राष्ट्रपति व्दारा सहमति की सरकार आब्हान : नयाँ विवाद की सुरुवात

८ मंसिर, काठमाडू, राष्ट्रपति डा. रामवरण ने अन्तरिम संविधान के धारा ३८ (१) अनुसार सहमति के आधार मे नयाँ प्रधानमन्त्री के लिये उमेद्वारी सात दिन के भितर सिफारिस करने का सभी दलों से आह्वान किया है ।
राष्ट्रपति कार्यालयद्वारा जारी विज्ञप्ति मे ‘मंसिर १ गते विहीबार साम ४ बजे तक राजनीतिक सहमति के आधार पर प्रधानमन्त्री का चयन और उनके अध्यक्षता मे मन्त्रिपरिषद् का गठन करने का  उल्लेख किया गया है । विज्ञप्ति मे राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता हरिकुमार श्रेष्ठ का हस्ताक्षर है ।
राष्ट्रपति ने अन्तरिम संविधान का ३६ क. अनुसार के कर्तव्य बोध करके धारा ३८-१) अनुसार इसतरह का आह्वान किया है । जारी विज्ञप्ति मे ०६९ जेठ १४ गते संविधानसभा विघटन के बाद बर्तमान मन्त्रिपरिषद् कामचलाऊ होने का ०६९ जेठ १६ मे ही जानकारी करा दी गयी थी इसका भी स्मरण कराया गया है ।

राष्ट्रपति व्दारा सहमति की सरकार आब्हान करने के बाद अब नयाँ विवाद सुरुवात हो गया है । अन्तरिम संविधान ने ३८ के १ बमोजिम सहमति की सरकार गठन के लिये आब्हान करने का राष्ट्रपति को तो अधिकार दिया है लेकिन उसी उपधारा बमोजिम नही हो सकी तो उपधारा दो के अनुसार संसद से निर्वाचन के लिये प्रक्रिया शुरु करना परेगा । संसद विघठन हो चुका है इस अवस्था मे यह प्रक्रिया ने  संबैधानिक समस्या ला खरा कर दिया है ।
संविधान मे सांसद नही होने वाले ब्यक्ति प्रधानमन्त्री नही होने का ब्यवस्था है । मौजुदा स्थिति मे कोइ भी सांसद है इसलिये कोइ भी प्रधानमन्त्री के लिये योग्य नही है । फिर राष्ट्रपति स्वयं ने जेठ १६ गते बक्तब्य प्रकाशित करके संसद के सदस्य अब कोई नही है कहकर सरकार को कामचलाउ कहा था । इसकारन से भी सरकार गठन मे संबैधानिक संकट है।
अभी के स्थिति मे निकास के लिये एक मात्र उपाय के रुप मे संविधान के धारा १५८मे राष्ट्रपति से संविधान मे देखी गयी बाधा अडकाउ हटाकर आगे बढने का जगह है । और इसके लिये भी मन्त्री परिषद व्दारा सिफारिस आवश्यक परता है । वर्तमान सरकार ने निर्वाचन की घोषणा कर चुकी है इस अवस्था मे क्या ऐसा सिफारिस राष्ट्रपति के समक्ष करगी यह एक गंभिर संकट खडा हो गया है ।

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