रोजगार के अवसर सृजन करना चाहती हूुु: इंदिरा झा

एक साल पहले की बात करें तो इंदिरा झा की अपनी कोई खास पहचान नहीं थी, पहचान थी तो सचिव उमाकांत झा की पत्नी या मंत्री उमाकांत झा की पत्नी के रूप में । मैथिली महिला समाज और राजनीति से जुडÞे रहने के बाबजूद उन्होंने अपने पारिवारिक जिम्मेवारियों को निभाना ज्यादा जरूरी समझा । वैसे तो एक बार पहले भी उनका नाम संविधानसभा के सदस्य के लिए चुना गया था लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किया था । अब बच्चे बडÞे हो गये, पारिवारिक जिम्मेवारी भी हल्की हो गई है और सबसे बड बात कि, अब वो बाहर निकल कर काम कर सकती थीं, यही सोचकर इस बार जब तर्राई मधेश लोकतान्त्रिक पार्टर्ीीे संविधानसभा सदस्य के लिए इन्दिरा झा का चयन किया तो उन्होने सहर्षस्वीकार कर लिया । सचिव उमाकांत झा की पत्नी से लेकर सभासद बनने तक के इस सफर के बारे में प्रस्तुत है हिमालिनी प्रतिनिधि कंचना झा से हर्ुइ बातचीत के कुछ अंश-
० अचानक से मिली इस पहचान से क्या महसूस कर रही हैं –

Indira jha

इंदिरा झा

– अचानक से तो पहचान नहीं मिली है । मैं राजनीति में बहुत दिनों से लगी हूँ । तमलोपा के शुरुआती दौर से ही मैंने बहुत मेहनत की थी । मैं मैथिल महिला समाज की अध्यक्ष भी रह चुकी हूँ । हाँ, इसमें अवश्य सच्चाई है कि मैं खुलकर सामने नहीं आई । मैं चाहती थी कि पारिवारिक जिम्मेवारी पूरी कर लूँ फिर कोई काम करूँ । और इसबार जब मेरे नाम का प्रस्ताव रखा गया तो मैंने सहर्षस्वीकार कर लिया । जहाँ तक अनुभव की बात है तोे सफलता किसे अच्छी नहीं लगती है । मैं आज अपने पैरों पर खडÞी हूँ अपनी अलग पहचान है तो खुश होना भी स्वाभाविक है ।
० पार्टर्ीीी ओर से जब आपका नाम समानुपातिक में रखा गया, तब पार्टर्ीीे भीतर और बाहर दोनों जगहों में काफी आलोचना हर्ुइ, कैसा लगता था आपको –
– चर्चा परिचर्चा होना कोई नई बात नहीं है । आप कुछ भी करें अच्छा या बुरा लोग तो चर्चा करेंगे ही । लेकिन लोगों की बात सुनकर मैं कभी निराश नहीं हर्ुइ, रुकी नहीं, बस काम करती रही । आप काम करेंगी तो दानों तरह की बातें सुननी ही होंगी । मैंने भी सुनी ।
० क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि आपकीे वजह से पार्टर्ीीे कुछ अच्छे लोगों को गुमाया है –
– मुझे नहीं लगता है कि इस बात को लेकर कोई पार्टर्ीीे अलग हुए हैं । सभी के काम का मूल्यांकन किया जाता है । पार्टर्ीीे मुझपर विश्वास किया और मेरा नाम रखा गया, जिसे मैं इन्कार नहीं कर पाई । और मुझे पूरा विश्वास है कि मेहनत का फल मिला है । सीखने का अवसर मिला है मुझे । प्रयास कर रही हूँ कि अच्छे काम कर सकूँ ।
० ये तो हर्ुइ पुरानी बातें, अब ये बताईए कि जिस काम के लिए जनता ने आप को संविधान सभा में भेजा है, वह होगा – क्या नेपाली जनता को माघ ८ में संविधान मिल जाएगा –
– हर कोई चाहता है कि समय पर सििवधान जारी हो और सभी दल प्रयासरत भी हैं । लेकिन कुछ गम्भीर विषयों पर अभी भी सहमति नहीँ बन पायी है । आशा करें कि दलों के बीच सभी विषय पर सहमति बने और जनता की चाहना अनुकूल संविधान बने । अगर संविधान में जनता की भावनाओं को समेटा नहीं गया तो परिस्थिति प्रतिकूल हो सकती है ।
० नेपाल मंे महिलाओं की अवस्था को आप कैसे देखती है –
– तुलनात्मक रूप में सुधार तो हुआ है लेकिन मंजिल अभी भी बहुत दूर है । लैंगिक विभेद, शारीरिक और मानसिक यातना, यौन शोषण, दहेज, बाल विवाह अभी भी व्याप्त हंै नेपाली समाज में ।
० अब उनको विकास के मूलधार में लाने के लिए क्या करना होगा –
– समाज की सोच में परिवर्तन लाना होगा । और इसके लिए बृहत स्तर पर अभियान आवश्यक है । अभियान की शुरुआत शिक्षा से ही करनी होगी । ऐसा वातावरण निर्माण करना होगा कि हर महिला शिक्षित हो, हर महिला अपनेे पैरों पर खडÞी हो सके । धीरे-धीरे समस्या खुद-ब-खुद खत्म हो जायेगी । मंै खुद भी मैथिल महिला समाज के मार्फ इस अभियान में जुटी थी, लेकिन जख्म पुराना हो तो ठीक होने में भी समय तो लगता ही है ।
० आप तो मधेश से हैं, मधेशी महिला की अवस्था और भी दयनीय है । उन्हें आगे लाने के लिए क्या करना होगा –
– मधेश की बात करें तो महिला ही नहीं पुरुष भी बहुत पीछे हैं । लेकिन अगर महिला की बात करें तो सबसे बडÞी समस्या है कि मधेशी महिला को अपनी क्षमता का पता ही नहीं । विभेद के कारण वह अपने आप को पहचान ही नहीं पाई है । सबसे पहले उन्हे शिक्षित करना होगा । शिक्षित होते ही वे खुद आगे आ जायेगी । उन्हे कोई रोक ही नहीं पायेगा ।
० सभासद बनें हुए लगभग दस महीने बीत चुके हैं, मधेशी महिला के विकास के लिए आपने अभी तक क्या किया –
-चाहती हूँ बहुत कुछ करना, कुछ योजनाएँ भी बना रखी है । बेरोजगारी , बाल विवाह आदि को लेकर संसद में बार बार आवाज भी उठा रही हूँ । लेकिन सरकार ध्यान नहीं दे रही है । शिक्षा, गरीबी और सडÞक को लेकर कई बार संसद में बात उर्ठाई, लेकिन सरकार सुनती ही नहीं ।
० अंत में अपने जिलावासी के लिए क्या करने की योजना है –
-मैं कोई झूठा वादा नहीं करना चाहती हूँ लेकिन रोजगार के अवसर की सृजना करना चाहती हूँ, ताकि युवा वर्ग को रोजगारी के लिए विदेश नहीं जाना पडÞे । इसके साथ ही दहेज नियन्त्रण और बृद्धबृद्धा एवं अपंग के लिए कुछ करना चाहती हूँ ।

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