राष्ट्रपति शासन भी लग सकता है, रेग्मी के लिये कठिन घडी ।

khilraj_regmi21काठमाडू, १७ चैत ।दलों की आन्तरिक स्थिति क्या है ? ये क्या सोच रहें है ? तथा उनकी रणनीति  क्या है ? कौन चुनाव चाहता है और कौन सा दल इस सरकार को निर्वाचन से ज्यादा बाबुराम भटराई को हटाने मे ही केन्द्रीत था ? असार मे चुनाव कराने की अन्दुरीनी तैयारी दलों मे है या नही ? यह एक अलग प्रश्न हो सकता है। लेकिन बाहिरी दुनियाँ ने यह समझा है  कि यह सरकार असार मे ही निर्वाचन कराने के प्रयोजन से बना है ।

यदि असार मे निर्वाचन नही हो सका तो देश बडा राजनीतिक संकट मे फंस सकता है । रेग्मी सरकार गठन के प्रस्ताव लानेवाले एकीकृत नेकपा माओवादी के अन्दर ही असार मे चुनाव नही हुआ तो आन्दोलन करने का आवाज उठ रहा है ।  असार मे चुनाव नही हुआ तो सडक पर रेग्मी सरकार के विरुद्ध मे आन्दोलन बढ सकता है । विभिन्न शक्ति  जातिवादी से लेकर कमल थापा तक सडक पर आवाज ऊठाने लगेंगे ।

ऐसी अवस्था मे पूर्व प्रशासक मन्त्रीगण, जिनका कोई भी राजनीतिक रंग नही है , उनलोगों को देश सम्हालना मुश्किल पर सकता है । उस समय तक चार राजनीतिक दलों के विच मे भी दडार पर सकता है । इसलिये अगर मंसिर मे चुनाव कराने की सोचाइ मे वर्तमान सरकार है तो वह सरासर गल्ती होगी । अभी तो केवल रेग्मी व्दारा प्रधानन्यायाधीश से राजिनामा देने की माग उठरही है लेकिन असार के बाद सरकार से ही राजीनामा देने की माँग हो सकती है ।

दलों की भी हालत खराब हो सकती है ?

वर्तमान सरकार को असफल होने पर दलों की भी हालत अच्छी नही होगी और फिर कौन सी दल सरकार मे आयेगी यह भी पक्का नही है । एकीकृत नेकपा माओवादी फिर से सत्ता मे आयेगी यह भी नही कहा जा सकता है । क्योंकि माओवादी को सरकार से हटाना रेग्मी सरकार गठन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य था । अब अगर रेग्मी सरकार असफल हुई और देश मे अराजकता फैली तो सैनिक तथा राष्ट्रपति शासन का खत्तरा रहेगा । इसलिये दलों को भी अपना  फाइदा बेफाइदा से उपर उठकर निर्वाचन पर ही ध्यान केन्द्रीत करना आवश्यक दिखता है ।

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