लोकतंत्रीय व्यवस्था महज दिखावा तो नहीं ? श्वेता दीप्ति

चुनावी चिन्ह पार्टियों को प्राप्त नहीं हुए हैं, मतदाताओं की नामावली सूची नदारद है, ऐसी ही कई तकनीकी समस्याएँ हैं, ऐसे में क्या एक निष्पक्ष और भयमुक्त निर्वाचन सम्भव है ? यह यक्ष प्रश्न सामने है, जिसके भँवर में जनता फँसी हुई है । आरोप–प्रत्यारोप का बाजार गर्म है, समस्याएँ सामने हैं किन्तु समाधान गौण है

 अप्रैल अंक, सम्पादकीय हिमालिनी, २० अप्रैल |

नववर्ष का आगमन हो चुका है पर धरातलीय स्तर पर नया कुछ नजर नहीं आ रहा । पृथ्वी की गति वही है, सूर्य की तपिश वही है, हवा की छुअन वही है और देश की स्थिर गति भी पूर्व स्थिति में कायम है, ऐसे में नेपाली जनता के पास फिलहाल नया कहने को कुछ नहीं है । हाँ अगर कुछ है, तो वह है असमंजस, खीझ और अपने प्रतिनिधि के प्रति रोष और असंतुष्टि की भावना । उम्मीद और इंतजार के सिवा नेपाली जनता का दामन रिक्त है । कुछ बेहतर होगा इसी उम्मीद के सहारे एक और नए वर्ष का स्वागत करने के लिए हम तैयार हैं ।
चुनाव की बातें अहसास दिला रही हैं कि, देश लोकतंत्रीय व्यवस्था को स्वीकार कर चुका है, किन्तु व्यवहारिकता में यह सिर्फ दिखावा नजर आ रहा है, क्योंकि वर्तमान सरकार देश के हर क्षेत्र को साथ लेकर चलने में असमर्थ नजर आ रही है, बावजूद इसके किसी भी स्थिति में चुनाव कराने के लिए प्रतिबद्ध है । चुनावी चिन्ह पार्टियों को प्राप्त नहीं हुए हैं, मतदाताओं की नामावली सूची नदारद है, ऐसी ही कई तकनीकी समस्याएँ हैं, ऐसे में क्या एक निष्पक्ष और भयमुक्त निर्वाचन सम्भव है ? यह यक्ष प्रश्न सामने है, जिसके भँवर में जनता फँसी हुई है । आरोप–प्रत्यारोप का बाजार गर्म है, समस्याएँ सामने हैं किन्तु समाधान गौण है । सभी अपनी डफली अपना राग अलापने में व्यस्त हैं । इसी दौरान सरकार एक बार फिर कमजोर पहल करने जा रही है । पुराने संशोधन विधेयक की जगह नया संशोधन विधेयक लाया जा रहा है । नया इस मायने में कि इस विधेयक में महत्तवपूर्ण माँगों को हाशिए पर रख दिया गया है और उसके बिना विधेयक लाया जा रहा है । सीमांकन के लिए एक नया आयोग, पुराने अधिकारी और एक लम्बा इंतजार मधेश के हिस्से में जाने वाला है ।
मधेश अपने आकाओं से निराश है क्योंकि, मोर्चा के नेता तय नहीं कर पा रहे कि उन्हें क्या करना है, मधेशी जनता की भावनाओं का सम्मान या उनकी भावनाओं को दरकिनार कर पदीय राजनीति ? उनकी दूरदर्शिता पर मधेश की नजरें टिकी हुई हैं ।
एक नए और बेहतर कल की कल्पना के साथ हिमालिनी समग्र के प्रति आभार और कृतज्ञता ज्ञापित करती हुई नववर्ष की स्वर्णिम शुभकामना हृदय से व्यक्त करती है ।shwetasign

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