राहत सामग्री नेताओं के घरों में मिल रही है

कविता दास कविता दासद्वारा राप्रपा सदस्य कमला शर्मा से देश की वर्तमान अवस्था पर की गई बातचीत का सम्पादित अंश —
० महाभूकम्प के बाद देश की वर्तमान अवस्था के विषय में आप क्या कहेंगी ?
– महाभूकम्प से अभी देश पूरी तरह से आहत है इसमें राजनैतिक पार्टी अपनी राजनीति खेल से जनता को पीड़ा दे रही है । अभी जो भूकम्प आया है और इससे जो कठिनाइयाँ आईं हैं उसे छोड़ राजनैतिक पार्टी पावर शेयरिंग की बात कर रहे हैं जो की उचित नहीं है । अभी का वक्त

कमला शर्मा

कमला शर्मा

यह सोचने का है कि कोई बड़ी या छोटी पार्टी नहीं है इस दुःख के समय में यह जरूरी है कि सब मिल कर इस विपत्ति की घड़ी में साथ आगे बढें. अभी जनता पूरी तरह से पीडि़त है अभी उनके बारे में सोचना चाहिये, और आगे आना, साथ खड़ा होना और मदद का हाथ बढ़ाना चाहिए. न की पावर सेयरिंग की बात पर जोर देना चाहिए.
० आपकी पार्टी नेपाल की चौथी बड़ी पार्टी है फिर भी इसकी स्थिति कमजोर दिख रही है क्यों ?
– जी हाँ राष्ट्रीय प्रजात्रन्त्र पार्टी नेपाल की चौथी बड़ी शक्तिशाली पार्टी है पर हमें दूसरे दल छोटे दलों में गिनते हैं हमे पीछे रखते हंै और अहमियत नहीं देते । पर हमें लगता है कि हम आपने दायित्वों से पीछे नहीं है बल्कि हम आगे ही बढ़ रहे हैं ।
० देश अभी जिस संवेदनशील वक्त से गुजर रहा है उसमें आपकी पार्टी की क्या भूमिका रही ?
– राज्य से हमें कुछ प्राप्त नहीं हुआ है फिर भी हमसब अपने ही पहल से बहुत कुछ कर रहे हैं । महाभूकम्प से जो लोग त्रासदी में है हम उनकी सहायता कर रहे हैं । और हम संतुष्ट हैं कि हमने देश की इस आपदा में भरपूर सहयोग किया है । हमने किसी का इंतजार नहीं किया अपनी पूरी कोशिश हमने पीडि़तों की सहायता में लगा दी । दोलखा, नुवाकोट, काठमान्डौ आदि जगहों पर हमने पार्टी की ओर से लगभग बीस लाख का सहयोग दिया है । भले ही आपदा की दृष्टिकोण से राशि छोटी लगे पर राप्रपा ने पूरी कोशिश की कि वो पीडि़तों के दुख में उनके साथ रहे । परन्तु सरकार अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह नहीं कर पा रही है । इसका हमें दुःख है । लोग डरे हुए हैं । सरकार की ओर नजरें लगाए बैठे हैं । पर उन्हें कुछ प्राप्त नहीं हो रहा है । सरकार को जनता के प्रति समर्पित होना चाहिए था परन्तु ऐसा हो नहीं रहा है । जो अप्रिय घटना होनी थी वह तो हो चुकी हजारों लोग मारे गए लाखों लोगों के घर बिखर गए, पर जो अभी बचे हैं और जिनको जरूरत है मदद की उनको सेवा देना आवश्यक है । अभी भी घर से बाहर निकलते वक्त लोग रास्ते में चलने से डरते हैं कि कहीं कोई मकान गिर कर बड़ा हादसा न हो जाये इसपर सरकार की निगाहे नहीं है । इन सब बातों पर गौर करने की जरूरत है ।
० राहत सामग्री के व्यवस्थापन में सरकार असफल मानी जा रही है, आप क्या कहेंगी ?
– भूकम्प के बाद पर्याप्त राहत देश में आई है किन्तु राहत सामग्री का भी राजनीतिकरण किया गया है । आज जिस के पास सत्ता शक्ति है उसे ही राहत आसानी से प्राप्त हो रही है, और जो आम जनता है जिसके पास पहुंच नहीं है, उन्हें अभी भी परेशानी झेलना पड़ रहा है वो आज भी राहत सामग्री से वंचित हैं । आप सबने भी पढ़ा ही होगा कि राहत सामग्री नेताओं के घरों में मिल रहे हैं । राहत सामग्री को बेचा जा रहा है । नेताओं के यहाँ से पाल और अनाज मिल रहे हैं । इसी से समझ सकते हैं कि सत्ता के मद में चूर नेता कितने अनैतिक हो गए हैं । जनता आज भी खुले में रहन रहे हैं । उन्हें खाने के लिए नहीं मिल रहा है । मानिटिरिंग की जरूरत है । सरकार सारा काम स्वयं करना चाह रही है जिसकी वजह से यह सब हो रहा है जबतक कार्य का विभाजन नहीं होगा यह अव्यवस्था तब तक रहेगी ।
० ऐसे समय में सभासदों की कैसी भूमिका होनी चाहिए थी ?
– सभासद जनता के प्रतिनिधि होते हैं । जनता के सुख और दुख से उनका सम्बन्ध होता है । किसी भी आपदा में उनकी भूमिका अभिभावक की होती है । इसलिए उनकी भूमिका अहम होती है । सरकार को एक क्षेत्रिय संगठन बनाना चाहिए था । जिससे सभासद अपने अपने क्षेत्रों में जाकर पीडि़तों से सीधा जुड़ सकते थे । डाटा इक्ट्ठा कर सकते थे । पर सभासदों को किनारा किया जा रहा है जो सही नहीं है ।
० संविधान निर्माण में आपकी क्या भूमिका है ?
– संविधान निर्माण के कार्य में हमारी पार्टी भी लगी हुई है । वैसे हमारी पार्टी का अलग मत है । हम हिन्दू राज्य की माँग कर रहे हैं, संवैधानिक राजतंत्र की माँग कर रहे हैं । हमारा देश बहुत छोटा है ऐसे में संघीयता को लेकर चलना मुश्किल है । जनता संविधान चाहती है और हम इसमें बाधक नहीं बनना चाहते हैं । परन्तु सरकार की ओर से हमें नजरअन्दाज किया जा रहा है । जनता तय करेगी कि उन्हें क्या चाहिए । पर जनता की भावनाओं का भी ख्याल नहीं रखा जा रहा है । हमारी सिर्फ एक मांग है कि हिन्दू राष्ट्र की घोषणा हो । सत्ता सभासदों को कठपुतली बनाए हुए है । उन्हें महत्व नहीं दिया जा रहा है । सभाभवन से अधिक होटलों और रिसोर्ट में होने वाले बैठकों को अधिक महत्व दिया जा रहा है । कल तक जो एमाले ५ और ६ प्रदेश पर अड़े थे वे अचानक ८ प्रदेश पर सहमत हो गए । बस यह मानिए कि भूकम्प के नाम पर इनकी मनमानी चल रही है और ये उसी के बहाने अपने अपने स्वार्थ सिद्धि करने में लगे हुए हैं ।
० अंत में जनता के लिए कोई संदेश ?
– जनता से मैं यही कहूँगी कि आपदा के इस बेला में संयम और धैर्य ना खोएं । इस विपत्ति में साथ चलें और सरकार अगर गलत है तो उसका विरोध करें । अपने अधिकार की माँग करें । धन्यवाद ।

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