राष्ट्रीय समावेशी आयोग ऐन२०७३ सम्बन्धी आयोजित विचार विमर्श कार्यक्रम

काठमान्डौ, मंसिर ३० गते

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राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के द्वारा राष्ट्रीय समावेशी आयोग एन२०७३ सम्बन्धी विचार विमर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया । उक्त विधेयक खस आर्य, पिछड़ा वर्ग, अपंग, जेष्ठ नागरिक, श्रमिक किसान, अल्पसंख्यक, एवं सीमान्तकृत समुदाय तथा पिछड़ा वर्ग और कर्णाली में रहने वाले तथा आर्थिक रुप से विपन्न वर्ग आदि के हक हित के संरक्षण और सम्वद्र्धन तथा ऐसे समुदाय के सशक्तिकरण के लिए बनाया गया है ।
कर्यक्रम की अध्यक्षता श्री अनूपराज शर्मा(पूर्व प्रधानन्यायधीश) ने की विशिष्ठ अतिथि प्रकाश वस्ती(पूर्वन्यायधीश एवं आयोग के सदस्य), गोविन्द शर्मा पौडेल(आयोग के सदस्य) की उपस्थिति थी । कार्यक्रम में दो कार्यपत्र प्रस्तुत किए गए । कार्यपत्र प्रस्तुतकर्ता अधिवक्ता दीपेन्द्र झा, और हरि फुयाल थे । कार्यक्रम में साँसदों के अतिरिक्त विभिन्न सघ, संस्था यथा, थारु युवा संगठन, नेपाल कानून समाज, फातिमा फाउन्डेशन, मुस्लिम कमीशन, अपंग संस्थान, नेशनल ट्रेडिंग, तीसरी लिंगी आदि से आबद्ध व्यक्तियों की उपस्थिति थी । श्री विजय कर्ण, कानुलाल थारु, पे्रमलाल थापा, कृष्णमान प्रधान, पिंकु गुरुंग, मोहम्मदी सिद्दीकी, टीका दहाल, गौरीशंकर लाल दास आदि सम्मानित वक्ताओं ने उक्त विधेयक से सम्बन्धित कमी कमजोरियों पर प्रकाश डाला । वक्ताओं के अनुसार विधेयक में उल्लेखित उम्र सम्बन्धि जो४५ वर्ष निर्धारित किया गया है एवं शिक्षा सम्बन्धि जिसमें कम से कम स्नातक होने की आवश्यकता कही गई है, प्रावधानों में सुधार की आवश्यकता मानी गई । साथ ही मधेशी, मुस्लिम, आदीवासी, पिछडे वर्ग आदि आयोग में किस आधार पर सदस्स्यों की नियुक्ति होगी इस की पूरी व्याख्या की अपेक्षा की गई । वक्ताओं का मानना था कि विधेयक में अपंग, जेष्ठ और पिछड़े वर्ग को सही तरीके से सम्बोधित नहीं किया गया है और इसमें सुधार अपेक्षित है । अधिक वक्ताओं का मानना था कि इस विधेयक से जो आयोग बनेंगे उनमें द्वन्द्ध की स्थिति आ सकती है और यह भी कहा गया कि आयोग का निर्माण सिर्फ जागिर खाने का जरिया ना बने बल्कि इसका सही तरीके से उपयोग हो सके ।

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