Tue. Sep 25th, 2018

लाहानका भयावह मंजर देख सुरक्षाकर्मी हुए सर्तक

लाहानका भयावह मंजर देख सुरक्षाकर्मी हुए सर्तक
मनोज बनैता,२८,अगस्त |
DSC015442सीमाकंन के विरोध में निकले मधेसी, थारु, मुस्लिम, दलित लगायत के द्वारा आव्हान किया गया अनिश्चितकालीन बन्द १३ हवें दिन भी यथावत रही । बन्द के कारण कोई भी सवारी साधन, बजार, कलकारखाना, शिक्षण संस्था नही चल सके हंै ।
लाहान में थारु कल्याणकारी सभा गाँव–गाँव से कार्यकर्ता लाकर करीब १२००० लोग प्रदर्शन में शामिल किया है । थारु और मधेसी जन–सैलाब को देखते ही सहम गये प्रशासन और स्वतन्त्र छोड़ दिया उस भीड़ को । चिंगारी को भड़काने की कोई भी कोशिस नहीं हुई । कहा जा सकता है कि लाहान के इस मानवसागर ने शान्तिपूर्ण रूप से अपने विरोध रैली को अन्तिम रूप दिया । विरोध रैली लाहान नगर परिक्रमा करके शहीद चौक पर कोणसभा में परिवर्तित हुई ।
कोणसभा को संवोधित करते हुए माओवादी (वैद्य) के कृष्ण सिंह दनुवार ने कहा कि टीकापुर में कर्फयू के समय में मधेशी थारु के घर में आगजनी, बलात्कार, लुटपाट सरकारी घुसपैठ के कारण हुई । इसलिए सरकार को जिम्मेवारी लेनी होगी और सेना को यथा शीघ्र फिर्ता करना होगा । इसीतरह एमाओवादी के सभासद् मानपुर चौधरी ने कहा कि तराई मधेश मुक्ति के लिए प्रचण्ड से बार बार वार्ता करने की कोशिश नाकाम होने के बाद संघर्ष के मैदान में आना एक अन्तिम विकल्प रह गया था । इसी तरह नेता एवं जनजाति महासंघ के पूर्र्व अध्यक्ष राजकुमार लेखी ने कहा कि सरकार ने अभी भी वार्ता का वातावरण सृजना नहीं किया है । उनके अनुसार अभी तक औपचारिक चिठ्ठी नहीं आयी ह ै। लेखी ने ये भी कहा है कि वार्ता के लिए सेना परिचालन रोकना होगा, गिरफतार हुवे नेता कार्यकर्ता को बिना शर्त रिहा करना होगा, कफ्र्यू हटाना होगा, घायल हुवे लोगाें की उपचार व्यवस्था सरकार को करनी होगी लगायत का शर्त मानने के वाद ही वार्ता की कोइ गुन्जाइस हो सकती है । लेखी ने ये भी कहा है कि हम सिर्फ प्रधानमन्त्री का मुँह देखने नहीं सार्थक वार्ता के पक्ष में हंै । जाते जाते लेखी ने एक चुनौतीपूर्ण भाव से ये कहा कि हमारा आन्दोलन एक दिन तो क्या एक घण्टे के लिए भी नहीं रुकेगा, वार्ता में सहमति होने के बाद ही रुकेगा ।
एमाले के नेता सत्यनारायण यादव ने झापा, मोरंग, सुनसरी, कैलाली और कंचनपुर सहित पांच जिल्ला मांगा है । उन्होंने सरकारको धमकीपूर्ण भाषा में कहा है कि यदि एैसा नहीं हुआ तो खसवादी की हालत माहाभारत की कौरवौं से भी बदतर होगी । मानव अधिकारकर्मी राजकुमार राउत ने कहा है कि तीन नेता केपी ओली, सुशिल और प्रचण्ड को ज्ञानेन्द्र जैसे हालत बनाने का समय आ गया है क्योंकि समाप्ति के समय में खसवादीयोे दमन, शोषण और अत्याचार पर उतर आए हंै ।. उनलोगों कोे मुहतोड़ जवाव देने के लिए जनता उठ चुकी है ।
. सद्भावना के बालेश्वर यादव ने सभा में बोलते हुए कहा कि पहचान सहित का संघीयता अगर नहीं दिया तो मै नहीं मेरा शव जायेगा मेरे घर । कार्यक्रम में लक्ष्मी चौधरी, फोरम नेपाल का दिनेश यादव, मुलबासी के झबर राम, पुर्व सभासद् सन्तोष चौधरी, मो.हनिफ लगायत के वक्ताओं ने अपने अपने मन्तव्य रख ें।
उसी तरह आज सिरहा के गोलबजार में बामदेव गौतम तथा केपी ओलि का पुतला बनाकर जुता चप्पलका माला लगाकर श्रद्धाञ्जली दी गई है ।

आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of