राष्ट्रपति ने तीनों निकायों के बीच विवाद न बढाने को कहा, निधि ने भी मुहं खोला

presidentकाठमाडौँ, ५ असार । एक और जहाँ सत्ताधारी समर्थको द्वारा सर्वोच्च अदालत पर ही कटु आलोचना शुरू की जा रही है वहीं राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव ने कार्यपालिका, व्यवस्थापिका और न्यायपालिका के बीच सुमधुर सम्बन्ध कायम रखने पर पूरा जोड़ दिया है ।

एकीकृत नेकपा (माओवादी) के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल के साथ आज राष्ट्रपति कार्यालय शीतल निवास में हुई भेटवार्ता में राष्ट्रपति यादव ने संविधान निर्माण, भूकम्प प्रभावित क्षेत्र का पुनःनिर्माण के लिये गठन किएजाने वाले उच्चस्तरीय प्राधिकरण निर्माण लगायत विषयों पर अपनी जिज्ञासा प्रगट की |  राष्ट्रपति यादव नेसंविधान लेखन प्रक्रिया को जल्द से जल्द सम्पन्न करने का आग्रह किया |  राष्ट्रपति यादव ने स्पष्ट रूपसे राज्य के प्रमुख तीन निकायों के बीच में विवाद नहीं बढाने पर जोड़ दिया |  एमाओवादी अध्यक्ष दाहाल ने यह जानकारी दी ।

प्रमुख चार राजनीतिक दल ने संविधान निर्माण में उत्पन्न विवाद को समाधान करने के  उद्देश्य से १६ बुँदे राजनीतिक सहमति किया था | जिसपर विजय कर्ण व्दारा सर्वोच्च में रिट दाखिल किया गया था इसके साक्षी रीता शाह थी | अधिवक्ता दीपेन्द्र झा की तूफानी बहस पर सर्वोच्च अदालत ने शुक्रबार को ही सहमति कार्यान्वयन नहीं कराने का अन्तरिम आदेश जारी कर दिया था । जारीआदेश के तुरन्त बाद ही  प्रमुख चार दलों की बैठक हुई थी जिसमे कहा गया था कि अदालत ने संविधानसभा के कार्यक्षेत्र पर हस्तक्षेप किया है ।

bim.nidhiनिधि भी मुहं खोलें

उधर विराटनगर से प्राप्त जानकारी के अनुसार भौतिक पूर्वाधार तथा यातायातमन्त्री विमलेन्द्र निधि ने कहा है की सर्वोच्च अदालत के अन्तरिम आदेश से चार दलों के बीच हुई १६ बुँदे सहमति में अब गलती सुधरने का अवसर मिला है ।
विराटनगर विमानस्थल पर सञ्चारकर्मी से बात करते हुये कांग्रेस नेता निधि ने खा कि प्रदेश का सीमांकन और नामांकन संविधानसभा के अधिकार क्षेत्र में परता है ।

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