रीतिक काण्ड ने बदली सी के राउत को मधेशीयत मे, हिन्दूस्तान टाइम्स मे छपी अन्तरवार्ता से मची हलचल

कैलाश महतो,परासी, वीरगंज, २९,जनवरी |

२६ जनवरी के दिन हिन्दूस्तान टाइम्स छपे डा. सी के राउत की अन्तरवार्ता ने नेपाल के शासक और प्रशासक दोनो को हिला देने की खबर है । अजीबो-गरीब उहापोह मे फसे नेपाली शासक अपना गुस्सा भारत पर झारने की भी खबर है । प्रशांत झा द्वारा लिया गया डा. राउत की अन्तर्वार्ता हिन्दूस्तान टाइम्स मे छपना भी भारतीय षडयन्त्र ही मानती है नेपाली शासन ।

CK Raut

डा.सी.के. राउत

कल्ह ही सामाजिक सन्जाल के एक समाचार मे यू. के. मे रहने बाले एक डाक्टर ने अपने लेख मे स्पष्ट किया है कि पृथ्वीनारायण शाह ने नेपाल का ही नही, अपितु हिन्दूस्तान का निर्माण की बात की थी । लेकिन उनके वंस के शासको ने नेपाल को हिन्दूत्व की क्रुर चक्र मे पृथ्वीनारायण शाह के अनुसार ही फसाकर नेपाल का साम्राज्य का भी निर्माण कर लिया । लेखक डाक्टर श्रेष्ठ दावा यह भी किया है कि पृथ्वीनारायण शाह ने कोई देश निर्माण या एकिकरण का काम नही किया है । उनका तर्क है कि शाह ने तो केवल २२सी २४सी राज्यो को हडपा है, जिस मे मधेश होने की कोई प्रमाण नही है । तकरीबन ६०० राज्यो को एक करने बाले अङ्ग्रेजो को तो भारतीय लोगो ने स्विकार ही नही किया और उन्हे भारत से खदेर दिया गया । क्योंकि वे अत्याचारी थे, शोषक थे और लुटेरे थे । हिटलर जर्मनी के होने के बाद भी जर्मन लोग उनसे नफरत करते थे और उनके समाप्ती पर लोगो ने खुशिया मनायी थी और राहत की शास ली थी । लेकिन पृथ्वीनारायण शाह ने तो अपराध ही अपराध कीया है । तुलनात्मक रूप से अङ्ग्रेजो से कयी गुणा ज्यादा अपराध शाह ने की थी तो उन्हे ससम्मान राष्ट्र निर्माता मान लेना समस्त मधेशी, आदिवासी, जनजाति, अल्पसन्ङ्ख्यक लोगो की मान हानी होगी ।

कुछ पत्रकार इस प्रश्न के साथ हमेसा दिखायी देते है कि नेपाल का पहला राष्ट्रपती और उपराष्ट्रपती मधेशी रहे, नेपाल के शासन सत्ता मे मधेशियो की अच्छी उपस्थिती रही है, आदि, इत्यादी । उन पत्रकारो से यह भी निवेदन है कि वे यह भी समझे कि मधेशी सत्ता मे जरूर रहे है, लेकिन शासन उनसे कोसो दुर रही है । शासन मे कोई बदलाव नही रहा ।

राष्ट्रपती रहे डाक्टर रामबाराण यादव भले ही कुछ नही बोले हो, लेकिन वे नेपाली सेना के परमाधिपती होने के बावजुद वे उस पद की गरीमा को दुरूप्योग तो क्या, सदुपयोग तक नही कर पाए । उनके जानकारी के बिना नेपाली सेना नेपाल सरकार के काम मे तथा मधेशियो के उपर त्रासदीपूर्ण अत्याचार फैलाने के लिए बन्दुक के साथ मधेश मे निकल जाती थी । आज भी उनके आवास के लिए कोई कानुनी व्यवस्था नही हो पायी है । घर भाडा तिरने की किल्लत हो रही है । उप राष्ट्रपति तो खुद स्वीकार कियें हैं की वे सिलिंडर लेने के लिए लाइन में लगने की नौवत है |

हाँ, कुछ मधेशियो ने गैरकानुनी सम्पती कमायी होगी । मगर मधेश की आम्दानी के तुलना मे कुछ नही । जो मधेशी ९२% – ९४% राजस्व देता है, उसमे दो चार मधेशी नेता कुछ कमा ले तो नेपाली शासको की पैनी नजर वहाँ पर चली जाती है । मगर सारा मधेश को लुट कर पहाडियो की वस्तियो मे ले जाना अपराध नही माना जाता । हा, मधेशी नेता यह गल्ती जरूर करते है कि उन नेपालीयो के साथ मिलकर मधेश मे अत्याचार को बढाबा देने मे लगे है ।ck2

कुछ लोगो का यह मानना है कि यूरोप व अन्य महाद्विपो के तरह नेपाल से मधेश अलग नही कर सकते । क्यूकी सन १९७१ से एशिया मे देश टुटने का कोई इतिहास नही है । तो इस का जबाव हम इस तरह से क्यू नही खोज कर लेते है कि : इन्सान तब ही डाक्टर के पास इलाज के लिए जाता है, जब उसे बिमारी हो जाती है । और इलाज पाने का उसका जन्मसिद्ध अधिकार है । दुसरी बात, एशिया मे मधेश के अलाबा पृथ्वी का कोई भी भाग अब उपनिवेश नही रह गया है । और जब उपनिवेश है तो उससे मुक्त होना भी औपनिवेशिक समुदायो का जन्मजात अधिकार है । १९७१ के बाद ही क्यू न हो, मधेशियो में चेतना बढना कोई अपराध नही है । मधेशियो की इस चेतना को विश्व के समस्त राष्ट्र और सरकार सम्मान करेगी ।

हिन्दूस्तान टाइम्स मे आए डा- सि के राउत के अन्तरवार्ता से नेपालीयो मे जो हलचल मची है, वह स्वाभाविक है । वे गालीया देते है, वे इस मुहीम को असम्भव कहेङ्गे । उनका यह भी कह्ना स्वाभाविक है । वे तो मधेशियो का जीना भी असम्भव ही कहेङ्गे, मधेशी मधेश के ही होना भी असम्भव ही कह्ते है तो क्या हम जन्म लेना छोड दे ? हम जिना छोड दे ? हम मधेश मे रहना छोड दे ?

वैसे भी शासको के लिए हर विद्रोह गलत होता है । हर आन्दोलन असम्भव ही रहा है । राणाओ ने २००७ साल के आन्दोलन को असम्भव कह दिया । पन्चायत ने २०४६ के आन्दोलन को असम्भव बोला था । ज्ञानेन्द्र ने लोकतान्तृक आन्दिलन को देशद्रोहीयो का आन्दोलन कह डाला और मधेश आन्दोलन को भी असम्भव ही नाम दिया गया तो क्या शासको के असम्भव बोल देने भर से कोई आन्दोलन की सफलता मे कोई रूकावट आई है क्या ?

मधेश आन्दोलन किसी देश को तोडने के लिए नही, अपितु अपने देश मधेश को पूनर्प्राप्त करने  के लिए, मधेश देश को पूनर्निर्माण कर्ने के लिए कर रहे है हम । मधेश से उपनिवेश अन्त करने ने तथा अपने मधेश देश को अजाद करने के लिए हम आन्दोलित है । नेपाल से हमारा कोई लेनी देनी नही है । वह हमारा पडोसी देश है ।

डा- राउत के तरह ही आज मधेशी लाखो लाखो के सख्या मे नेपाली होने से इन्कार कर रहे है । आज वे नेपाली होने मे लज्जाबोध करते है । जैसे रितिक रोषण काण्ड ने डा सि के को नेपाली से मधेशी बना दिया । वैसे ही छे महिनो के मधेश आन्दोलन ने, नेपालगन्ज, भैरहावा, बेथरी, बेलहिया, टिकापुर, फुल्जोर, नवलपुर, भारदह, जलेश्वर, इटहरी आदी के मेपली क्रुर दमन तथा हत्याओ ने मधेशियो को नेपाली से मधेशी बना दिया है ।

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