रिश्वत में अब रुपये नहीं, रिचार्ज कार्ड

जहाँ इच्छा वहाँ उपाय की तरह जिले में कार्यरत दर्जनों सेवा प्रदायक सरकारी निकाय में वर्षों से चली आरही घूस लेकर काम करने की परम्परा अब नगद की जगह रिचार्ज कार्ड के रुप में उभर कर सामने आयी है।
बाँके जिला में स्थापित जिला प्रशासन, नापी, यातायात, भूमि सुधार जैसे सेवाप्रदायक सरकारी निकायों में घूस की जगह मोबाईल रिचार्ज कार्ड लेकर काम करने के सिलसिले का खुलासा तब हुवा, जब रुपए की जगह कर्मचारियो ने बाहर से रिचार्ज कार्ड लाने की बात कही।
‘मैं तो सौ रुपये खुल्ला लेकर जिला प्रशासन में गया था, लेकिन कर्मचारी ने रिचार्ज कार्ड लाने की बात कही और मुझे खरीद कर देना पडा’, खजुरा निवासी सन्तोष कुमार सोम ने हिमालिनी को बताया।
सरकारी सेवा प्रदायक निकाय की यह विडम्बनापर्ूण्ा रिश्वत लेने की लत वर्षों पुरानी है लेकिन रुपये को रिचार्ज कार्ड के रुप में लेना निहायत ही लज्जास्पद है। सरकारी निकाय में सेवा लेने से पहले ही रिचार्ज कार्ड लेकर जाना पडÞता है, क्योंकि नगद अब लेने में कर्मचारियोंको खतरा महसूस होता है -नेपालगंज निवासी सन्दीप बर्मा ने बताया।
बर्मा ने बताया कि पहले कर्मचारी सीधे रुपये ही असूली करते थे लेकिन जनता में जागरुकता का दौर है। लोग अख्तियार दुरुपयोग को खबर करते हैं, कभी फेसबुक और पत्रकारों को, इसलिए रुपये लेने में खतरा है और रिचार्ज कार्ड को सामान्य रुपसे लिया जा रहा है।
रिचार्ज कार्ड के चक्कर में शहरी से ज्यादा ग्रामीण जनता परेशान है, क्योंकि अधिकाँश लोग मोबाईल के बारे में ही नहीं जानते तो रिचार्ज कार्ड उनके लिए नई समस्या है। मालपोत कार्यालय में जमीन खरीद बिक्री सम्बन्धी काम में कई दिनों से मालपोत कार्यालय का चक्कर लगा रहे होलिया के विनोद चौरसिया ने हिमालिनी को बताया कि सरकारी राजश्व के नाम पर ६ सौ रुपये खर्च हुए जबकि रिचार्ज कार्ड में १४ सौ रुपये देना पडÞा।
मैने तो कार्ड देने में किसी किसिम की कोताही नहीं की तब भी ४ दिन लग गया, अगर नहीं देता तो काम ही नहीं हो पाता। चौरसिया ने बताया, नया-नया बहाना और समस्या बताकर सिर्फजनता को परेशान किया जाता है कि उनसे कुछ असूली हो सके।
सरकारी निकाय में रिश्वत के रुप परिवर्तन होनेकी खबर पर गम्भीर आपत्ति प्रकट करते हुये लम्बे अर्सर्ेेे भ्रष्टाचार उन्मूलन पर काम कर रहे बागेश्वरी असल शासन क्लब नेपालगंज के निर्देशक नमस्कार शाह का कहना है- रिश्वत का रुप परिर्तन कर काले लोग छिपने की कोशिश कर रहे हैं, रिश्वत लेने की मनोवृत्ति और पकडÞे जाने का डर ब्याप्त हो जाने के कारण बचने का उपाय मात्र है रिचार्ज कार्ड।
इससे जनता ही नहीं सरकार भी प्रभावित होगी, अगर समय पर इस ब्यवस्था को नेस्त-नाबूद नहीं किया गया तो इसका असर और भी घातक हो सकता है क्योंकि भ्रष्टाचार एक क्यान्सर है -निर्देशक शाह ने हिमालिनीको बताया।
सरकारी निकाय में किसी तरह की सेवा अर्थात् काम करने के एवज में नजराना के रुप में वर्षों से लोग कर्मचारियों को बेहिसाब रिश्वत देते आ रहे हैं जिसका कहीं किसी किसिम का लेखाजोखा और हिसाब नहीं है।
वषोर्ं पुरानी इस परम्परा में जमीन किसी और की और मालिक कोई और जैसी घटनाएँ भी मालापोत नापी और भूमि सुधार जैसे कार्यालय में नई बात नहीं है, काम की ग्राहृयता और मूल्य के आधार पर रिचार्ज कार्ड की संख्या और उसका मूल्य बढÞ जाया करता है, विश्लेषकों की मानें तो समय पर अगर इस समस्या पर पर्ूण्ा विराम नहीं लगाया गया तो यह विकराल रुप ले सकती है।
मुलुकी ऐन भ्रष्टाचार निवारण ऐन में नगदी ही नहीं जिन्सी अर्थात् किसी सामग्री का स्वार्थपर्ूण्ा लेनदेन को भी रिश्वत बताया गया है। सेवाग्राही से रिश्वत के रुप में रिचार्ज कार्ड की असूली के बारे में आपत्ती जताते हुये बाँके के प्रमुख मालपोत अधिकृत मदन भुजेल ने कहा- यह घटना तो मैं पहली बार सुन रहा हूँ।
भुजेल ने बताया कि इस किसिम की घटना अगर है तो उसे तुरुन्त रोकने की जरुरत है क्योंकि रिचार्ज कार्ड हो या रुपया दोनों ही घूस है लेकिन रिचार्ज कार्ड देने और लेने में कठिनाई नहीं होती इसलिए इस का प्रचलन सामने आया है। इस विषय पर आवश्यक जाँच कर सम्बन्धित कर्मचारियों पर भुजेल ने कारवाही का आश्वासन भी दिया।
भुजेल ने कहा- लोग अपने स्वार्थ के कारण ऐसे क्रियाकलाप को अन्जाम देते हैं। लेने और देनेवाले दोनो चुप रहते है तो फिर कारवाही किस पर किया जाय –
सरकारी नियम के मुताबिक सवारी चालक अनुमति पत्र बनाते समय करिब १२ सौ रुपये खर्च होते हैं लेकिन गंगापुर निवासी त्रिभुवन यादव ने यातायात कार्यालय में बिना रसीद १ हजार का रिचार्ज कार्ड और २ हजार रुपये नगद देने की हैरानीपर्ूण्ा बात बताई।
सूत्रों के मुताबिक कर्मचारियों के द्वारा इस तरह संकलित किया गया रिचार्ज कार्ड सरकारी कार्यालय के आस पास रहे दुकानों पर सौ रुपये का रिचार्ज कार्ड ७०/८० के भाव में ही बिक्री कर दिया जाता है, और इस तरह दुकानदारों को भी मोटा कमिशन मिलता रहता है।
नाम गोप्य रखने की शर्तपर एक दूकानदार ने हिमालिनी को बताया कि जल्दबाजी में कभी कभार हम लोग सौ का माल पचास रुपये में ही ले लेते हैं। कर्मचारी जब बिक्री करने आते हैं तो हम कहते है कि अभी नहीं लेंगें और वह अपना मूल्य घटाकर बिक्री कर देता है।
दुकानदार ने बताया कि दैनिक लगभग १० हजार रुपये का रिचार्ज कार्ड बेचता हूँ और उसमंे २/३ हजार का रिचार्ज कार्ड शाम को वापस भी मिल जाता है। रिश्वत में दिए जानेवाले रिचार्ज कार्र्डों में कम्पनी की बाध्यता नहीं होती है। नेपाल का कोई भी रिचार्ज कार्ड रिश्वत में अनिवार्य बताया गया है।
रिश्वत के इस तरह के रूप को जिला प्रशासन कार्यालय बाँके के प्रशासकीय अधिकृत बसन्त कनौजिया ने भी नया बताया। उनका कहना था- यह नितान्त ही नयी ब्यवस्था है, ऐसा मैने पहले कभी न देखा, न सुना।
कनौजिया ने कहा जिला के सभी सरकारी कार्यालय से भ्रष्टाचार और अनियमितता उन्मूलन करना हमारा कर्तब्य है लेकिन कर्मचारी और स्रोत साधन के अभाव में आवश्यकता अनुसार पहल कदमी नहीं हो रहा है।
हर महिने में ग्रामीण क्षेत्र तथा शहरी क्षेत्र में स्थापित विभिन्न सरकारी गैरसरकारी निकाय का अनुगमन करने की जानकारी देते हुए कनौजिया ने बताया- जनता की शिकायत आने पर हम किसी भी समय चौकसी रखने के लिए तयार हैं।
कनौजिया ने कहा- रिचार्ज कार्ड का मामला पहला और नया मामला है इस सम्बन्ध में आवश्यक जानकारी लेकर कानूनी प्रक्रिया आगे बढÞायी जाएगी।
सरकार के कर्मचारी जैसे भी हों, उनको परेशान करने का तरीका कितना भी जटिल क्यों न हो, लेकिन परेशानी से बचने की दवा रिश्वत नहीं सिर्फकानून और प्रशासन ही है।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz