रेग्मी ने कहा, ‘अभी के अवस्था मे प्रधानमन्त्री नही बनेगें,चार दल संसोधन के लिये तैयार।

काठमाड, ८ फागुण । प्रधानन्ययाधिश खिलराज रेग्मी ने चुनावी सरकार का नेतृत्व करने के लिये कुछ सर्त रखा है । दलों व्दारा सहमति के नजदिक पहुँचने से पहले सर्त के बाद स्थिति कुछ जटिल बन गयी है ।
सुत्र के अनुसार  प्रधानन्यायधिस ने तीन महिना मे अगर निर्वाचन नही हो पाई तो दोबार फिर से चुनाव कराने के लिये उन्ही के नेतृत्व वाली सरकार को जिम्मा देने का सर्त रखा है । इसके अलावा प्रधानन्यायधिस ने नेतृत्व लेने से पहले और कई सर्त भी रखा है लेकिन ये सर्त क्या क्या है यह अभी सार्वजनिक नही हो पाया है । आज प्रधानमन्त्री डा बाबुराम भट्टराई के साथ हुई बातचित मे प्रधानन्यायधिस ने निर्वाचन अगर नही हो पायी तो उन्ही के नेतृत्व व्दारा फिर से कराने का सर्त राखा है ऐसि जानकारी मे आइ है ।

प्रधानन्यायाधीश खिलराज रेग्मी ने दलों व्दार सोमबार को हुइ सहमति के अनुसार वे अन्तरिम मन्त्रिपरिषद् के अध्यक्ष होने मे अनिच्छा दिखाइ है । प्रधानमन्त्री डा बाबुराम भट्टराई से मंगलबार को हुइ भेट मे प्रधानन्यायाधीश रेग्मी ने दलों के बीच विवादित अवस्था मे वे कार्यकारी की जिम्मेवारी नही ले सकने की बात बतायी है ।

“कुछ विषय दलों के बीच ही नही मिल पायी है”  “ऐसी अवस्था मे मेर व्दारा नेतृत्व लेना मेरे लिये हीघातक हो सकता है । पहले विरोध मे रहे दलों को भी सहमति मे लेकर सभी विषय मे सहमति करना पडेगा ।” रेग्मी का कथन उल्लेख करते हुये स्रोत ने कहा ।
भेट के बाद प्रधानमन्त्री भट्टराई ने रेग्मी की अनिच्छा के बारे मे एमाओवादी अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड को भी बि्रफिङ कर दिया था । स्रोत के अनुसार प्रचण्ड ने भी राष्ट्र व्दारा दिया गया जिम्मेवारी लेकर कुशलतापूर्वक निभाने के लिये हम तैयार हैं लेकिन उससे पहले दलों के बीच सभी विषयों प्रष्ट होना चहिये” रेग्मी ने कहा है ।

प्रधानन्याधिस व्दार नही मानने पर ९ बुदे संसोधन के लिये चार दल तैयार ।

प्रमुख दल के कार्यदल व्दारा तैयार किया गया ९ बुँदे सहमति का दस्तावेज मे रखा गया कुछ प्रावधान मे प्रधानन्यायधिस खिलराज रेग्मी के असन्तुष्टि के बाद प्रमुख चार दल उसमे संसोधन के लिये तैयार हो गया है ।

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