लोकतन्त्र व शान्ति प्रक्रिया पर असर:अर्जुन नरसिंह केसी

नेपाली कांग्रेस, माओवादी को लोकतान्त्रिक मूल्य मान्यता व पद्धति में लाने के लिए लम्बे समय से प्रयासरत है । जनआन्दोलन के समय तत्कालीन सात राजनीतिक दल व माओवादी के बीच हुए १२ सूत्रीय समझदारी और उसके बाद हुए सभी सहमति समझौते का मर्म भी यही था । माओवादी को लोकतन्त्र के प्रति प्रतिबद्ध शक्ति बनाने के क्रम और गति के साथ ही देश की शान्ति प्रक्रिया का भविष्य भी इससे जुडा है । इस समय हम माओवादी को लोकतांत्रिक मान्यता के अनुरूप रूपान्तरित होते देखना चाहते हैं और हमारा प्रयास भी यही है ।
लेकिन माओवादी के भीतर लोकतन्त्र को स्वीकार करने या ना करने को लेकर आपसी द्वन्द्व चल रहा है । जिसका सीधा व नकारात्मक असर शान्ति प्रक्रिया व संविधान निर्माण पर ही पडÞ रहा है । हम चाहते हैं कि पूरी माओवादी पार्टर्ीीान्ति व संविधान निर्माण के पक्ष में खडÞा हो ।
शान्ति प्रक्रिया व लोकतन्त्र के मामले पर माओवादी के भीतर काफी अन्तरविरोध है । समय व नेता के साथ माओवादी का लोकतन्त्र व शान्ति प्रक्रिया के संबंध में विचार भी बदलते रहते है । समय-समय पर अलग-अलग विचार आने से माओवादी के प्रति लोगों का शंका होना लाजिमी है । एक दृष्टि से देखा जाए तो यह लगता है कि माओवादी शान्ति प्रक्रिया को सीढÞी बनाकर अपने दर्ीघकालीन अधिनायकवादी राज्य व्यवस्था और अपने अनुकूल का संविधान जारी करना चाह रहे हैं । माओवादी नेताओं का भाषण सुनकर भी लगता है कि लोकतान्त्रिक प्रणाली के प्रति शाब्दिक चातर्ुय को ही अपनाकर अपना मिशन तो पूरा नहीं करना चाहते –
यदि वाकई में शान्ति प्रक्रिया को रणनीतिक रूप से प्रयोग करने का प्रयास माओवादी कर रही है तो यह देश के प्रति उनकी सबसे बडÞी राजनीतिक बेइमानी होगी । और ऐसा नहीं है तब भी उसके व्यवहार से शान्ति प्रक्रिया में हर्ुइ देरी से देश को ही नुकसान है । माओवादी में चाहे उदारवादी कहे जाने वाले नेता हों या फिर क्रान्तिकारी विचारों के पोषक दोनों की मानसिकता एक सी देखने को मिल रही है । उनके क्रियाकलाप से ऐसा लगता है, मानो वो बल प्रयोग कर अपनी साख को समाज में जबरन स्थापित करना चाहते हैं । माओवादी नेताओं के द्वारा शुरु हुए आरोप प्रत्यारोप और एक दूसरे पक्ष के ऊपर भौतिक आक्रमण करना माओवादी के भीतर व्याप्त निहायत ही गैर लोकतान्त्रिक संस्कृति का उदाहरण है ।
उनका आन्तरिक द्वन्द्व भी अधिनायकवादी विचार प्रवृति के रूप में दिखता है । दोनों समूह के नेताओं द्वारा प्रयोग की जाने वाली भाषा व शब्द के अलावा शक्ति का स्रोत हथियार ही होने की बात पुष्टि होती है । समस्या का जडÞ माओवादी नेताओं के भीतर व्याप्त सैन्यवादी चिन्तन है । दूसरी बात क्या है कि माओवादी के नेताओं में सत्ता व शक्ति का अभ्यास करने की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा भी हावी है । इसके बावजूद नेपाली कांग्रेस का मानना है कि माओवादी में यदि विभाजन होता है तो यह लोकतन्त्र व शान्ति प्रक्रिया के लिए नुकसान हो सकता है ।
-लेखक केसी नेपाली कांग्रेस के केन्द्रीय सदस्य हैं ।)

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