लुम्बिनी में मधेशियों पर प्रतिवन्ध क्यों ? : विकास प्रसाद लोध

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विकास प्रसाद लोध,लुम्बिनी | विश्व शान्ति का उद्गम विन्दु के रुप मे विश्व मे प्रख्यात एशिया के तारा महामानव भगवान गौतम वुद्ध की जन्मस्थली लुम्बिनी मे भगवान वुद्ध की २५६०वा जन्म दिवश (पुर्णीमा) के शुभअवसर पर १६ मई २०१६ को होनेवाले लुम्बिनी महोत्सव तथा अन्तराष्ट्रिय वौद्ध सम्मेलन की तैयारी जोरो से चल रही थी। मौजुदा मधेश अन्दोलन का प्रभाव कहा जाए या नेपाली शासक की विभेदिय निति उस महोत्सव मे स्थानिय अर्थात मधेशीयो को सामेल नही होने देने की पुर्ण वन्दोवस्त करदिया गया था । उसके जगह पहाड से  लाखौँ संख्या मे उपस्थित कराने की योजना के तहत करोडौ की पुँजी लगाया गया  |  जिसके कारण स्थानिय लोगों मे काफी नराजगी भी है और सभी दुखित भी हैं।
इधर डा सिके राउत के नेतृत्व मे सञ्चालित स्वतन्त्र मधेश गठवन्धन जो मधेश से नेपाली उपनिवेश को पुर्णतया अन्त करने की दिसा में अग्रसर है | यह गठवन्धन मधेश मे अपना अधिकार खोजने से वेहतर खुद निर्माण करने की यजना आगे लायी है |   गठवन्धन ने २५६०वा वुद्ध उत्सव के अवसर पर लुम्विनि मे पधार रहे २५ देशों के अगान्तुक अतिथियो को फुलमाला सहित स्वागत करने के लिए तैयार है | मधेश राष्ट्र की वास्तविकता से दुनिया को रुवरु कराने तथा गौतम वुद्ध की वास्तविक जन्म स्थल नेपाल या भारत नही वल्कि मधेश है  ईश प्रकार की तमाम तथ्यो को दुनिया के समक्ष रखने की एक योजना सार्वजनिक किया है। वह योजना नेपाल सरकार को चुभ रही है ।

स्वतन्त्र मधेश गठवन्धन के सदस्यो ने अपनी योजना अनुसार १६ मई २०१६ को लुम्विनि पहुचना सुरु हुआ था। परन्तु ८ सदस्यों को वाहर से ही गिरफ्तार कर लिया गया। लुम्विनि मे केवल पुलिस अौर पहाड से आए लोग ही दिखाइ देते हैं , लाखौ पुलिस अौर लाखौ पहाडि लोगो से तथा उनके वडे वडे वाहन से लुम्विनि मे ट्राफिक जाम लगा हुआ था। इस प्रकार की दशा लुम्विनि मे पहले कभी नही हुआ था। यह पहली वार हुआ है जिसका मुख्य कारण था शासक के लिए मधेश मे अपना जनसमर्थन दुनिया को दिखाना | किन्तु अन्तरराष्ट्रिय जगत को क्या पता यह मधेश के नही वल्कि पहाड से रोजाना १००० भत्ते पर आए थे। ८ लोगो की गिरफ्तारी के वाद बाकी सदस्य सव कार्यक्रम स्थल के गेट पर पहुँचे। अौर अन्दर जाने का प्रयास के लिए एक कदम वढाया की पुलिस की सैकडो पुलिस ने घेर लिया गया। अौर इस प्रकार के अन्याय तथा विभेद को देखकर स्वराजियो ने नारा बजी शुरू कर दिया। विभिन्न प्रकार के प्लेकार्ड प्रदर्शन करने लगे। तवतक पुलिस लाठि चार्ज करते हुवे ३६ लोगो को गिरफ्तार कर लिया । प्रशासन के लाख कोशिस के वावजुद गठवन्धन का कार्यक्रम १००% सफल रहा। दुनिया सत्य को जानगई गिरफ्तार ३६ लोगो को गाडी मे डालकर सदरमुकाम भैरहवा ले जाने लगे। रस्ते मे ४ लोगो को गाडी से धक्का देकर निकाल दिया गया। वाकि को भैरहवा पहुचाया गया १२ लोगो को ३४ घण्टे वाद रिहा किया गया। वाकि २० लोगो पर सार्वजनिक मुक्दमा दर्ज किया गया १४ दिन  चरम यातना वाद पुनरावेदन अदालत के फैसला से विना सर्त रिहा किए गए।
इन तमाम कार्य होते समय नेपाल के विभिन्न मिडिया की भीर लग गई सभी ने घटना को वहुत नजदिक से देखा परन्तु किसी ने कुछ नही लिखा या छापा। हलाकि नेपाल के सम्विधान मे वाक स्वतन्त्रता, प्रेस स्वतन्त्रता सव हैं लेकिन केवल कहने के लिए । सत्य यह है कि विना उनके मर्जी आँप अपना ईलाज तक नही कर सकते। इसी विभेद को डा राउत गुलामी की संज्ञा देते है। अौर मेरे विचार से यह सत्य भी है।
वह विभेदकारी घटना हुये आज एक साल हो रहे हैं। प्रशासन आज भी चौकस है हर मधेशी चेहरे को विधिवत तलासी पश्चात ही जाने दिया जा रहा वही पहाड़ी मुल के लोगॅ पर कोई चेकिंग नही वहाँ भी विभेद हो रहा है। स्रोत के जानकारी अनुसार लुम्विनि मे डा राउत के कार्यकर्ताओं को निषेध किया गया है दिखते ही गिरफ्तार करने का आदेश है। कोई क्या करे आपने ही घर मे आपको जाने से रोका जा रहा है। ज्ञात करादु लुम्विनि विकास कोष हमारे पुर्वजो का खेती करने का स्थल था उन्हे वहा से विस्थापीत करके वह जंगल लगाया गया। लुम्विनि के मयादेवी मन्दिर मे हमारे माताए सिन्दुर और तेल आज के दिन चढाया करती थी आज वह भी प्रतिवन्ध है। आज ही लुम्विनि के अशोक स्तम्भ के पास उमेर के अनुसार सभी वच्चो का मुण्डन होता था वहा मुण्डन करने के लिए आज के दिन सैकड़ो नाइ दुर दुर से आते थे लेकिन आज वह पुर्ण प्रतिवन्ध है। धिरे धिरे लुम्विनि से लुम्विनि वासीयो का नियन्त्रम पुर्ण रूप से खत्म कर वहा नेपाली मुल के लोगो का नियन्त्रण राज्य द्वारा स्थापित किए गए है।

ईश प्रकार की घटना मधेश तथा मधेशीयो के लिए नयाँ विल्कुल नही। यह शदियो हर रोज होने वाली एक निरन्तर प्रकृया है। जिसके कारण मधेश मे आक्रोश बढ़ता रहता है। लेकिन इसका निराकरण का उचित उपचार मधेशी तलासने मे विल्मब करते दिख रहे है। जिसका परिणाम भयानक होना निश्चित दिखाई देता है। जहाँ व्यक्ति स्वतन्त्र रुप से वोल नही सकता, जहाँ की मिडिया अन्देखा करती हो, अपने घरमे रहना मुस्किल हो, सभा जुलुस करने पर जहाँ गिरफ्तार करके सार्वजनिक अपराध लगाए जाते हों। वहाँ भला कोई स्वतन्त्र कैसे हो सकता है। सोचनिय वात है। हमे चिन्तन करने का समय अवश्य निकालना चाहिए, हमे छनिक उपल्व्धि के लिए सम्झैता नही करना चाहिए। अब अवश्यकता है एक दिर्घकालिन परिवर्तन की, एक महत्वपुर्ण कदम की, जो मधेश के अधारभुत अधिकार को संरक्षण करने मे सफल हो।

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