राशिफल

प्रस्तुत राशिफल १ जून से ३० जून तक लागू होगा
लेखकः पं.ज्यो. हरेकृष्ण झा (ज्योतिषाचार्य)
मो. न. ९८४४०७२१९६, काठमांड़ू

मेषः (चू. चे. चो. ला. ली. लू. ले. लो. अ.) – मेष राशिवालों के लिए यह माह सामान्यतया शुभदायक रहेगा । माह के पूवाद्र्ध में जहाँ, शत्रुभय, धनखर्च तथा चञ्चलता, वही धनप्राप्ति लाभ तथा ज्ञानवृद्धि तथा उत्तरार्ध में चौपाया लाभ, सुख, धर्म में अभिरुचि तथा कार्यसिद्धि होगी ।
बृषः (इ. उ. ए. ओ. बा. वि. बु. वे. वो.) – वृष राशिवालों के लिए यह माह कष्टदायक रहेगा । माह के पूवाद्र्ध में स्थान हानि, अलाभ, बन्धनम, भय, शोक स्त्रीकष्ट होते हुए भी आकस्मिक लाभ तथा उत्तरार्ध में भी कष्टदायक ही रहेगा । तसर्थ आप विष्णुशहस्त्रनाम का पाठ करें ।




मिथुनः (क. कि. कु. घ. ङ. छ. के. को. ह) – मिथुन राशिवालों के लिए यह माह मध्यम फलदायक रहेगा । माह के पूवाद्र्ध में धनप्राप्ति, ज्ञानवृद्धि, सन्तान सुख तथा कार्यसिद्धि । परन्तु कष्ट तथा शत्रुओं से सावधानी बरतनी होगी तथा उत्तरार्ध में द्रव्यलाभ, सुख तथा विजय तथापि आलस्यता तथा शत्रुभय की सम्भावना है, तसर्थ दुर्गा सप्तसती पाठ करें ।
कर्कः (हि. हु. हे. हो. डा. ड़ी. ड़ु. ड़े. ड़ो) – कर्क राशिवालों के लिए यह माह सामान्य है । माह के पूर्वाद्ध में शारीरिक रोग, भय, पुत्रकष्ट तथा अधिक व्यय तथापि धन सुख तथा व्यापार में मध्यम सफलता मिलेगी । तथा उत्तरार्ध में भी कष्दायक ही तथापि किञ्चित द्रव्यलाभ होगा । आप के लिए शनि तथा हनुमान की उपासना लाभकर होगी ।
सिंहः (मा. मि. मु. मे. मो. टा. टि. टु. टे) – सिंह राशिवालों के लिए माह सामान्यतया शुभ ही रहेगा । माह के पूवाद्र्ध में विभिन्न क्षेत्र में लाभ, सुख, द्रव्यलाभ तथा कार्यसिद्धि परन्तु चिन्ता तथा शत्रुवृद्धि को भी नकारा नहीं जा सकता । तथा उत्तरार्ध में भी सुख, द्रव्यलाभ, व्यापार में वृद्धि तथापि परेशानी तथा शत्रु वृद्धि है । तसर्थ ॐ नमः शिवाय का जाप करे ।
कन्याः (टो. प. पी. पू. ष. ण. ठ. पे. पो.) – कन्या राशिवालों के लिए यह माह मध्यम फलदाय रहेगा । माह के पूवाद्र्ध में धनप्राप्ति लाभ तथा राज्य क्षेत्र में सफलता । वही धर्महानि, पीड़ा तथा शारीरिक कष्ट को नकारा नहीं जा सकता तथा उत्तरार्ध में शोक, रोग, होते हुए भी सुख, धनप्राप्ति तथा कार्यसिद्धि का योग है । तथापि आप के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ लाभकर होगा ।
तुलाः (रा. रि. रु. रे. रो. ता. ती. तु. ते.) – तुला राशिवालों के लिए यह महा मध्यम है । माह के पूवाद्र्ध में पीड़ा, कष्ट, हानि, आर्थिक कमजोरी होते हुए भी सुख लाभ तथा उन्नति होगी । तथा उत्तरार्ध भी सफलतादायक नहीं तथापि सुख तथा नवकार्य थालनी होगी । आपके लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ लाभकर होगा ।




वृश्चिकः (तो ना. नि. नु. नो. या. यि. यु) – वृश्चिक राशिवालों के लिए यह माह मध्यम ही रहेगा । माह के पूवाद्र्ध में व्यर्थ भ्रमण, अधिक व्यय, मनमुटाव होते हुए भी सुख, धर्मरति तथा द्रव्यलाभ होगा । तथा उत्तरार्ध में भी कष्ट, अपव्यय तथा परेशानी होते हुए भी सुखानुभूति होगी । आप के लिए हनुमान चालीसा पाठ लाभकर रहेगा ।
धनुः (य. यो. भा. भी. भू. ध. फा. ढ. भे.) – धनु राशिवालों के लिए यह माह कष्टदायक रहेगा । माह के पुर्वाद्र्ध में क्लेश विपत्ति, हानि, शत्रुवृद्धि तथापि अन्नतः विजय तथा उत्तरार्ध में भ्रमण, द्रव्यलाभ तथा सुखानुभूति होगी । परन्तु अधिक व्यय, आलस्यता, शत्रुवृद्धि होगी । आप के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ लाभकर होगा ।
मकरः (भो. जा. जी. जु. जे. जो. ख. खि. खु. खो. गा. गी) – मकर राशिवालों के लिए यह माह सामान्यतया शुभ फलदायक हैं । माह के पूर्वाद्र्ध में पुत्र सुख, ज्ञानवृद्धि, मानवृद्धि, अभयता, द्रव्यलाभ तथा कार्य में सफलता मिलेगी । तथापि शारीरिक कष्ट, धर्महानि तथा उत्तरार्ध में सुख, ज्ञान–मान वृद्धि तथा विजय होते हुए भी मानसिक परेशानी उठानी पड़ सकती है ।
कुम्भः (गु. गे. गो. सा. सी. सु. से. सो. द.) – कुम्भ राशिवालों के लिए यह माह कष्टदायक है । माह के पूर्वाद्ध तथा उत्तरार्ध दोनों पक्षों में अज्ञात भय, शत्रुभय, मनमुटाव, रोग, परेशानी । परन्तु किञ्चित धनप्राप्ति तथा मानवृद्धि होगी । आप के लिए शिव तथा अनुमान पूजन लाभकर होगा ।
मीनः (दी. दु. थ. झ. ञ. दे. दो. दी. च. ची) – मीन राशिवालों के लिए यह माह मध्यम फलदायक है । माह के पूर्वाद्र्ध में धनप्राप्ति, पुत्र सुख, ज्ञानवृद्धि, व्यापार में सफलता होते हुए भी कष्ट, धर्महानि तथा भय की सम्भावना रहेगी तथा उत्तरार्ध में मानहानि, शारीरिक कष्ट होते हुए भी सुख, द्रव्यलाभ, शिक्षा में सफलता मिलेगी । आप के लिए ‘ॐ वृं वृहस्पतये नमः’ का जाप लाभकर होगा ।

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