राष्ट्रपति ओबामा की हार अश्वेतों की हार:योगेन्द्र प्रसाद साह

राष्ट्रपति बराक ओबामा का कार्यकाल अपने अन्तिम पडÞाव की ओर खिसकता जा रहा है । गोरे लोगों के इतिहास में पहली बार जब २००र्८र् इ. में एक अश्वेत व्यक्ति राष्ट्रपति पद पर विजयी घोषित हुए थे तब विश्व के करोडÞों लोगो को आर्श्चर्यमिश्रति खुशी हर्ुइ थी । शायद इसलिए आनन-फानन में २००र्९र् इ. का नोबेल शांति पुरस्कार अमेरिकी अश्वेत राष्ट्रपति बराक ओबामा को प्रदान करने में पुरस्कार समिति को हिचकिचाहट नहीं हर्ुइ थी । जिस रंगभेदी नीति के कारण कभी अमेरिका में कालो के महान् नेता मार्टिन किंग लूथर जुनियर की हत्या की गई थी उसी देश में एक अश्वेत राष्ट्रपति का वजूद में आना संसार ने शुभ शुरुआत माना था । एक नयाँ मानवीय युग की शुरुआत की सुगन्ध संसार भर के लोगों ने भी महसुस किया था ।
एक अश्वेत राष्ट्रपति आकार में क्यों और कैसे दीखे इसके लिए विश्व घटनाक्रम की समीक्षा जरुरी है । १९४र्५र् इ. के बाद, अमेरिका तथाकथित लोकतांत्रिक मोर्चा का अगुआ बनकर लोकतंत्र को ही, हीन पीडिÞत महादेशो के विभिन्न देश में चुना लगाता रहा । १९९र्१र् इ. में साम्यवादी रुस के विखंडन के बाद श्वेत अमेरिकनो में झुर और हिंसात्मक मनोविज्ञान का चरम उत्कर्षपर्ूव राष्ट्रपति जर्ज डब्लू बुश में देखा गया । इराक का नरसंहार बेमतलब था वही अफगान में नाटो फौज की तैनाती जायज रही । इसलिए बोबिया में चरमोत्कर्षका नायकत्व वाला संगठन अलकायदा, तालिबान, लश्करे-ए-तयबा इत्यादि जेहादी संगठनों से ग्रस्त पृथ्वीलोक को बचाने का अमेरिकी प्रयास भी दोहरे चरित्र की अभिव्यक्ति देता रहा है । इस्लामिफोबिया से उत्पन्न आतंकी हमलो के विश्वव्यापी प्रसार और इसके प्रतिकार स्वरुप अमेरिका का आतंकवाद विरोधी जंगो के कारण उसकी अर्थ व्यवस्था पूरी तरह से राष्ट्रपति बुश के कार्यकाल से ध्वस्त होनी शुरु हो चुकी थी । ‘प्रोडक्शन फाँर मास’ की नीति के विपरीत राष्ट्रपति बुश ने ही गाँधीवादी सिद्धान्त ‘प्रोडक्शन बाई मास’ के सिद्धान्त पर अमेरिकी कृषि में कृषि औजारो के स्थान पर मैन पावर प्रयोग की घोषणा कर दी थी । इन्हीं कारणों की तहज से गोरे जाति के लोगों ने एक अश्वेत व्यक्ति बराक ओबामा को राष्ट्रपति पद पर बैठा कर गाँधीवादी दर्शन का र्समर्थन किया था ।
अब राष्ट्रपति ओबामा के पास वक्त कम है । ७ नवम्बर को सम्पन्न अमेरिकी कांग्रेस और सिनेट के चुनाव में नश्लवाद के हिमायती गोरों ने ओबामा को शिकस्त दे दी है । अतः राष्ट्रपति ओबामा तेजहीन और थके हुए नजर आने लगे हैं । हेल्थ केयर वील द्वारा ओबामा ने अमेरिका को वेलफेयर स्टेट बनाना चाहा है- अब रेसिष्ट जमात उन्हें गोली के तौर पर सोशलिष्ट कह कर उपहास करने लगा है । लेकिन हकीकत यह है कि अगर अमेरिका वेलफेयर स्टेट नहीं बना तब आगे वह विश्व शांति और ‘पृथ्वी बचाओ’ अभियान का नेता नहीं बन सकता है । हाल में ही चीनी राष्ट्रपति हु जिन्ताओ के अमेरिका भ्रमण में उनका व्यक्त विचार काबिले गौर है । उन्होंने कहा था- ‘विश्व में अब २ राष्ट्र मात्र होंगे, एक अमेरिका, एक चीन ।’ यह ठगने वाली बात है । चीन अपनी वर्तमान मुद्रा स्थिति बनाए रखकर अमेरिका के अर्थ व्यवस्था को ध्वस्त करना चाहता है । अगर अमेरिकी जंग का उद्देश्य अर्थ संग्रह के अभ्रि्राय से जोडÞकर सफल होना चाहता है तब अब यह सम्भव नहीं है । गोरे इसका अन्दाजा लगा चुके हैं । अमेरिकी गोरे सिर्फयह चाहते हैं कि अश्वेत राष्ट्रपति को असफल किया जाए और विश्व में नये धु्रवीकरण को गोरा रिपब्लिकन राष्ट्रपति अंजाम तक पहुँचाये । दुनियाँ चाहेगी कि अश्वेत राष्ट्रपति ओबामा असफल और अयोग्य सिद्ध न हो ।
इस प्रकार अब राष्ट्रपति ओबामा को इतिहास में स्थान पाने के लिए तीन समस्याओं के हल करने के लिए दृढ इच्छा शक्ति का पर््रदर्शन करना होगा, जो विश्व को भश्मिभूत करने लगा है । पहला, पृथ्वीग्रह को नष्ट होने से बचाना है, इसके लिए प्रविधि विकास को सभी देश मिलकर करें और जंगल विकास के साथ उनका संरक्षण सख्ती से हो । पृथ्वी लोक को अगर बचाना है तब मुनष्यों की आबादी को ५ अरब पर कुछ वर्षों के भीतर लानी होगी- लक्ष्य ४ अरब का ही होगा । १९२र्०र् इ. तक मुसलमानो की जनसंख्या दोगुण हो जाने का अनुमान है । पाकिस्तान के सरकारी पी.टी.वी. पर होस्ट हाजम खालील बराबर कहते हैं और अन्य विज्ञापन से बोलवाते है कि विश्व का प्रत्येक मुस्लिम युवक रैडिकल हो चुका है, अमेरिका किस किससे और कहाँ, कहाँ लडेगा – उन लोगों की उक्तियों में सच्चाई है । मुस्लिम आतंकवाद खत्म करने के लिए धर्म के आधार पर किसी देश के विखंडन के विरुद्ध यूएनओ को आगे लाना होगा । धर्म और सियासत को जोडÞने से पृथ्वी ग्रह के विनाश में तेजी आयी है । अगर ऐसा नहीं हुआ तब जर्मनी में १४.१%, प|mांस १०.२%, ब्रिटेन में १०.४% मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र की लडÞाइ शुरु होगी । अमेरिका को मुस्लिम अमेरिका बनाने का प्रयास शुरु हो चुका है । इसके लिए मुस्लिम आबादी को तेजी से बढÞाने का सुनियोजित प्रयास हो रहे हैं । एक रोज पी.टी.वी. पर ही ँभमभचब mिष्लष्कतभच फिर दाँस, एक लेडी डाक्टर जहाँ मातृ शिशु कल्याण के हक में परिवार नियोजन को सही ठहरा रही थी- वही बलुच सिनेटर प्रोफेसर इब्राहिम खान आबादी वृद्धि को धार्मिक हक बतला रहे थे । उन्होंने यह भी कहा कि दुनियाँ के निर्माण के लिए मुसलमानों का निर्यात जारी रखना होगा । अतः राष्ट्रपति ओबामा को पाकिस्तान को अणु बममुक्त राष्ट्र बनाने की पहल प्राथमिकता के साथ अमल में लानी होगी । पाकिस्तान से आंतकवादी संगठनो के सफाया का अभियान शुरु करना होगा ।
दूसरा काम ओबामा को जो करना है- वह है भारत को अत्यन्त शक्तिशाली राष्ट्र बनाना । इसका पहल भी पर्ूव राष्ट्रपति बुश ने शुरु किया था । भारत का हजारों वर्षो का उच्च दर्शन उसे हत्यारा राष्ट्र कभी नहीं बनने देगा । बिगडैल राष्ट्र चीन और पाकिस्तान के उग्र हरकतो पर लगाम कसने में भारत उपयोगी राष्ट्र सिद्ध होगा । तीसरा काम है कि अमेरिका को वेलफेयर स्टेट बनाया जाय । अब से अमेरिकी शक्ति का प्रयोग पृथ्वी ग्रह बचाने में लगना चाहिए । इसके लिए भी जंग की जरुरत होगी जो भारत, रुस, युरोपियन मुल्क, जापान इत्यादि देश मिल कर लडेंगे । अगर चीन सम्मिलित हो जाए तब पृथ्वी ग्रह को बचाना आसान रहेगा ।
दुनियाँ का पीडित वर्ग सिर्फयह चाहता है कि मानवता की रक्षा के जंग में ओबामा उदासीन न हो । ओबामा जी सिर्फदृढÞ संकल्प व्यक्त करें और सहयोग दें, बाँकी काम विश्व के लोग खुद कर लेंगे । अभी अमेरिकी नेतृत्व की सख्त जरुरत है, किन्तु गाँधीवादी देश बन कर ही वह नेता बना रह सकता है ।

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