राष्ट्रपति ही निर्वाचन मे बाधक बने : डा. भट्टराई

presidene & baburam bhttraiपुर्व प्रधानमन्त्री  डा. बाबुराम भट्टराई ने कहा है कि चुनाव के लिये देश पहले भी तैयार था और अभी भी है । उन्होने कहा कि अगर राष्ट्रपतिजी व्दारा निर्वाचनसम्बन्धी अध्यादेश और संविधान मे (बाधा अड्काउ फुकाउने) बाधा अबरोध हटाना जारी हो गया रहता तो पिछले मंसिर मे ही निर्वाचन हो गया रहता । और देश अभी तक दुसरा गति वा रास्ता ले लिया रहता । राष्ट्रपतिजी व्दारा अध्यादेश जारी नही करना ही उस पुरे प्रक्रिया वा निर्वाचन का बाधक बना। हमलोगों को निर्वाचन नही करने दिया गया । ऐसी स्थिति मे वर्तमान प्रधान न्यायाधीश के अन्तर्गत चुनावी सरकार बनाकर चुनाव कराने के सिवा और कोई विकल्प सामने नही था । दुसरा किसी को लाने पर विवाद ही था । पुर्व प्रधानमन्त्री भट्टराई ने आगे कहा कि उनकी ही सरकार पुर्णत: संवैधानिक सरकार थी। अगर संवैधानिक को ही गिरा दिया जाता तो देश कहाँ जाता उसका कोई ठेकान नही था । इसलिये सबसे ज्यादा सुरक्षित रास्ता खोजा गया जो अभी है । हमारी पार्टी और मै इसमे सन्तुष्ट हुँ । पुर्व प्रधानमन्त्री  डा. बाबुराम भट्टराई ने किशोर नेपाल व्दारा लिये गये अन्तर्वाता मे यह बात कही है ।

एक और प्रश्न मे कि पुर्व प्रशासक हि क्यों लाये गये जबकि राजनीतिक दल के बडे बडे नेता , देश दुनियाँ समझने वाले दिग्गज व्यक्ति मौजुद थे ?
पुर्व प्रधानमन्त्री ने कहा कि यह सरकार केवल अन्तरिम चुनावी सरकार है। इसका मुख्य काम चुनाव कराना है। यह सरकार दीर्घकालीन असर परनेवाली कोई भी काम नही करगी । इसलिये पूर्व प्रशासक वदारा निर्वाचन के लिये काम चल सकता है। इसको अन्यथा नही लेने से भी होगा ।

क्या लोकमानसिंह कार्की भी विवादास्पद  नही है ? इसके जाबाब मे उन्होने कहा कि उन्हे ऐसा नही लगता है, थोडा बहुत बहस होना स्वभाविक है ।
उन्हे भूतपूर्व मुख्य सचिव और कुशल प्रशासक की छवि प्राप्त है।

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