रामदेव के आंदोलन का अवसान

किशोर  कुमार  मालवीय
कुछ महीने पहले जब मैं बाबा र ामदेव से मिला था तब वह काफी गुस् से में थे । तब उनका गुस् सा यूपीए सर कार  पर  कम और  कांग्रेस के खिलाफ ज्यादा था । तब उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस के एक एक नेता को एक्सपोज कर ेंगे और  साबित कर  दिखाएंगे किन किन कांग्रेसियों के काले धन विदेशों में जमा किया है । ऐसा लग र हा था मानो उन्होंने कोई सामानान्तर  छानबीन की है और  जल्द ही उसके परि णाम सामने आने वाले हैं । सबको उम्मीद थी कि इस बार  र ामलीला मैदान में र ावण वध की पूर ी तैयार ी होगी । लेकिन बाबा ने इस बार  भी निर ाश किया । जंतर  मंतर  पर  टीम अन्ना का आन्दोलन विफल होने के बाद सबकी नजर  बाबा पर  थी । सबको उम्मीद थी कि जिस आन्दोलन को अन्ना हजार े बीच में छोडÞ कर  चले गए उसे बाबा र ामदेव न सिर्फआगे बढÞाएंगे बल्कि अंजाम तक पहुचाएंगे । शायद इसी उम्मीद में र ामलीला मैदान में जबर दस् त भीडÞ जुटी । पर  बाबा इस बार  भी चूक गए ।
विशाल जन र्समर्थन से उत्साहित बाबा ने पहले तो अपनी सार ी ऊर्जा अन्ना के आन्दोलन को कमजोर  साबित कर ने में लगाई और  इशार ों में ये बताने की कोशिश की कि टीम अन्ना की गलतियों से ही उसके आन्दोलन की अकाल मौत हर्ुइ इसलिए अब वह उस आन्दोलन -जन लोकपाल) को भी आगे बढÞाएंगे । बाबा ने टीम अन्ना पर  इशार ों में तीर  चलाए कि टीम ने नेताओं-मंत्रियों पर  व्यक्तिगत आर ोप लगाए पर  वो किसी का नाम नहीं लेंगे । दर असल, शुरु के दो दिन र ामलीला मैदान में बाबा काफी डर े सहमे लग र हे थे । हो सकता है, पिछले साल की घटना इसकी वजह र ही हो । ज्यों ज्यों भीडÞ बढÞती गई, बाबा के तेवर  सख्त होते गए । और  फिर  कांग्रेस पर  उनका आक्रमण तेज हो गया ।
लेकिन बाबा ने फिर  एक गलती कर  दी । काले धन और  भ्रष्टाचार  के खिलाफ बने शक्तिशाली मंच को एन डी ए का मंच बनने दिया । भ्रष्टाचार  के आर ोपों से घिर े केन्द्रीय मंत्री शर द पवार  को पाक साफ साबित कर ने की कोशिश की गई, आय से अधिक सम्पत्ति के केस झेल र हे मुलायम सिंह और  मायावती के र्समर्थन का ऐलान मंच से बडÞे गर्व से किया गया । उस मुलायम सिंह के र्समर्थन का जिसके मंत्री भाई ने चार  दिन पहले कैमर े पर  अफसर ों को चोर ी कर ने की सलाह दी थी । उस शर द यादव को मंच पर  माइक थमा दिया जिसने महिला आर क्षण बिल पर  अडÞचन लगाते हुए महिलाओं पर  आपत्तिजनक टिप्पणी की थी ।
बाबा र ामदेव भीडÞ को आन्दोलन में बदलने में कामयाब नहीं हुए । उन्होंने ड्रामेबाजी को ज्यादा तर जीह दी । एक एक कर  वही काम कर ते गए जो सर कार  चाहती थी । सर कार  और  कांग्रेस ने कहा कि बाबा के आन्दोलन के पीछे भार तीय जनता पार्टर्ीीै और  बाबा बीजेपी अध्यक्ष नीतिन गडकर ी को मंच पर  ले आए । क्या इतने विशाल जन सैलाब के बाद भी जन लोकप्रिय बाबा र ामदेव को आंदोलन सफल बनाने के लिए र ाजनेताओं को मंच पर  बुलाना जरुर ी था – यूपीए सर कार  को र्समर्थन दे र हे मुलायम-मायावती को क्या बाबा को मौखिक र्समर्थन दे देने भर  से उनके दाग धुल जाते हैं – जिनके खिलाफ बाबा र ामदेव आन्दोलन कर  र हे हैं उनकी सर कार  इन्हीं बाबा र्समर्थकों के बल पर  टिकी हर्ुइ है । फिर  किसे बेवकूफ बनाने की कोशिश हो र ही है –
बाबा ने ऐलान किया कि वह मांगें माने जाने तक डटे र हेंगे । पर  सर कार  टस से मस नहीं हर्ुइ । फिर  बाबा ने संसद घेर ाव का ऐलान कर  दिया । अपने र्समर्थकों से पुलिस की बसों में नहीं बैठने को कहा और  खुद जाकर  बस में घुस गए । एक वर्दीधार ी ने मंच पर  चढÞ कर  गिर फ्तार ी का नाटक किया । बाबा के साथ उसने फोटो खिंचवाए । और  उसके बाद र ामलीला मैदान छोडÞने से लेकर  आम्बेडकर  स् टेडियम छोडÞने तक बाबा ने वैसा ही किया, जैसा सर कार  और  पुलिस चाहती थी । ऐसा लग र हा था मानो पूर ा आन्दोलन फिक्स् ड था । अन्ना के आन्दोलन की ही तर ह बाबा के आन्दोलन का भी गर्भपात हो गया ।
बाबा र ामदेव ने आन्दोलन को बडÞे हल्के में लिया । इसमें कोई शक नहीं कि बाबा र ामदेव भीडÞ जुटाने का माद्दा र खते हैं लेकिन भीडÞ अपने शक्ति पर ीक्षण के लिए तो ठीक है, बार -बार  आन्दोलन के नाम पर  इसका इस् तेमाल नहीं हो सकता ।

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