । पतंजलि आयुर्वेद ४५ तरह के कांतिबर्धक उत्पाद बनाती है जिसमें सिर्फ १३ तरह के शरीर साफÞ करने के उत्पाद शामिल हैं, जैसे–शेम्पू, साबुन, लिप बाम, स्किन क्रीम आदि । किराना के भी बहुत से उत्पादों का निर्माण पतंजलि आयुर्वेद द्वारा किया जाता है । यह कंपनी ३०अलग–अलग तरह के खाद्य पदार्थ तैयार करती है जैसे– सरसों तेल, आटा, घी, बिस्किट, मसाले, तेल, चीनी, जूस, शहद इत्यादि । दूसरी कंपनियों की तुलना में पतंजलि आयुर्वेद के उत्पाद सस्ते हैं । एफ.एम.सी.जी. कंपनियों को कड़ी चुनौती देने के लिए पतंजलि आयुर्वेद हाल ही में टीवी पर अपने उत्पादों के विज्ञापन देने शुरू किए हैं । २०१२ में करीब १५० से २०० के बीच रहने वाली पतंजलि के दुकानों की संख्या बढ़कर ४००० हो चुकी है ।
पतंजलि योगपीठ, भारत का सबसे बड़ा योग शिक्षा संस्थान है । दिव्य योग साधना हिन्दी, अंग्रेजी, नेपाली सहित कई प्रमुख भाषाओं में योग,आयुर्वेद, संस्कृति, संस्कार का प्रचार–प्रसार करती है । देश–विदेश में प्रतिमाह योग संदेश पत्रिका के दस लाख से भी अधिक पाठक है । दिव्य फार्मेसी, ऋषियों के प्राचीन ज्ञान एवं अत्याधुनिक वैज्ञानिक पद्धति के समन्वय से उच्च गुणवत्तायुक्त आयुर्वे्दिक औषधियों के निर्माण हेतु विशालकाय दिव्य फार्मेसी की स्थापना की गयी है । यह इकाई आयएसओ ९००१ः२०००, आयएसओ ९००१ः१४००१ः१८००१, डब्ल्यूएचओ, जीएमची, जीपीपी, जीएलपी प्रमाणित भारत की विशालतम आयुर्वेद औषध निर्माण इकाइयों में एक है ।
भारत में योग क्रान्ति के बाद कृषि क्रान्ति के उद्देश्य से हरिद्वार जिले के पदार्था ग्राम में भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से योगर्षि बाबा रामदेव की प्रेरणा से व आचार्य बालकृष्ण के निर्देशन में विश्व के सबसे बड़े फूड एवं हर्बल पार्क का निर्माण कराया गया है । ५०० करोड़ रुपए की लागत वाली इस इकाई के लिए कच्चा माल पतंजलि की जैविक खेती विधि से ही प्राप्त होता है, इसके अलावा बाबा रामदेव ने इसके लिए कुछ गांवों में किसानों को जैविक तरीके से खेती करने की प्रणाली सिखाने का कार्य किया है । १५००० से अधिक लोग प्रत्यक्ष–अप्रत्यक्ष तौर पर इस उत्पादन इकाई से रोजगार प्राप्त कर रहे हैं ।
पतंजलि ने स्वदेशी का पथ अपनाया और पतंजलि आयुर्वेद की स्थापना कर लोगों के सामने एक स्वदेशी ब्रांड को विकल्प के रूप में प्रस्तुत किया वहीं दूसरी ओर विभिन्न एफएमसीजी कंपनियों को टक्कर दी । हालांकि पतंजलि आयुर्वेद के शुरुआती दिनों में एफएमसीजी कंपनियों ने उसे हल्के में लिया लेकिन अब पतंजलि उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ पतंजलि आयुर्वेद ने अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों को कड़ी चुनौती देनी शुरू कर दी है । पतंजलि प्रोडक्टस की लोकप्रियता और बढ़ती मांग के चलते भारत के बड़े–बड़े शहरों में भी जैसे मुम्बई, दिल्ली, के बिग बाजार, हाइपर सिटी, स्टार बाजार और रिलायन्स जैसे बड़े स्टोर्स भी पतंजलि के प्रा‘डक्ट्स की स्टा‘किंग कर रहे हैं । पतंजलि आयुर्वेद अब जल्द ही विदेशी बाजÞारों में अपने उत्पाद लाने की तैयारी में है । पतंजलि आयुर्वेद की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिये अब डाबर कंपनी अपनी नई रणनीति तैयार कर रही है, जिसके साथ ही कंपनी अपने आयुर्वे्दिक उत्पादों में आधुनिक समय के मुताबिक बदलाव कर बाजÞार में अपने नए उत्पाद उतारने की तैयारी में है ।
पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट जल्द ही असम के चिरांग जिले में पतंजलि पंचगव्य अनुसंधान केंद्र बनाने की तैयारी कर रहा है । इस अनुसंधान केंद्र में विलुप्त हो रहीं स्वदेशी गायों और विषमुक्त कृषि उत्पादन के क्षेत्र रिसर्च किया जाएगा । स्वदेशी नस्ल की गायों और उनके दूध, दही, घी, गोबर और गोमूत्र पर गहन अनुसंधान किया जाएगा ।
पतंजलि १मार्च २०१२ में ओपन मार्केट में आई कंपनी ने ४ साल में ११०० फीसदी की ग्रोथ हासिल की । कंपनी इंटरनेशनल ब्रांड्स को टक्कर दे रही है । पतंजलि के पास वर्तमान समय में ४००० वितरक, १०००० स्टोर और १०० मेगा स्टोर व रीटेल स्टोर हैं । २०११–१२ में कंपनी का टर्नओवर ४४६ करोड़ रुपए था । २०१५–१६ का टर्नओवर ५००० करोड़ रहा । २०१६–१७ के लिए १०००० करोड़ के टर्नओवर का लक्ष्य है । अकेले दंतकांति –दन्तमंजन) का उत्पाद ४२५ करोड़ रुपए का है, और केशकांति –केश तेल) का कारोबार ३२५ करोड़ रुपए का है, ५०० करोड़ रुपए गायों की सेवा और वैदिक व आधुनिक शिक्षा के लिए । गाय के घी का नया बाजार खड़ा किया, जिसका टर्नओवर १३०८ करोड़ का हुआ । पतंजलि आयुर्वेद ने “झटपट बनाओ, बेफिक्र खाओ“ टैग लाइन के साथ पतंजलि आटा नूडल्स लांच किया, जो बच्चों में खÞासा पसंदीदा हो रहा है । पतंजलि ने एक लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया और नया बाजार खड़ा किया । इतना ही नहीं उन्होंने इस अभियान के तहत हरिद्वार और तीर्थ नगरी ऋषिकेश को गोद लिया । इंडिया टुडे पत्रिका एवं अन्य शीर्ष पत्रिकाओं द्वारा बाबा रामदेव भारत के सबसे ऊँचे, असरदार व शक्तिशाली ५० प्रभावशाली लोगों की सूची में सम्मिलित किया गया ।
बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की उपलब्धियों को देखने से मीडिया में आए आरोप बेबुनियाद नजÞर आते है । साथ ही नेपाल के हित में विचार किया जाएं तो नेपाल को लगानी मैत्री बनाने की आवश्यक्ता है, ना की बेकार का बखेड़ा करने की । नेपाल में अशांति के कारण कई कंपनियां पहले ही पलायन कर चुकी है या अपने काम समेत चुकी है । विरोध के कई स्वर तो मधेश से भी आए, जैसे बाबा रामदेव में मधेशी दल पर तंज कसा, आंदोलन के शहीदों का जिक्र तक नही किया, ना ही उनके परिवारों से मिलकर सहानुभूति जताई । ये जानते हुए भी फैक्ट्री में लेबर के काम के अलावा मधेशी को उसमे नौकरी नही मिल रही है । फिर भी मधेश ने देश हित में विरोध नही किया । जो बिरोध कर रहे है, ये वही है जो मधेश में चीनी मिल, सिगरेट फैक्ट्री, और जुट फैक्ट्री का विरोध करके उसे बंद करवा चुके है । ये वही है जिन्हें डर है कि पतंजलि के उत्पाद आने के बाद उनके घटिया और महंगे उत्पाद बिकने बंद हो जाएंगे, इनसे बचने और खÞबरदार रहने की आवश्यक्ता है ।
बाबा रामदेव ने कहा, “नेपाल, अभी मुख्यतः तीन समस्या से ग्रसित है, संविधान कार्यान्वयन, राजनीतिक अवस्था और आर्थिक समृद्धि, संस्कृति के साथ संघर्ष कर रहा है । हिमाल, पहाड, तराई के जनता के बीच उत्पन्न विभेद हटाने के लिए योग ही उत्तम माध्यम है’ । यही सत्य और राष्ट्रहित में है । व्

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