लडाकु के नाम प लूट:लिला नाथ गौतम

हर भाषण में मुल्क से भ्रष्टाचा अन्त्य कने की बात कहने वाले माओवादी नेता लोग सबसे भ्रष्ट साबित हुए हैं। कुछ हप्ते पहले सम्पन्न सेना पर्ुनर्वगीकण का नतिजा इस बात की पुष्टि कता है। माओवादी सेना पुनवर्गीकण के नतीजे मुताबिक अस् थायी शिवि में पहिले से ही तीन हजा कीब सेना ह हे थे। लेकिन माओवादी पार्टर्ीीे इस बातको गुपचुप खक ाज्यकोष से भपु सद-पानी ले हा था। इस तह अस् थायी शिवि में ना हने वाले सेना के नाम से भी पारटिकम लेना सीधा-सीधा भ्रष्टाचा है। इस बात के खिलाफ अभी चाो तफ से आवाज उठ ही है।  नेपाली कांग्रेस, एमाले औ मधेशीवादी सभी दल माओवादी से हर्ुइ इस भ्रष्टाचा के खिलाफ इकठ्ठे हो हे हैं।
विगत पाँच वर्षों से माओवादी ने फर्जी तीन हजा सेना के नाम प १ अब १८ कोडÞ से ज्यादा कम लिया है। शिवि में न हनेवाला लडाकू के नाम से फर्जी भपाई औ विल पेश कके ाज्यकोष से इस तह कम लेना औ मुलुक से भ्रष्टाचा अन्त्य कने की बात कना माओवादी पार्टर्ीीौ उनके नेता के द्वैध चत्रिका उदाहण है। पाँच वर्षपहले १९ हजा ६ सौ २ लडाकू अनमीनने प्रमाणित की जाने की बात हर्ुइ थी। लेकिन पर्ुनर्वगीकण के बाद २६ सौ लडाकू अनुपस् िथत दिखता है। इससे स् पष्ट होता है कि अनमीन ने भी माओवादी पार्टर्ीीे प्रभाव में हक झूठा विवण बनया था।
सेना समायोजन विशेष समिति के संयोजक बालानन्द शर्मा के अनुसा अनुपस् िथत होने की संख्या औ बढÞ सकती है। उनके अनुसा प्रमाणीकण के समय दोबाा ‘इन्ट्री’ होने के काण अनुपस् िथत संख्या ३ हजा कीब पहुँच सकती है। उन्हों यह भी बताया कि प्रमाणीकण के समय माओवादी ने नक्कली लडाकू उपस् िथत कवाया था। सचिवालय समिति के कडी निगानी के काण वे लोग वापस होना बाध्य हुए थे। शर्मा के अनुसा प्रमाणीकण के समय जिस के पास अनमीनने के पचियपत्र था, उसीका मात्र पर्ुनर्वगीकण किया गया है।
शान्ति मन्त्रालय स्रोत के अनुसा ०६३ मंसि से लेक ०६५ आश्विन तक माओवादी लडाकू मासिक ३ हजा तनखाह लेते थे। उसके बाद मासिक ५ हजा तनखाह लेने वाले लडाकू के लिए इसी आर्थिक वर्षसे मासिक ६ हजा ५ सौ तनखाह बनवाया था। इसके अलावा ोज ६० रुपये से १ सौ १० रुपये भत्ता उनको मिलते थे। इस तह पाँच वर्षका अवधि में ह लडाकू के लिए ाज्य ने ४ लाख खर्च किया है। लेकिन ३ हजा फर्जी लडाकू के नाम प हुए १ अब २० कोडÞ रुपये का खर्च विवण माओवादी ने नहीं दिया है। उक्त कम माओवादी पार्टर्ीीे अपने पास ही खने की खब र्सार्वजनिक होते हुए भी माओवादी नेता लोग इस बात को स् वीका नहीं कते हैं। स् वयम् प्रधानमन्त्री डा. बाबुाम भर्ट्टाई भी इस बात को लेक हंगामा मचाएगें तो शान्ति प्रक्रिया में अवोध आने की बात कते हैं। डा. भर्ट्टाई कहते हैं, ‘अग हम लोग तीन हजा लडाकू के बो में खानतलास कते हैं तो शान्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढÞ सकती।’ जिस बातसे साबित होता है कि माओवादी इस भ्रष्टाचा को गुपचुप छुपाना चाहता है। इस के साथ यह भी साबित होता है कि भ्रष्टाचा में माओवादी भी किसी से कम नहीं है।
शान्ति मन्त्रालय स्रोत के अनुसा ०६३ मंसि से लेक ०६८ कात्तिक तक लडाकू के ासन के लिए २ अर्ब ५५ कोडÞ औ तनखाह के लिए ५ अब २२ कोड रुपये निकासा हो चुका है। आगे दिन में निकासा होने वाले कम के लिए माओवादी क्या कता है – वह देखना ही है। लेकिन सभी दल ने बताया है कि अब माआवादी को कम देने की जरुत नहीं है। ‘अग वे लोग बाँकी कम चाहते है तो फर्जी लडाकू के नाम प विगत में लियाहुआ कम वापस कना पडेÞगा’ अन्य नेता लोगोंका कहना है। नेपाली कांग्रेस के नेता औ प्रमुख सचेतक लक्ष्मण घिमिे का कहना है कि फर्जी लडाकू के विवण पेश कके माओवादी ने संस् थागत भ्रष्टाचा किया है। इसी तह एमाले अध्यक्ष झलनाथ खनाल भी कहते है कि फर्जी लडाकू के नाम प निकासा हुए कम वापस लेना ही पडेÞगा। यह नेता लोग कह हे है कि अग माओवादी ने भ्रष्टाचा किए गए उक्त कम वापस नहीं लौटाएगा तो संसद की कोनों काम-कावाही अगे नहीं बढÞ सकेगा।
इस प्रका फर्जी सेना से सम्बन्ध भ्रष्टाचा औ उनके विरुद्ध में हो हे विोध से साबित होता है कि माओवादी के लिए आगे का ास् ता सहज नहीं है। विोध का मद्देनज कते हुए यह बात भी निश्चित किया जा सकता है कि अपना फर्जी लडाकू के नाम प हुए संस् थागत भ्रष्टाचा के सम्बन्ध में माफी माँग क वास् तविकता र्सार्वजनिक नहीं कते हैं  तो माओवादी नेता लोग चैन की नीद नहीं सो पाएँगे।  ±±±

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