लोकतन्त्र जितना मजबूत होगा, निजी क्षेत्र उतना ही ज्यादा उन्नति करेगा : विष्णु अग्रवाल

लोकतन्त्र के बाद खुलने वाले निजी बैंक और उद्योग व्यवसाय करने वालों को लगानी के लिए अवसर दिया और इसके कारण बाजार विस्तार में मदद मिली । १९९१ के नेपाल–भारत वाणिज्य संधि के कारण भी उद्योग और निजी क्षेत्र को निकासी योग्य उद्योग के लिए वरदान साबित हुआ ।

वीरगंज, ११ मई | दिल्ली के श्रीराम कॉलेज से कॉमर्श में स्नातक ४६ वर्षीय बिष्णु अग्रवाल का जन्म काठमाडूं मे हुआ था । देश की राजधानी टेकु में हार्डवेयर की दूकान थी, उनके पिता की । ०४६ साल के आन्दोलन के समय अग्रवाल भारत की राजधानी नई दिल्ली में अध्ययन कर रहे थे । दो करोड़ की पुंजी निवेश कर बिष्णु ने करीब २५ साल पहले राजेश मेटल उद्योग की स्थापना की थी । ६ वर्ष पहले ६० करोड़ रूपए की लागत से बिष्णु ने आरएमसी सीमेंट उधोग की स्थापना की थी । पहले दैनिक ४ सौ टन उत्पादन होने वाला सीमेंट अब दैनिक ८ सौ टन से ज्यादा उत्पादन हो रहा है । दोनों उद्योगों में साढ़े तीन अर्ब से ज्यादा का निवेश है बिष्णु का ।

बिष्णु अग्रवाल

बिष्णु के सीमेंट उद्योग कोे आईएसओ ४१,००१ का वातावरण मैत्री सीमेंट उद्योग की मान्यता मिल चुकी है । राजेश मेटल अपने उत्पादन का ३० प्रतिशत यानी कि १ अर्ब रूपए से ज्यादा का उत्पादन भारत की तरफ निर्यात करता है । वार्षिक ६० करोड़ रूपए से ज्यादा सरकार को राजस्व के रूप में पेमेन्ट करता है । बिष्णु के उद्योग का वार्षिक टर्नओभर ३ अर्ब रूपए है । बिष्णु सरकार की अस्पष्ट आर्थिक नीति के प्रति नाराजगी जताते हुए कहते हैं कि ‘भारत में निर्यात करने वाले उद्योगों को अनुदान न देकर और डॉलर में अन्य देशों की तरफ सोना निकासी करने वालों को अनुदान देने की नीति के बारे में स्पष्ट करना चाहिए ।’ सरकार की उद्योग और अर्थ नीति में स्पष्टता नहीं है । बिष्णु आगे कहते हैं– इसको और ज्यादा व्यावहारिक और लचीला बनाने की आवश्यक्ता है । बिष्णु का मानना है कि अभी देश में राजनीतिक कारण से आर्थिक एजेंडा ओझल में पड़ गया है ।
बिष्णु जानकारी देते हैं कि नेपाल लोहे का सरिया और पाईप तथा लोहे से बने अन्य सामानों में भी आत्मनिर्भर हो चुका है । भारत से कच्चा पदार्थ आयात कर नेपाल में उत्पादन करने की परिपाटी भी अब बदल रही है । धीरे–धीरे देश में ही भ्यालू एडेड उत्पादन बढ़ती जा रही है, जिससे कच्चा पदार्थ उत्पादन में भी नेपाल के आत्मनिर्भर होने में बिष्णु विश्वस्त हैं । सन् १९९१ से उत्पादन शुरु करनेवाले राजेश मेटल ने ५ साल के बाद ही १९९६ से निर्यात शुरु किया था । निर्यात शुरु करने के एक साल बाद ही राजेश मेटल ने आईएसआई चिन्ह प्राप्त कर लिया था । देश भर के ५ बड़े जिआई पाईप उद्योग में बिष्णु का उद्योग दूसरे स्थान पर है । ५ में से चार उद्योग भारत की तरफ अपने जिआई पाईप निर्यात करते हैं । बिष्णु के राजेश जिआई पाईप भारत के मुजफ्फरपुर से बंगलुरु तक जाता है । सिंचाई और बोरिंग मे ज्यादा प्रयोग में आने वाला यह जिआई पाईप को भारत निर्यात करने के लिए १२ प्रतिशत एक्साईज ड्यूटी देना पड़ता है ।
अपने उद्योग की शुरुआती दिनों को याद करते हुए बिष्णु कहते हैं– ‘उस समय ज्यादा मुश्किल नहीं था, उस समय बिजली की किल्लत अभी जैसी नहीं थी । बिजली, श्रम और उद्योग के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों के साथ होने वाले विवाद ही उद्योग की मुख्य समस्या है ।’

बिष्णु कहते हैं कि लोकतन्त्र जितना मजबूत होगा, निजी क्षेत्र उतना ही ज्यादा उन्नति करेगा । बिष्णु का मानना है कि लोकतन्त्र ने उद्योग में प्रवेश करने वाले रास्ते को आसान बनाया । लोकतन्त्र के बाद खुलने वाले निजी बैंक और उद्योग व्यवसाय करने वालों को लगानी के लिए अवसर दिया और इसके कारण बाजार विस्तार में मदद मिली । १९९१ के नेपाल–भारत वाणिज्य संधि के कारण भी उद्योग और निजी क्षेत्र को निकासी योग्य उद्योग के लिए वरदान साबित हुआ । बिष्णु कहते हैं कि उद्योग और व्यवसाय का विकास तो हुआ पर किसी भी सेक्टर में शुरुआती दौर में दिक्कतें तो आती ही हैं । इसको कैसे हैण्डल करते हैं, इसमें ही उद्योग, व्यवसाय की सफलता निर्भर करती है । चुनौती हरेक क्षेत्र में है । व्यवसाय के मापन का अर्थ किसी भी उद्योग धंधा मे होने वाला नाफा है । जितना ज्यादा अवसर मिलता, उतना ही ज्यादा नाफा भी होता शायद । बिष्णु का मानना है कि देश की अवस्था और सरकारी नीति के कारण भी उद्योग, व्यवसाय में प्रभाव पड़ता है । सरकार ने समय में ही सड़क और बिजली की उपलब्धता और विकास के लिए ठोस निर्णय लिया होता तो आर्थिक उन्नति अभी जितना है, उससे ज्यादा ही होतीे । प्रगति हो रही है पर जितना सोचा था, उतनी नहीं हो पा रही है । बिष्णु अग्रवाल नें आगामी दिनों में अपने उधोग के विस्तार और योजना के बारे में भी बताया । रंगीन जस्ते–पाते के उत्पादन के साथ ही राजेश मेटल का उत्पादन और आरएमसी सीमेंट के उत्पादन को भी बढ़ा कर बिष्णु ने निर्यात भी कर लिया है । बिष्णु के कारखाने में कर्मचारी और मजदूर दोनों मिला कर ४ सौ से भी ज्यादा काम करते हैं ।
बिष्णु आगे कहते हैं कि निर्यात यदि बढ़ेगा तो इसके साथ–साथ उत्पादन भी बढ़ सकता है । बिजली की कमी के कारण कठिनाई झेल रहे हैं इसीलिए हम उद्योग धंधे में भी पीछे हैं । बिजली की उपलब्धता यदि पर्याप्त मात्रा में हो सके, तो हम और ज्यादा उधोग, व्यवसाय में प्रगति कर सकते हैं । उद्योग क्षेत्र के विस्तार के लिए हमें निर्यात में जाना ही होगा । इसका कोई विकल्प नहीं है । हमारे देश में आतंरिक बाजार बहुत ही सीमित है इसीलिए भारत या अन्य देशों की तरफ निर्यात में ध्यान देना जरुरी है ।
उद्योग में बिष्णु ही अपने परिवार में पहली पीढ़ी हैं, जिसका नेतृत्व वह बखुबी कर रहे हैं । अंत में बिष्णु अग्रवाल कहते हैं कि सरकार की उद्योग और अर्थ–नीति को ज्यादा से ज्यादा व्यावहारिक और लचिलापन होना बहुत ही आवश्यक है । ( हिमालिनी अप्रैल अंक से )
प्रस्तुतिः बिम्मी शर्मा

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