लिंग अनुपात की समस्या:
मोहित कोचेटा

आज हमारे देश में विषम लिंग अनुपात की विकराल समस्या है । हम कहाँ जा रहे है क्या यह वही देश है, जहाँ नारी को देवी माना जाता है । फिर भी आज हमारे यहाँ नारी की दर्ुदशा क्यों है – आंकडों के अनुसार लगभग ४.५ करोडÞ लडÞकियों की जन्म से पहले ही भ्रूण हत्या हो चुकी है । यदि ऐसा ही रहा तो क्या हमारा अस्तित्व खतरे में नहीं पडÞ जाएगा – क्या लडÞकियों के बिना जीवन संभव है – कुछ इलाकों में तो लडÞकियों/लडÞकों का यह अनुपात ८००/१००० तक गिर गया है ।
मैं कहना चाहता हूँ कि गर्भपतन भी तो एक प्रचेंन्द्रिय जीव की हत्या करना ही है । हम लोगों के यहाँ क्या कमी है, जो हम दहेज मांगते है – लडकी की भू्रण हत्या का मुख्य कारण यही है । अतः नम्र निवेदन है कि दहेज की इस कुरीति को जडÞ से ही समाप्त कर दो तो समस्या अपने आप ही हल हो जायेगी ।
प्रस्तुत हैं कुछ पंक्तियां ः
ओस की एक बूंद होती है बेटियाँ,
कठोर र्स्पर्श से रोती है बेटियाँ ।
रौशन अगर बेटा करे एक कुल को,
दो, दो परिवार की इज्ज्त होती है बेटियाँ ।
बेटा अगर हीरा है तो मोती होती है बेटियाँ,
कांटों भरी राह इनकी दूसरों के राह का फूल है बेटियाँ ।।
दो मुख्य कारण हैं कि लोग क्यों नहीं चाहते कि बेटियों का जन्म हो – उसका सबसे बडा कारण है दहेज । लोगों की सोच है कि बेटी हर्ुइ तो उसकी शादी का भार उनके सिर पर होगा । इसी कारण लोग गर्भपात करवा लेते हें । अतः गर्भ में पल रही बच्ची की पुकार जो वह अपनी मां से कर रही है-
“माँ मुझे इस दुनिया में आने दो, मुझे मत मारो, मैं आपकी प्यारी बच्ची हूँ । मैं कभी नए कपडे की मांग नहीं करुंगी । न ही नई किताब की जिद करुँगी । मैं स्कुल ट्यूसन के लिए भी नहीं कहुँगी । आप को मेरे दहेज पर पैसे न खर्च करने पडेÞ इसके लिए मैं कभी शादी नहीं करुंगी । मैं आपकी सेवा करुंगी और आपको कभी वृद्धाश्रम में जाने की जरुरत नहीं पडेÞगी । बस मुझे इस दुनियाँ में आने दो माँ ।”

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