रेल गाड़ी छुक, छुक, छुक, ओली महाशय ! चांद पर जाने का ख्वाब मत दिखाइए

बिम्मीशर्मा,काठमांडू,१६ मई |

अब यह देश भी आने वाले ५ वर्षो में रेलमय हो जाएगा । ऐसा मैं नही इस देश के अ“दूरदर्शी” और दुर्भाग्य के विधाताश्री श्री श्री १००८ स्वामी केपीओली महाराज ने फरमाया है । चूंकि सत्ता अभी श्री केपी ओली महाराज की मूठ्ठी में है इसीलिए वह जो चाहे बोल सकते हैं । सत्ता की चाशनी में आकंठ डूबे होने के कारण केपीओली बाबा की जीभ भी रेल की तरह सरपट दौड़ रही है ।

Xinshisu

गत बुधवार को चीन से सामान ले कर नेपाल के लिए रेल रवाना हो चुकी है । पर अभी तक वह कहां पहुंची और कबतक राजधानी प्रवेश करेगा यह भी किसी को नहीं पता । पर उसी दिन से सब सोते उठ्ते, बैठते और जागते बस रेल का ही सपना देख रहे हैं । लोगों की नींद भी रेल की ईंजन की आवाज से ही खुलने लगी है । यथार्थ मे यह देश कब तक रेलमय होगा नहीं कह सकते पर सभी के सपने में रेल ने धड़धड़ाते हुए प्रवेश कर लिया है ।

अबतो हृदय कि धड़कन की जगह रेल ही धड़कने लगी है । कहीं शरीर की नसों मे भी खून की जगह रेल ही सरपट न दौड़ने लगे । देश के सारे सड़क संजाल खस्ता हाल में है । उस को मर्मत करने या नयां बनाने की योजना नहीं बनती । बस सेवा भी उतनी ही गयी गुजरी है । जिस में सवार होने पर गर्भवती महिला का प्रसव उसी बस में होना कोई दुखदायी बात नहीं है । कोई बीमार इंसान इस बस में चढ़ कर अस्पताल की जगह स्वर्ग पहुंच जाए तब भी किसी को अचरज नहीं होगा ।

उसी खस्ता हाल और लेट लतीफ बस सेवा को ठीक ढंग से चला कर भी देश के नागरिको कों सन्तुष्ट किया जा सकता है । पर नहीं इतना झमेला क्यों करेंगे ? हरेक आर्थिक वर्ष के अंत मे मर्मत के नाम पर सड़क कि छाती को ईन्जिनियर और ठेकेदार पैसे का विक्स लगा कर उसको खांसने से रोकते जरुर हैं । पर देश की सड़क को वर्षो से लगी हुई “टिबी” की बीमारी को इलाज करके हमेशा के लिए ठीक करने से गुरेज करते हैं । और बस की सौतन के रुप में नई नवेली रेल सेवा को देश में लाने के लिए बेताब हैं । लगता है रेल कि लीक हवा में ही बन जाएगी और देश मे रेल सेवा शुरु हो जाएगी ।

बचपन में हमलोग जैसे रेल गाड़ी छुक, छुक, छुक कर के एक दूसरे को रेल का डिब्बा बना कर खेलते थे । पिएमओली को भी इस बुढ़ापे में वही खेल खेलने का मन कर रहा है शायद । बच्चो वाली छुक, छुक रेल खेलने के लिए उन के मंत्री मंडल के सदस्य ही काफी है । और नेकपा एमाले के नेता और कार्यकर्ताओं को भी इस में शामिल कर ले तो यह विश्व का सबसे बड़ा खिलौना रेल बन जाएगा । बेचारे पिएम ओली बचपन में रेल गाडी छुक, छुक, छुक वाला खेल खेलने के लिए तरस गए थे । इसी लिए बुढ़ापे में उसी सुख का मजा ले रहे है । “जोरु न जाता अल्लाह मियां से नाता ” वाला इंसान वही करेगा जो ओली कर रहे हैं । अब जोरु तो है जाता यानी बच्चे नहीं है । दुसरों का बच्चा देख कर या खिला कर कितना संतुष्टी लेगें सो खुद ही बच्चा बन कर बच्चे जैसा बचपना कर रहे हैं ।

देशवासियों को रेल का इतना बड़ा हव्वा दिखाया गया है कि रेल न हो कर यह अंतरीक्ष से उतरा हुआ कोई एलियन हो जैसे । चीन से सामान ले कर नेपाल के रेल जब से रवाना हुई है तब से हमलोगों ने रेल के बारे में न कभी सुना हो, न देखा हो या न कभी चढा हो जैसा बर्ताव कर रहे है नेकपा एमाले समर्थित मीडिया की पार्टीकारिता करने वाले पार्टीकार (पत्रकार) । जनकपुर में अच्छा बुरा जैसा भी हो रेल और रेलवे स्टेशन दोनो हैं । वीरगंज के र्सीसिया स्थित ड्राई पोर्ट में १० साल से ज्यादा समय से भारत लगायत तीसरे देशों से कंटेनर में डाल कर उसी रेलवे लीक में सवार रेल से सामान देरी से सही आ तो रहा है । पर इन्हे कौन समझाए जो जबरदस्ती आंखबंद कर के बैठे हैं ।

पर इन्हें तो चीन का भूत सवार है । हो भी क्यों न चीन जो इन का नयां कुल देवता बन बैठा है । कम्यूनिष्ट का शासन नेपाल में और कम्यूनिष्टों का देश चीन में जो भारी गठजोड़ कर के मीत लगाया गया है वह कितने दिन टिकेगा और फलेगा और फूलेगा यह तो आनेवाला समय ही बताएगा । यहां के नेता, बुद्धुजीवी, लेखक और पत्रकारों को नेपाल के सिक्किमी करण या भुटानी करण से तो भारी परहेज है पर तिब्बती करण से कोई परहेज नहीं । यह तो चाहते ही है देश का तिब्बती करण हो और चीन की तरह यहां भी सापं को उबाल कर खाया जाए । इन्हे तो बस नक्कल करने में ही आनन्द आता है ।

बिना ठोस योजना के ही पिएमओली ५ वर्ष में देश को रेलमय बनाने की बात करते हैं । लगता है आने वाले ५ वर्षतक सत्ता मे काविज रहेंगे । और रेल तो हवा में ही बन जाएगा । शायद उन्हे उत्तर के पडोसी चीन पर कुछ ज्यादा ही भरोसा हो गया है कि वह नेपाल में रेल सेवा का विस्तार करेगा ? शायद केपीओली यह भूलगए हैं कि रक्सौल के सीमावर्ती शहर वीरगंज तक चीन कभी रेल सेवा बिस्तार नहीं करेगा । चीन इतना मुर्ख नहीं है कि आ बैल मुझे मार जैसा काम कभी करेगा ।

रेलवे लीक को बनाने मे ही वर्षाें लगता है । और वहां पर बिछायी जाने वाली भारी भरकम लोहे कि पटरी कोई मजाक नहीं है । न देश को ही इस की जरुरत है । जनकपुर से जयनगर जाने वाली रेल और रेलवे लीक की मर्मत कर उस को पुनस्संचालन कर दे तो यही बहुत है । हमे हमारी बस सेवा ही अच्छी है यदि उसको दुरुस्त कर के सही समय पर चलाया जाए । पिएम ओली महाशय हम जमिन पर ही रहना चाहते हैं । हमे चांद पर जाने का ख्वाब मत दिखाइए । बेशक सपने मे आप रेल चलाएं और उस की आवाज से हर दिन सुबह उठें । पर देश की जनता के पेट में महंगाई और कालाबजारी के कारण जो भूख और अभाव का रेल दौड़ रहा है । उस की आवाज पहले सुनिए और शांत कीजिए । हमें राजनीति के झेल में हमारें वोटों पर बरसों से हो रही खेल पर यह रेल दौडाना कतई मंजुर नहीं । आप सठिया चुके हैं इसी लिए रेल गाडी छुक, छुक, छुक करते रहिए । (व्यग्ंय)

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