लिडर फ्लु, आओ हमारे देश !

मुकुन्द आचार्य::हमारा नेपाल विचित्रताओं के लिए बुरी तरह बदनाम है। यह भी अच्छी बात है। चाहे जैसे हो, विश्व का ध्यान हमें अपनी ओर खींचना है। शायद आपने भी सुना होगा- बदनाम हुए तो क्या हुआ, कुछ नाम तो हुआ। बस, बस, वही हाल हमारे प्यारे नेपाल का है।

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लिडर फ्लु

कुछ विचित्रताओं पर आप गौर फरमाना पसन्द करेंगे – नेपाल देश अपने दोनों पडÞोसी की तुलना में बहुत ही छोटा है। मगर भ्रष्टाचार के मामले में भारत-चीन दोनों को धूल चटा सकता है। हमारे नेपाल के सामने भारत और चीन तो कुछ भी नहीं हैं- भ्रष्टाचार के मामले में। मुझे तो लगता है, भ्रष्टाचार ओलंपिक यदि आयोजित किया जाए तो सारे पदक- स्वर्ण्र्ाारजत, कांस्य, सिर्फऔर सिर्फनेपाल को ही मिलेंगे। और देश देखते रह जाएंगे।
भगवान भी अच्छा मजाक कर लेते हैं। वह भी हमारे नेपाल के साथ। बेचारे भगवान भी क्या करें। क्षीर-सागर में सोते-सोते वे बोरे हो जाते हैं। लक्ष्मीजी दिन रात उनके पांव दवाती हैं। दबवाते-दबवाते भगवान के पांव दुखने लगते हैं। तो कुछ सैर करने का जी करता है उनका भी, झटपट चले आते हैं नेपाल में हवाखोरी करने !
नेपाल में आजकल भगवान की भलमनसाहत से बर्डफ्लू अपने शवाब पर है। रोज हजारों की संख्या में मर्ुर्गियों को मारा जा रहा है। दफनाया जा रहा है। लोग भी लोमडÞी की तहर चालाक हो गए हैं। बर्डफ्लू संक्रमित मर्ुर्गी खाने से तो बेहतर है, मछली और बकरे पर हाथ साफ किया जाए। पशु पंछियों को मार कर बेचने वाले जल्लाद लोग भी चालाकी में लोमडÞी से कम नहीं हैं। मौका मिलते ही चौका जमा दिया। आनन-फानन में मछली और बकरमांस का भाव और अभाव दोनों बढÞा दिया जल्लादों ने। खानेवाले भी मजनू,ं फरहाद की तरह जां निसार करने के लिए तैयार हैं। वाह री दीवानगी !
अब मजा देखीए। बर्डफ्लू के पीछे-पीछे स्वाइनफ्लू भी आ गया। चितवन में ऐसे बहुत से नमूने मिले हैं। वास्तव में हम लोग प्रथम श्रेणी के प्रेमी हैं। चिडियों से ही नहीं, हम तो अंट-संट खानेवाले सूअरों से भी असीम प्रेम करते हैं। देश छोटा है तो क्या हुआ, हमारा दिल तो बहुत बडा है। फिर भगवान ने भी तो वाराह अवतार लेकर पृथ्वी का उद्धार किया था। सूअर तो पूज्य है, भोज्य है।
इसीलिए हम लोग तो सूअर को प्रेम से पालते हैं, फिर प्रेम से खाते हैं। स्वाइनफ्लू से यदि वराह भगवान को कुछ हुआ, तो भी हम उनको प्रसाद समझकर पा लेंगे, अर्थात् खा लेंगे। इसी को कहते हैं- जीव का ब्रहृम में समा जाना, एकाकार हो जाना। सायुज्य मुक्ति !
एक घटिया किस्म के अच्छे नेता मिल गए। बेचारे बहुत घबराए हुए नजर आ रहे थे। मैंने पूछा, मामला क्या है, नेता जी, आपके चेहरे पर हवाईयां क्यों उडÞ रही हैं – इस देश में बर्डफ्लू और स्वाइनफ्लू के बाद ‘लीडरफ्लू’ आनेवाला है। हम चाहे गए गुजरे ही क्यों न हों, आखिर नेता तो हैं। लीडरी कर के अपना कुनवा चला रहे हैं, तो हमारा डÞरना तो लाजिमी हैं न ! खुदा न खास्ता मुझे कुछ हो गया तो मैंने अनेक करतब कर के जो दौलत, जमीन जायदाद बटोरी है, उसका क्या होगा – मैं अभी मरना नहीं चाहता, जी।
मैने उन्हें फिर टोका- देखिए नेता जी, वर्डफ्लू स्वाइनफ्लू कि तरह यदि लीडरफ्लू आ भी गया तो आपसे बडेÞ नेता बहुत सारे हैं। जब तक आपकी बारी आएगी, तब तक तो सरकार जैसे भी कुछ ना कुछ तो करेगी। आप नाहक फिक्रमन्द हो रहे हैं। दिल छोटा न करें। आग लगने पर कुत्ते नहीं मरते।
मेरी बात सुनते ही नेताजी पाजमा से बाहर तो गए, मुझे आपने कुत्ता कहा -! क्या मैं आपको कुत्ता दिखाई देता हूँ, जरा अपनी जवान को लगाम दें।
मैंने उन्हें प्यार से पुचकारा- ओहो नेताजी ! बिना बात समझे आप नाराज हो जाते हैं। आपको एक बात का पता नहीं है। आजकल विदेशों में लोग भगवान से पर््रार्थना करते हैं- ओह गाँड ! गिभ मी द हर्ट आँफ डाँग। अर्थात् हे भगवान मुझे कुत्ते का सा दिल दें। आजकल पश्चिमी सभ्यता में कुत्ते का क्रेज बहुत बढÞ रहा है। आपको तो मेरा शुक्रगुजार होना चाहिए। मैंने आपको कितने सस्ते में इन्सान से कुत्ते में तब्दील कर दिया ! खैर मनाईए !
नेता जी समझदार निकले। मेरे समझाने पर मान गए। मेरा हाथ पकडÞ कर एक ओर खीचते हुए बोले- आपसे क्या छुपाना ! मैं भी कभी-कभी भगवान से मांगता हूँ कि हे प्रभों ! दूसरे जनम में मुझे किसी अच्छे खाते पीते घर का सुन्दर सा डँगी, बना देना। जिसे उस घर की मालकिन, बहू, बेटी प्यार से मुझे गोद में बिठाए, प्यार से चूमे, चाटे, रात को अपने साथ अपने बिस्तार पर सुलाए। अपने मर्द से ज्यादा मुझे प्यार करे। वस और कुछ नहीं चाहिए। बडंफ्लू, स्वाइनफ्लू, लीडरफ्लू कुछ भी हो, लेकिन डाँगफ्लू तो नहीं होगा। किसी हसीना की गोद में शान से बैठने को मिले और अपने खसम की नजरों कें सामने, वह मुझे प्यार से चूमे तो मैं यहाँ की लीडरी को लात मार कर विदेश में कुत्ता होना पसन्द करुंगा। लिडरफ्लू हो, और मैं मर जाउँ तो बेहतर हो ! िि

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