लाेग कैसे अाजादी की जंग लडते हैं ? अब्दुल खान

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अब्दुल खान, भैरह्बा ,२४, मार्च |अाजादी उतना अासान नहीं , जितना लाेग समझते हैं । अाजादी के लिए हर पुस्तों काे,उसका हक अदा करना  पडता है | अाजादी की  जंग असुविधाजनक है इसी कारण स्वार्थी लाेग अाजादी को साेचं भी नहीं सकते। प्रजातन्त्र मे शान्ति पूर्वक अपनी अावाज उठाने का हक है , कायर लाेग अावाज ताे क्या सामने अा नहीं सकते। अाप गान्धी जी की जिन्दगी देखे, उन्होने  हर अंग्रेजी कानून ताेडा था ताे क्या वह अपराधी थे,लेकिन उन्होने  कहा था की  देश के कानून से ऊपर इन्सानियत का कानून हाेता है,यह समझ अाजादी के मतवालाे मे मिलती है।
सहयाेग देना तब तक फर्ज है,जब तक सरकार उनके सम्मान का रक्षा करती है। असहयाेग उतना ही फर्ज होता  है जब सरकार सम्मान के बजाए उनकाे लुटने लगे। जिस समाज मे सुविधा काे सम्मान वसुलाे से ज्यादा देते है वह समाज हमेशा गिरता जाता है। लाेग अाजादी की जंग खुद नहीं लडना चाहते है | अपने पडाेसी से लडवाना चाहते है |सभी कहते है की अाज भगत सिहं की जरूरत है, मेरे घर मे नही पडाेसी के घर मे भगत सिंह हाे। सैतान देश भक्ति की अाड  लेते है | हर दस हजार शैतानाे के पिछे एक देश भक्त भी हाेता है, अवसरवादी लाेग हमेसा कहते है , हमसे जाे वन पडेगा हम करेगें एह सिर्फ जिम्माजमानी है, ईरादा नही। स्वार्थी लाेग किसी भी चीज काे प्राप्त करने के लिऐ सिर्फ इच्छा रखता है । इच्छा का साैदा हाेता है, इरादा का नही। जीवन मे जब भी दवाब पडता है तब इरादा मजबूत हाे कर  उभरता है। हर अाजादी का दंगल लडने वाला इरादा बुलन्द हाेना चाहिए |  माैका परस्त लाेगाे मे अाजादी एक फैसन हाेती है। कमजाेर इन्सान कभी सच्चाइ का साथ नहीं दे सकता है। कायर ईन्सान कभी भी वसुलाे काे नही निभा सकता । यह लाेग अाजादी के काविल नही  हाेते है।
जनता की बुजदिली उनके देश का पतन का कारण बन जाते है। क्या वह लाेग अनाथ हाेते है जाे देश के लिए कुर्वान हाेते है ? धर्म युद्ध  मे कभी समझाैता नही हाेता है। हर सिपाही कहता मेरा परिवार है, हमारी परिवारिक जिम्मेवारी है ताे क्या भारत अाजाद हाेता ? हर अाजादी के जंग लडने वालाे मे वह ईरादा हाेना चाहए “अापके अानेवाले कल के लिए अपना अाज कुर्वान कर डाला।” कास ऐसा कानुन हाेता देश के गद्दाराें काे देश के पाक झण्डे काे हाथ लगाने की ईजाजत नही हाेती।
हमारे समाज काे ३ चीजाे ने बहुत नाेकसान पहुंचा रही  है।
१. इर्ष्या / दोष
२.भाग्यवादी नजरिया
३.अलगाव वादी साेचं
अाजादी की  जगं लडने वाला हमेसा इन चीजाे से दूर हाेना चाहिए |
जिसने गुस्सा काे संकल्प मे वदल सके | जैसे, गान्धीजी को अंग्रेजाे ने कमपाटमेन्ट से बाहर फेंका तब उन्होने गुस्सा काे संकल्प मे बदला और  कहा हम तुमकाे भारत से निकाल फेंकेगें। यह साेचं हाेना हाेगा अाजादी की जंग लडने वालाे का।
अाजादी प्राप्ति के लिए नागरिकाे मे ३ चीज हाेना अावश्यक है।
१. देश का हर नागरिक  सिपाही बनने के लिऐ तैयार हाेना चाहिए ।
२. बेईन्साफी की वजह से एक सच्चा नागरिक जेल जाता है, ताे पूरे देश काे जेल जाने के लिए तैयार हाेना चाहिए ।
३. इस  देश के गद्दाराें काे उखाड कर फेंकना हाेगा जाे वतन के मिट्टी से साैदा करते  है |

अब्दुल खान

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