राष्ट्रीय सरकार के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह खडा करना बेईमानी होगी : अमरदीप मोक्तान

अमरदीप मोक्तान ( लेखक )

अमरदीप मोक्तान
( लेखक )

मई ,२३ काठमांडू | वैशाख २०७२ साल १२ को आए महाप्रलयकारी भूकम्प ने नेपाल को झकझोर कर रख दिया है । आज नेपाल महाभूकम्प के कारण अपने भाग्य के दोराहे पर खडा है एक तरफ महा विपत्ति का विजारोपण तो दुसरे तरफ समृद सुदृढ नेपाल निर्माण करने का सुवर्ण अवसर । महाभूकम्प पश्चात आए राष्ट्रीय विपत्ति का सामना करने के लिए आजकल राष्ट्रीय सरकार की आवश्यकता पर चर्चा जोर शोर से चल रही है । राष्ट्रीय सरकार निर्माण के वहस मे कुछ विष्लेशक तथा पार्टीया इसे बेमौसम की डफली करार दे रहे है लेकिन यथार्थ मे देखा जाए तो महाभूकम्प के कारण गम्भिर रुप से धरासाई नेपाल को संकट से उबारने के लिए राष्ट्रीय सरकार के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह खडा करना बेमानी होगी । राष्ट्रीय सरकार की आवाज क्यो उठ रही है, राष्ट्रीय सरकार का औचित्य और आवश्यकता क्यों ? यदि ऐसी गम्भिर स्थिति मे राष्ट्रीय सरकार के औचित्य पर प्रश्न चिन्ह खडा होता है तो राष्ट्रीय सरकार जैसे शब्द को हमेशा के लिए शब्दकोष से हटा देना चाहिए । काग्रेस, एमाले  राष्ट्रीय सरकार निर्माण के लिए तैयार है ऐसा सोचना मूर्खता होगी, काग्रेस, एमाले तो इस भयंकर त्रासदी का यदि सही ढंग से व्यवस्थापन नही हुआ तो असफलता तथा अपयश का ठिकरा अपने सर फुटने के डर से त्रसित हो कर राष्ट्रीय सरकार का राग अलाप रहे है । माओबादी इसी मौके का लाभ उठाकर यश अपयश की परवाह किए विना अपने खोए हुए जनाधार और विमुख हुए कार्यकर्ता विच अपनी गरिमा स्थापित करने के लिए सत्ता प्राप्ती को आतुर है | तो विगत मे सत्ता स्वाद का रस्वादन से परमानन्द प्राप्त कर चुके मधेसवादी दल लार टपकाए हुए राष्ट्रिय सरकार मे सम्मिलित होने को आतुर है ।
संंकटपूर्ण घढी से गुजर रहे नेपाल को एकताबद्ध करते हुए सही पथ पर अग्रसर करने के लिए एक सशक्त राष्ट्रीय सरकार वर्तमान समय की उच्च प्राथमिकता है लेकिन गम्भिर प्रश्न यह है की राष्ट्रीय सरकार का नेतृत्व और स्वरुप कैसा हो ? राष्ट्रीय सरकार के नेतृत्व सम्बन्ध मे समय समय पर कांग्रेस एमाले के नेता शुशिल कोइराला अथवा के पी ओली के नेतृत्व मे राष्ट्रीय सरकार बननी चाहिए ऐसी बयानबाजी सुनने मे आ रही है यदि राष्ट्रीय सरकार की चर्चा सत्यता मे परिणत होती है और नेतृत्व वही पुराने असफल घिसेपिटे चेहरो की सरकार बनती है तो वह सरकार राष्ट्रीय सरकार नही बल्कि भागवण्डा की सरकार कहना उपयुक्त होगा । याद रहे महाभूकम्प पश्चात सभी कोण से जिर्ण हुए नेपाल को स्वस्थ नेपाल तक पहुचाने के लिए कुशल दुरदृष्टियुक्त स्वच्छ छवि वाले नेतृत्व वर्तमान समय की आवश्यकता है इसलिए राष्ट्रीय सरकार का नेतृत्व चयन करते समय नेपाल के विद्यमान पार्टी से ही नेतृत्व चयन हो ऐसी सर्त विल्कुल नही होनी चाहिए । महाभूकम्प पश्चात नेपाल मे आई विपत्ति सम्पूर्ण नेपालीयो की विपत्ति है और इसकट के समाधान के लिए जो कुशल और स्वच्छ है वैसे नेतृत्व पर सर्वसम्मति से मुहर लगे तो राष्ट्र के लिए हितकर होगा । राष्ट्रीय सरकार के नेतृत्व चयन मे पूर्वाग्रह का कोइ स्थान नही होना चाहिए, राष्ट्र को इस विपत्ति से उबारने के लिए जो उपयुक्त हो उस मजबुत कन्धे पर नेतृत्व भार सौपने मे संकोच नही करना चाहिए । राजनैतिक वृत से नेतृत्व न हो ऐसी बात विल्कुल नही है लेकिन विगत से लेकर वर्तमान समय तक नेपाल के नेताओ द्वारा किए गए घृणित कार्य और असफलता को देखकर नेपाली जनता विद्यमान नेता प्रति सशंकित दिखते है ? संकटपूर्ण घढी से गुजर रहे नेपाल को असफल नेता नही बल्कि वि. पि. कोइराला, गणेशमान सिंह, जवाहर लाल नेहरु, लाल बहादुर शास्त्री, विन्सटन चर्चील जैसे दुरदर्शी, त्यागी, दृढइच्छा शक्तियुक्त राष्ट्रभक्त राजनेता की आवश्यकता है । नेपालक के राजनैतिक पार्टीयो को राजनीतिक दलके आलावा गैर राजनैतिक वृतको नेतृत्व सौपने के लिए इस लिए भी हिचकिचाहट नही होनी चाहिए क्योंकि राष्ट्रीय सरकार का नेतृत्व और स्वरुप ऐसा हो जिसे देखकर नेपाली जनता को भरोसा तथा साथ ही साथ महाविपत्ति जुझ रहे नेपालको सहयोग देने बैठे दातृ राष्ट्रको सरकार की विश्वसनियता पर सन्देह न हो । स्मरण रहे नेपाल मे गैर राजनैतिक वृत के खिलराज रेग्मी के नेतृत्व द्वारा द्वितिय संविधान सभाका शान्तिपूर्ण तथा सफलतापूर्वक निर्वाचन सम्पन्न एवं सत्ता हस्तान्तरण का सफल प्रयोग नेपाली जनता देख चुकी है इसलिए गैर राजनैतिक वृत के नेतृत्व मे राष्ट्रीय सरकार निर्माण पर शंका व्यक्त करना मूर्खता एवं संकीर्णता की पराकाष्ठा होगी ।
महाभूकम्प के प्रलय ने लगभग एक तिहाई नेपाल को तहस नहस और त्रसित बनाया है इसलिए महाभूकम्पीय त्रासदी से नेपाल को संकट से पार उतारना मात्र राजनैतिक दलका दायित्व है ऐसा सोचना गलत होगा, नेपाल के प्राविधिक, बुद्धिजीवि, समाजसेवी, उद्योगपति सभी ने नेपाल के महाविपद का प्रत्यक्ष अनुभव किया है साथ ही साथ नेपाल को इस महासंकट से उबारने के लिए अपने अपने क्षेत्र मे इमान्दारी पूर्वक जोरशोर के साथ प्रयासरत है । राष्ट्रीय सरकार के स्वरुप मे सम्पूर्ण राष्ट्रियता झलकनी जरुरी है क्योंकी राष्ट्रीय सरकार नेपाल को इस महाभूकम्प पश्चात आए महाविपत्ति से उबार कर सफल, सबल, समृद्ध, एकताबद्ध नेपाल निर्माण करने के लिए आवश्यकता महसुस की गई है । राष्ट्रीय सरकार मात्र चर्चा तक ही सिमित नही होनी चाहिए इसे मूर्तरुप देने के लिए सभी क्षेत्र से पहल अत्यन्त जरुरी है । जाति, धर्म, पार्टी, क्षेत्र से उपर उठकर महाभूकम्प से अस्त व्यस्त नेपाल को संकट से उबारने के लिए स्वच्छ, क्षमतावान राष्ट्रभक्त राजनैतिज्ञ अथवा गैर राजनैतिज्ञ क्षेत्र के कुशल व्यक्तित्व के नेतृत्व मे राष्ट्रिय सरकार निर्माण पर सर्वसम्मति से मुहर लग जाये तो निसन्देह नेपाल विगत से सुन्दर, समृद्ध और शान्तिपूर्ण नेपाल के रुप मे स्थापित हो कर रहेगा ।

अमरदीप मोक्तान
डाँडाखर्क, दोलखा

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