र्स्वर्ग में बन रही फिल्म

भारतीय फिल्म इन्डस्ट्रीज का लोहा तो पुरी दुनियाँ मानती है। तकरीबन ६०० से ७०० फिल्में प्रत्येक बर्षबनती हैं। बाँलीवुड के सितारे तो आसमान के सितारों से भी ज्यादा चमकदार हंै। इनकी ख्याति तो पुरी दुनियाँ में ही नहीं, र्स्वर्गलोक तक फैली है। इस बार तो भगवान ने भी र्स्वर्ग लोक में सभी देवी-देवताओं के मनोरंजन के लिए एक २०१२ के ब्लाक बस्टर फिल्म बनाने की योजना बना डÞाली। उन्हो ने मंत्रालय की मिटिंग भी बुला ली। मिटिंग के बाद यमराज को ये ड्युटी दी कि बाँलिवुड से कुछ ऐसे सितारों को लाया जाए, जिससे एक अच्छी सुपरहिट फिल्म बनाई जा सकें।

Darasingh

Darasingh died at age 84

यमराज जी ने पृथ्वी का मुआयना किया, सिने कलाकार शम्मी कपूर साहब को ऊपर र्स्वर्गलोक में ले गए। उन्हें लगा कि जब कोई बडÞी फिल्म बनानी है तो सितारे भी बडÞे बडेÞ चाहिए। फिर क्या था- देवानन्द साहब -सदाबहार हीरो) को भी ऊपर बुलाया गया। भगवान जी ने यमराज से कहा- नायक तो हो गए अब फिल्म में बढिÞया गीत भी तो चाहिए। यमराज ने मशहूर गायक जिन्होंने कई हिन्दी फिल्मों मंे हिट गाने गाए थे, भूपेन हजारिका को भी र्स्वर्गलोक का टिकट थमा दिया। फिर क्या था, अब तो वहाँ फिल्म की चर्चा जोरों पर होने लगी, सारे देवी देवता सब काम छोडÞके फिल्म के ही बारे में सोचने लगे। अब उन्हे अच्छे गायक भी तो चाहिए, उन्होने फिर यमराजा से कहा – जाओ पृथ्वी से एक बढिया गायक को लाओ।
लगे हाथ यमराज बाँलीवुड के मशहुर गायक जगजीत सिंह को भी ऊपर का रास्ता दिखा दिया। पर, इससे भी वहाँ मामला जमता नजर नहीं आया। बडÞी फिल्म थी- उन्हें एक रोमांटिक सुपर हिरो की कमी खल रही थी। उन्होने वाँलीवुड पर फिर नजरें दौर्डाई तो उन्हे एक ही नाम दिखाई दिया- अपने जमाने के सुपर स्टार, रोमांस किंग, सुपर स्टार राजेश खन्ना उनका भी बुलावा आ गया। मगर उनके जाने से पुरा वाँलीवुड अशान्त हो गया, उनकी कमीको अब शायद ही कोइ भर पाये। इसी बीच र्स्वर्ग में बन रही फिल्म के बारे में प्रमख्या फिल्म निर्माता एस चोपडÞा को कुछ भनक पडÞी। वे खुद दौडÞकर र्स्वर्ग में पहुँच गए फिल्म निर्देशन करने के लिए। फिल्म में स्टन्ट सीन देने के लिए बुढे पहलवान दारा सिंह भी र्स्वर्ग पहुँच गए। जैसे तैसे तो फिल्म के लिए सब इकठ्ठे हो गए, अब फिल्म में तो कुछ काँमेडी भी तो चाहिए। अबकी बारी थी- काँमेडियन जसपाल भट्टी की। गाडÞी दर्ुघटना करवा कर भगवान जी ने अपनी फिल्म के लिए भट्टी को भी बुला लिया।
इतने सारे महान हस्तियों का एक साल के अन्दर ही, मुर्ंबई से चले जाना, मानो मुर्ंबई की जान, रौनक ही चली गई। तो मुर्ंबई के राजनीतिक हिरो कहे जाने वाले और मुर्ंबई से बेहद प्यार करनेवाले बाल ठाकरे जी बहुत बेचैन हो उठे। उन्होने भगवान से कहा कि ये तूने क्या किया – या तो उन सब को नीचे भेज दो, या फिर मुझे ही ऊपर बुला लो। भगवान का भी अपना एक वसूल होता है। वे एक बार जिस को ऊपर बुला लेते हैं, उस को वापस नहीं भेज सकते। इसलिए उन्हों ने बाल ठाकरे साहब को ही बुलवा लिया।
अब फिल्मों की तैयारी के लिए मुर्ंबई सरकार की इजाजत भी तो चाहिए। सारे के सारे सितारे भी हो गए, इजाजत भी मिल गई, अब फिल्म का मुहर्ूत भी हो गया। बस एक चीज बाँकी रह गई- वो विलेन -खलनायक)। लेकिन तो बाल ठाकेर ने जाते ही कहा कि विलेन तो मेरे यहाँ है। जिसको मैने काफी दिनों से जेल में बन्द करके रखा है। अंत में आतंकवादी अजमल कसाब को भी बाल ठाकरे ने ऊपर बुलवाया। बस फिर क्या था अव तो २०१२ सालका अंत हो चुका है। अब देखना ये है कि भगवान की ये सुपरहिट फिल्म रिलिज कब होती है। िि
ि

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: