राष्ट्रपति का स्वागत वहिष्कार करना ओली जैसे पूर्व प्रधानमंत्री के लिये अशोभनीय था

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डा. मुकेश झा , जनकपुर ,३ नवम्बर | नेपाली इतिहास एक महत्वपूर्ण क्षण से गुजर रहा है। भले ही आज यह एक साधारण सी बात लगती हो की पडोशी मुल्क भारत के राष्ट्रपति नेपाल आएं हैं पर वास्तविकता है कि नेपाल एक ऐतिहासिक पथ पर है। एक राष्ट्राध्यक्ष और ३ दिन के लिये नेपाल में यह बात काफी महत्व रखती है। शायद ही किसी भी देश का राष्ट्राध्यक्ष इतने लंबे समय के लिये किसी भी देश का भ्रमण किया हो और उसमे भी विश्व का एक शक्तिशाली देश का।

नेपाल को गौरवान्वित होना चाहिये और अपने धर्म संस्कृति पर गर्व करना चाहिये जिसकी वजह से आज भारतीय राष्ट्रपति नेपाल में हैं। नेपाल को इस घड़ी का बहुत ही सही उपयोग करना चाहिये। राजनैतिक रूप से, कूटनैतिक रूप से, अनुभव में एक परिपक्व नेता का साथ तीन दिन के लिए मिलना बड़े सौभाग्य की बात है। इस समय जितना ज्यादा से ज्यादा राष्ट्रपति मुखर्जी के संग का सदुपयोग किया जाय वह नेपाल और नेपाली के लिये अच्छा रहेगा। ऐसा मौका बार बार नहीं आता इसलिये इस विशिष्ट अतिथि को योग्य स्वागत सत्कार होना चाहिए। समझदार के लिये इशारा काफी होता है, परन्तु जो हठी हो, सठ हो उसके लिये न कोई मानमर्यादा, न कोई नीति नियम, न कोई आचार विचार। वह अपने ही ढंग से मनमानी करने में ही अपना बहादुरी समझता है।

वही हाल अभी नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी एमाले का है। अपना ओछापन् को राष्ट्रीयता का पगड़ी समझ कर इस अबसर को दूषित करने पर पूरा पूरा उतारू है। आखिर एमाले प्रणव मुखर्जी के भ्रमण से दुःखी क्यों है ? क्या तीन दिन की सार्वजनिक छुट्टी हुई इसलिये दुखी है ? क्या भारत ने विभेदि संविधान को सही करने के लिए कहा इस लिए दुखी है ? क्या मुखर्जी जनकपुर आ रहे हैं इसलिए दुखी है ? क्या कारण है कि ओली जी, भीम रावल जी जैसे एमाले के वरिष्ट कार्यकर्ता को मुखर्जी का भ्रमण नहीं भा रहा है ? एमाले को यह पता होना चाहिए की भारतीय राष्ट्रपति आध्यात्मिक एवम् सांस्कृतिक यात्रा पर हैं। हमारी संस्कृति और अध्यात्म “अतिथि देवो भव” सिखाता है। अगर दुश्मन भी अतिथि के रूप में आये तो उसे भी स्वागत करना हमारी संस्कृति है फिर भारत से तो हमारा पारिवारिक सम्बन्ध है । फिर इस तरह का वर्ताव क्यों ? बचपना के स्तर का व्यक्ति ही वचपना करे तो क्षम्य हो सकता है।

अपनी संस्कृति को हो धूमिल करने पर लगा एमाले सारा मान मर्यादा को भूल गया और भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित स्वागत कार्यक्रम में नहीं गयें ओली महाशय। इस तरह के ओछा हरकत करके अपने आपको राष्ट्रवादी प्रमाणित किया जाता है ? एमाले का वरिष्ट नेता भीम रावल जी का कहना है कि नेपाल को सार्वजनिक छुट्टी नहीं देना चाहिए । चलिये मानते हैं, लेकिन इस बात की चर्चा अपनों में करना चाहिये, क्योंकि छुट्टी नेपाल सरकार ने दिया है न कि मुखर्जी ने कहा था। स्वागत समारोह वहिष्कार करना ओली जैसे पूर्व प्रधानमंत्री और एमाले के राष्ट्रिय अध्यक्ष के लिये बिल्कुल शोभनीय नहीं था। परंतु वह घटना घट गई, सही हुई या गलत और इसका प्रभाव एमाले के ऊपर कैसा रहेगा इसका विश्लेषण समय करेगा परन्तु अब जो समय बाँकी है इसमें एमाले को अपनी ओछापन छोड़कर उदार बनना होगा। क्यों कि वैसे भी एमाले ने संविधान संसोधन में अड़ंगा लगाकर अपनी छवि विवादित बना रखा है, अगर इसी तरह की वचपना करता रहे तो वह एमाले के लिए ठीक नहीं कहा जा सकता। एमाले को भी आम जनता की तरह ख़ुशी मनाना चाहिए और इस सांस्कृतिक एवम् आध्यात्मिक यात्रा को पूर्ण रूप से सफल बनाने में अपना सम्पूर्ण सहयोग देना चाहिये।

 

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