राष्ट्रपति मुखर्जी का भ्रमण से भारत,मधेस और नेपाली सत्ता की रिश्ता मजबूत होगी

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मुकेश झा , जनकपुर, २४ अक्टूबर | जनकपुर अभी जोड़तोड़ से भारतीय राष्ट्रपति श्री प्रणव मुखर्जी का स्वागत करने के लिए लगा हुआ है। हर जनकपुर वासी में उत्साह है क्यों की जनकपुर भ्रमण करने वाले यह तीसरे राष्ट्रपति है। जनकपुर में जनता और प्रशासन एवम् कर्मचारियों द्वारा सफाई अभियान चल रही है साथ ही विभिन्न समितियाँ भी गठन हो रही है। सब लोग इस भ्रमण को भरतीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के भ्रमण का पूरक भ्रमण मान रहे हैं। जनता का यह विश्वास है की राष्ट्रपति मुखर्जी का भ्रमण जनकपुर ही नहीं वल्कि समूचे मधेस के लिए लाभकारी रहेगा।

भारतीय राष्ट्रपति का भ्रमण को मधेसी अपना सौहाद्रता तो प्रदान करना चाहती ही है परन्तु अपना दुःख भी उनके सामने प्रकट करना चाहती है। पिछले साल राष्ट्र द्वारा जो मधेसियों के ऊपर निर्मम नरसंहार किया गया था, जो भी मधेसी के मांग है जिसको नेपाल सरकार आज तक नाजायज ठहरा रही है उसे भी उनके समक्ष प्रस्तुत करना चाहते हैं। पर शंका यह भी बना है कि कहीं ऐसा करने पर मधेसिओं के ऊपर नेपाल सरकार फिर न कोई नया उत्पात शुरू करे। क्यों कि नेपाल सरकार की दुरात्मा प्रवृत्ति से मधेसी जनता भलीभाँति परिचित है। परन्तु जो भी हो जनकपुर वासियों का यह कहना है कि नेपाल सरकार अगर मधेसियों के ऊपर कुछ अन्याय और अत्याचार करती है तो अपना दुःख वह भारत के अलावा किसको सुना सकते हैं ? क्योंकि भारत के साथ मधेसियों का परंपरागत और पारिवारिक रिश्ता है। एक तरफ जनता भारतीय राष्ट्रपति के भ्रमण को ले कर उत्साहित है तो ज्यों ज्यों भ्रमण के समय नजदीक आ रहा है जनमानस में शंका भी बढ़ती जा रही है। क्यों की नेपाली सत्ता ने बारम्बार मधेस के साथ धोखा जो किया है। जनता यह भी सोच रही है कि नेपाली सत्ता कहीं अंतिम समय पर आकर यह भ्रमण न रद्द कर दे। क्यों की नेपाली सत्ता द्वारा यह बारम्बार किया जो गया है। इस देश और शासन के प्रति जनता का यह अविश्वास भले ही सत्ताधारियों के लिए कुछ मायने नहीं रखते हों परन्तु राष्ट्रहित चाहने वालों के लिए गंभीर विषय बना हुवा है।

नेपाली सत्ताधारी अपना निहित और पार्टीगत स्वार्थ पूरा करने के लिए इस तरह देश में जो फूट डालने का प्रयास कर रहें हैं वह विल्कुल ही सही कार्य नहीं है वल्कि ऐसे कार्यको राष्ट्रघात की श्रेणी में रखा जाता है। हमे आशा है की भारतीय राष्ट्रपति जी का भ्रमण सफल हो, जो कि मधेस और सत्ता का जो दुरी बढ़ा है उसको मिटाने वाला हो साथ ही मधेस एवम् भारत के रिश्ता को और भी मजबूती प्रदान करने वाला हो। परन्तु पिछली बार हुई मोदी जी के भ्रमण के समय की तरह अगर सत्ता कोई उल्टा कदम उठाता है तो निश्चय ही वह मधेस और नेपाली सत्ता के बिच के कड़वाहट को और बढ़ाने वाला होगा। अतः सत्ता को भी इस बात पर ध्यान देना चाहिए और मधेस हित को राष्ट्र हित के विपरीत सोचने की जो मानसिकता है उसको त्यागकर मधेस और राष्ट्र का रिश्ता को कैसे मजबूत बनाया जाय इसपर ध्यान देना चाहिए, इसी में सबका कल्याण है।

 

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