लोकमान का कुसुर सत्य

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आर एन यादव ,२३माघ, काठमान्डू
व्यवस्थापिका संसद के महाअभियोग सिफारिस समिति ने तत्कालीन अख्तियार प्रमुख लोकमानसिंह कार्की विरुद्ध के महाअभियोग प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कुसुरों को सत्य सावित होने का निष्कर्ष निकाला गया हैं । महाअभियोग सिफारिस समिति अन्तर्गत के  उपसमिति ने कार्की के उपर छान बीन करने की प्रतिवेदन की  तैयारी हो चुकी है  और इस प्रतिवेदन को समिति  के समक्ष पेश करने की  तैयारी  भी हो रही है  ।
    कार्की के उपर लगाया गया महाअभियोगस मबन्धी अध्ययण प्रतिवेदन पेश करने के लिए उपसमिति को एक हफ्ते का  समय दिया गया था । उपसमिति के संयोजक रामनारायण बिडारी के  अनुसार सम्बन्धित निकाय के साथ् विमर्श करने पर कार्की दोषी पाए गए  है ।  संयोजक विडारी का कहना है कि सीमित स्रोत साधन और समय के भीतर ही प्रतिवेदन तैयार की गई है ।
कार्की अख्तियार मे रह्ते समय उनके कुसुर समबन्धी अनुसन्धान करने के लिए  महाअभियोग सिफारिस समिति ने बिडारी के संयोजकत्व में उपसमिति गठित हुई थी । उपसमिति ने अपने ही कार्यकाल में कार्की के  द्वारा विभिन्न निकायों  में अनुसन्धान के लिए सम्पूर्ण विवरण को  छान बीन की गई  थी । उपसमिति ने कार्की के उपर लगाए गए महाअभियोग के सम्बन्ध में महान्यायाधिवक्ता  के साथ् भी विमर्श  किया गया था  ।
 सर्वोच्च अदालत ने तत्कालीन अख्तियार प्रमुख कार्की को अयोग्य ठहराकर पद च्युत करने की घोषित कर दी है । कार्की को अख्तियार दुरुपयोग करने की , संसद तथा सर्वोच्च अदालत के मानहानि करने की , समानान्तर सत्ता चलाने की , संवैधानिक निकाय के प्रमुख की  हैसियत से  आचरण न करने की और  मेडिकल शिक्षा के उपर हस्तक्षेपकारी भूमिका निर्वाह कराने  के आरोप सहित प्रस्ताव संसद में विचाराधीन अवस्था में  है ।
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