र्सार्क शिखर सम्मेलन का सन्देश

प्रो. नवीन मिश्रा:दो दिवसीय र्सार्क शिखर सम्मेलन २६ और २७ नवम्बर के दिन काठमांडू में सुसम्पन्न हुआ । र्सार्क सम्मेलन से कम चर्चा में भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी का नेपाल भ्रमण भी कम चर्चित नहीं था । मोदी को जनकपुर -तर्राई) लुम्बिनी -हिमाल) और मुक्तिनाथ -पहाडÞ) जाना था । लुम्बिनी और मुक्तिनाथ यात्रा के सम्बन्ध में कोई विवाद नहीं हुआ लेकिन जनकपुर भ्रमण को नेपाली राजनीतिज्ञों ने इतना विवादास्पद बना दिया कि अन्ततः भारत सरकार ने आन्तरिक व्यस्तता का कारण बताते हुए मोदी जी के काठमांडू के अतिरिक्त अन्य जगहों के भ्रमण को स्थगित करना ही उचित समझा और एक बार फिर तर्राई छला गया । नेपाल के प्रधानमन्त्री, गृहमन्त्री और कुछ तर्राई के केन्द्रीय मन्त्री शुरु से ही मोदी के जनकपुर भ्रमण के पक्ष में नहीं थे । इसी मधेशी संस्कृति का विरोध करने का कारण आज सी.के. राउत जेल में हैं और मधेश के दलाल सत्ता में । सबसे पहले मोदी जी के द्वारा जनकपुर में तीन हजार साइकिल बाँटने के कार्यक्रम को रद्द किया गया क्योंकि नेपाली राजनीतिज्ञ शर्मसार हो रहे थे किModi (14) उन्होंने तो आज तक अपनी जनता को एक र्सर्ूइ भी नहीं दी है । भले ही वे चुनाव जीतने के लिए लाखों करोडÞों खर्च करते हों । फिर दूसरा विवाद शुरु हुआ, नागरिक सम्बोधन, अभिनन्दन को लेकर । पहले यह कार्यक्रम बारहबिघा मैदान में होना था, जहाँ अधिक से अधिक जनता मोदी जी को सुन, देख सके । लेकिन नेपाली शासकों के द्वारा इस कार्यक्रम को जानकी मन्दिर में सीमित कर दिया गया, जिससे कम से कम लोग इस कार्यक्रम में सहभागी हो सकें । इस बात से आक्रोशित जनता ने शान्तिपर्ूण्ा विरोध जुलुस निकाल कर स्थानीय सीडीओ और वीरगंज में कौन्सिल को ज्ञापनपत्र दिया । फिर क्या था ! नेपाली शासकों को बहाना मिल गया और केन्द्रीय मन्त्री विमलेन्द्र निधि द्वारा एक ज्ञापन जारी कर नरेन्द्र मोदी के जनकपुर भ्रमण रद्द होने की जानकारी दी गई और इसका कारण बाइस विरोधी दलों के द्वारा धरना पर््रदर्शन बताया गया । इतना सुनते ही न सिर्फजनकपुर बल्कि वीरगंज और तर्राई के अन्य स्थानों में भी बन्द और आमरण अनशन शुरु होशो गया । दूसरे दिन नेपाल के परराष्ट्र मन्त्री और भारतीय राजदूत के द्वारा इस सूचना को गलत बताते हुए कहाँ गया कि अभी तक मोदी जी का कार्यक्रम पर्ूववत है । तर्राई की जनता यह सुन कर शान्त तो जरूर हो गई लेकिन अब तक इतनी विवादास्पद परिस्थिति उत्पन्न हो गई थी कि अन्ततः भारत सरकार के द्वारा ही इन कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया । मोदी जी ने फर्ुसत के समय इन स्थानों का भ्रमण करने का आश्वासन तो दिया है लेकिन इसके लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं है । फिलहाल मोदी जी के स्वागत में जगह जगह जनकपुर के चौका-चौराहों पर तोरन द्वार और पर्चे पोष्टर उनका इन्तजार कर रही है ।
र्सार्क सम्मेलन शुरु होने से पहले ही प्रधानमन्त्री मोदी की मौजूदगी में नेपाल में दो महत्वपर्ूण्ा कार्य हुए । पहला अरुण तीन के विषय में समझौता और दूसरो वर्षों से लम्बित दिल्ली-काठमांडू बस सेवा का सञ्चालन । इस अवसर पर नेपाली राजनीतिज्ञों को सम्बोधित करते हुए मोदी ने चेताया कि संविधान का निर्माण कभी भी संख्या के आधार पर हितकर नहीं होगा । सहमति के आधार पर ही संविधान का निर्माण होना चाहिए । मोदी की इस नसीहत से अवश्य ही नेपाली कांग्रेस-और एमाले के दम्भ को धक्का लगा होगा । अपने इस भ्रमण काल में मोदी ने जनकपुर, लुम्बिनी आदि स्थानों के विकास के लिए भी नेपाल सरकार के साथ महत्वपर्ूण्ा समझौते किए हैं । लेकिन यह समझौता कब तक और कहाँ तक क्रियान्वित हो सकेगा, यह कहना मुश्किल है क्योंकि इससे पहले के अनेकों काम जैसे भिठ्ठामोडÞ-जनकपुर तथा जटही-जनकपुर सडÞक खण्ड का निर्माण, जनकपुर विकास के लिए आया हुआ एडिभी प्रोजेक्ट आदि अभी भी अधर में लटके हुए हैं ।
र्सार्क सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को सम्बोधित करते हुए भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने दो बातें कही । पहला उन्होंने आतंकवाद का मुद्दा उठाते हुए इशारे में ही पाकिस्तान को इंगित करते हुए कहा कि मुर्म्बई हमले जैसी दर्दनाक घटना के दर्द को भुलाया नहीं जा सकता और दूसरा यह कि र्सार्क सदस्य देशों में असहमति के कारण र्सार्क की गति धीमी है । पाकिस्तान के वजीरे आजम नवाज शरीफ का कहना था कि पाकिस्तान अन्य सदस्य राष्ट्रो के साथ दोस्ती का पक्षधर है । उन्होंने इस संगठन में चीन को शामिल करने की भी बात उर्ठाई । इसी तरह सदस्य राष्ट्रों के अन्य सरकार प्रमुखों ने भी सदस्य राष्ट्रो के बीच आपसी सहमति और सहयोग की महत्ता पर बल दिया । साझा मञ्च होते हुए भी र्सार्क शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी तथा पाकिस्तानी प्रधानमन्त्री नवाज सरीफ ने न तो एक दूसरे से हाथ मिलाए और नहीं दोनों की नजरें मिली । आज से लगभग ६ महीने पहले मोदी के शपथ ग्रहण समारोह के समय दोनों नेताओं के बीच साडÞी और शाल की डिप्लोमेसी शुरु हर्ुइ थी वह छू मन्तर हो गई । उल्लेखनीय है कि उस अवसर पर मोदी ने नवाज शरीफ की माँ के लिए साडÞी भेंट की थी और बदले में नवाज सरीफ ने मोदी की मां के लिए शाल भेंट किया था । सम्मेलन के पहले दिन मोदी और शरीफ के बीच की तल्खी देखी जा सकती थी । लेकिन सम्मेलन के समापन समारोह में नेपाली प्रधानमन्त्री सुशील कोइराला की पहल पर दोनों नेताओं ने हंसते हुए एक दूसरे से हाथ मिलाया और इस अवसर पर समापन स्थल तालियों की गडÞगडÞाहट से गूंज उठा ।
ऊर्जा, शान्ति, सुरक्षा, आपसी सहयोग, गरीबी उन्मूलन, पर्यावरण, व्यापार, आर्थिक उन्नति आदि महत्वपर्ूण्ा विषयों से सम्बन्धित ३६ सूत्रीय काठमांडू घोषणपत्र जारी किया गया और सभी देशों ने इसके कार्यान्वयन पक्ष पर जोर दिया । र्सार्क की सबसे बडÞी समस्या है इस क्षेत्र को तनाव और संर्घष्ा से मुक्त कराना । साथ ही आर्थिक तथा अन्य क्षेत्रों में आपसी सहयोग । इस क्षेत्र के राष्ट्रो के बीच हो रहे क्षेत्रीय व्यापार का भी स्तर न्यून है । इस क्षेत्र में पर्ूवाधारों की भी कमी है । इस क्षेत्र के विकास के लिए आवश्यक है कि यातायात, संचार सुविधा आदि के सहायता से व्यापार को विकसित किया जाए । अन्य सम्मेलनों की तुलना में इस सम्मेलन के घोषणापत्र में इन सभी चीजों के पर््रवर्द्धन पर भी जोर दिया गया है और आशा की जानी चाहिए कि हमें उसका प्रतिफल मिलेगा ।
यूँ तो र्सार्क में भारत और पाकिस्तान दो सबसे शक्तिशाली और परमाणु शक्ति सम्पन्न राष्ट्र है । लेकिन पाकिस्तान की तुलना में्र भारत की राजनीति में स्थायित्व ज्यादा होने के कारण तथा पाकिस्तान में हो रहे आतंकवादियों की गतिविधियों के कारण पाक की तुलना में भारत का महत्व ज्यादा है । दक्षिण एशिया की पर्यावरणीय व्यवस्था में दक्षिण एशिया की ऐतिहासिक परम्परा, जनसंख्या, भू-भाग, आर्थिक तत्व, आधुनिकीकरण की परम्परा, राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया, जातीय संर्घष्ा, जातीय राजनीति, राजनीतिक विकास का प्रारूप, क्षेत्रीय सहयोग जैसे तत्व महत्वपर्ूण्ा हैं । र्सार्क चार्टर अनुसार र्सार्क सम्मेलनों में द्विपक्षीय तथा विवादस्पद विषयों पर विचार विमर्श नहीं करने की व्यवस्था के कारण भी र्सार्क असफल रहा है । यही कारण है कि राजनीतिक तथा गैर सुरक्षात्मक क्षेत्र में इसने अभी तक कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया है । विवाद तथा समस्या से ग्रसित इस क्षेत्र में र्सार्क की स्थापना ही एक महत्वपर्ूण्ा उपलब्धि है । र्सार्क सम्मेलनों में द्विपक्षीय तथा विवादास्पद मामलो पर र्सार्क चार्टर निर्माताओं ने इसलिए प्रतिबन्ध लगाया कि ऐसा नहीं करने से र्सार्क के अस्तित्व पर ही खतरा उत्पन्न होने की सम्भावना थी ।
ऐसा नहीं है कि र्सार्क अपने स्थापना काल से लेकर अब तक कुछ किया ही न हो । इसके अब तक १८ शिखर सम्मेलन हो चुके हैं । इसके मातहत में विभिन्न क्षेत्रीय स्तर की समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न क्षेत्रीय केन्द्रों की स्थापना की गई है, जिन में र्सार्क कृषि जानकारी केन्द्र, र्सार्क टी.बी. केन्द्र, आदि प्रमुख हैं । इसने विभिन्न एकीकृत योनजाओं को भी मर्ूत्त रूप दिया है, जो कृषि और सामाजिक विषयों से सम्बन्धित है । समय-समय पर र्सार्क के विदेश मन्त्रियों तथा सचिव स्तर की बातचीत होती रहती है, जिस में विभिन्न समस्याओं पर विचार विमर्श कर उसे निबटाने का प्रयास किया जाता है । इसके अर्न्तर्गत विभिन्न क्षेत्रीय घोषणापत्रों तथा महासन्धियों पर हस्ताक्षर हुए हैं । इन में र्सार्क खाद्य सुरक्षा सम्झौता, आतंकवादविरुद्ध र्सार्क क्षेत्रीय महासन्धी, लागूपदार्थ विरुद्ध र्सार्क क्षेत्रीय महासन्धी, सुविधापर्ूण्ा व्यापार सम्बन्धी र्सार्क क्षेत्रीय महासन्धी, लागू पादर्थ तथा महिलाओं के देह व्यापार निषेध सन्धी आदि महत्वपर्ूण्ा हैं । वास्तव में र्सार्क क्षेत्र में बहुत ही ज्यादा गरीबी है और इसलिए आलोचक इसे ‘गरीब राष्ट्रों का क्लब’ कह कर इसकी आलोचना करते हैं । इस कारण र्सार्क को इस क्षेत्र में गरीबी निवारण पर जोडÞ देना होगा । र्सार्क राष्ट्रों ने व्यापार तथा वाणिज्य के क्षेत्र में स्वतन्त्र व्यापार का प्रारूप स्थापित करने के लिए साफ्टा का निर्माण किया है, जिसकी नीतियों को क्रियान्वित करना आवश्यक है । इस प्रकार र्सार्क ने अब तक आर्थिक, व्यापारिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, वौद्धिक, शैक्षिक आदि क्षेत्रों में महत्वपर्ूण्ा उपलब्धियाँ हासिल की है । भविष्य में इसके आगे बहुत सारी चुनौतियाँ हैं, जिसे पार कर ही यह अपनी सफलता के शिखर को पा सकता है । अठारहवें र्सार्क शिखर सम्मेलन की समाप्ति के अगले दिन ही भारतीय प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी की जम्मू कश्मीर में चुनावीसभा हो रही थी और इससे लगभग १०० किलोमीटर की दूरी पर पाक समर्थित लश्करे तोयबा के आतंकवादियों का हमला जारी था । ऐसी परिस्थिति में यह कहना मुश्किल है कि र्सार्क का भविष्य कितना उज्ज्वल होगा ।

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