रास्ते पर आ रहें हैं उपेन्द्रजी, फिर संविधान पुनर्लेखन चाहिए

काठमांडू | संघीय समाजवादी फोरम नेपाल द्वारा एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करके कहा गया है कि राष्ट्रिय समस्या के समाधान के लिए वर्तमान परिस्थिति में  संविधान संशोधन करने के सिवा दूसरा और कोई विकल्प नही है ।

(हलाकि महेश चौरसिया द्वारा वितरित विज्ञप्ति में किसीका सही नही है | विज्ञप्ति लेटर पेड पर ही है )

विज्ञप्ति में कहा गया है …संघीय गठबन्धन संयुक्त लोकतान्त्रिक मधेशी मोर्चा द्धारा सरकार समक्ष प्रस्तुत किये गये  २६ बुँदे प्रस्ताव के आधार में समानुपातिक समावेशीकरण, राष्ट्रिय पहिचान की मान्यता, समान भाषिक अधिकार के साथ ही प्रदेश की संख्या और सीमाङ्कन लगायत मधेशी, आदिवासी जनजाति, दलित, महिला, मुस्लिम, थारु तथा अल्पसंख्यक एवं सीमान्तकृत समुदाय के साथ सम्बन्धित राष्ट्रिय समस्या की समाधान और सम्बोधन कर के संविधान संशोधन करना पड़ेगा । तत्कालीन परिस्थिति में स्थानीय तह का निर्वाचन में सहभागिता के लिए स्थानीय तह के निर्वाचन से पहले ही संसद में जो पेश किया गया था वह अधूरा और अस्पष्ट संविधान संशोधन विधेयक से अब राष्ट्रिय समस्या का समाधान नही हो सकता इसलिए उक्त विधेयक को अब समस्या का समाधान करने के लिए फिर से परिमार्जन करके संविधान संशोधन एवं पुनर्लेखन करना जरूरी है ।क्योंकि राष्ट्रिय समस्या का समाधान के लिए वर्तमान परिस्थिति में संविधान संशोधन का दूसरा कोई विकल्प नही है ।

 

 

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